‘फिसल गए तो हर-हर गंगे’ वाले नकवी साहब बेचारे अफ़सोस जता रहे होंगे

पंकज कुमार झा : कोई कमर वहीद नकवी थे इंडिया टीवी में. नहीं रहे अब वहां. उनके जाने के बाद से सारे सिक्युलर इतने ज्यादे आहत हैं जितना क्रिकेट में पाकिस्तान की हार पर भी नहीं होते. खैर. इंडिया टीवी के दफ्तर तक चल कर पहुचे थे नरेंद्र मोदी 'आपकी अदालत' में. वही फार्मेट, वही होस्ट रजत शर्मा, सदा की तरह एक बुद्धिजीवी जज, ढेर सारी जनता और टोकरी भर-भर टीआरपी. हर पांच मिनट पर ट्रक भर विज्ञापन. मोदी जी के अलावा कुछ भी विशेष नहीं. सब पूर्ववत. हर रिपीट टेलीकास्ट के बाद बढ़ता उत्साह. ट्विटर पर नम्बर वन (या टू) ट्रेंड करता हुआ.

ठीक उसी समय 'क्रांतिकारी' चैनल पर युवा जोश, हर हाथ तरक्की वाले बालक, हिन्दी चैनल का अपना पहला 'इंटरव्यू' दे रहे थे. वहां नियमित एंकर नहीं. कॉमर्सियल ब्रेक नहीं. बिलकुल निर्मल दरबार की तरह, घर में ही सज़ा था दरबार. बिना किसी विज्ञापन के. (शायद स्लॉट खरीद लिया था कांग्रेस ने या फिर विज्ञापन मिले ही नही होंगे चैनल को इस कार्यक्रम के लिए) इतने 'महत्वपूर्ण' साक्षात्कार लेने की जिम्मेदारी किसी ऐसे 'रिश्तेदार' को सौंप दी गए थी जो बेचारा खीसें निपोरे बिछ-बिछ जा रहा था क्यूटी पर. अंतिम 'सवाल' था भी यही कि फलाने-ठिलाने जी अब शादी कर लीजिये प्लीज़. हिन्दुस्तान की हज़ारों-लाखों लडकियां आपके इंतज़ार में बैठी हैं. (पूरे कुनबे की गिनती कर ली थी शायद एंकर ने.) लेकिन 'क्रांतिकारी' एंकर साहब को इस साक्षात्कार को करने का पुण्य लाभ नहीं मिला. बेचारे हाथ मलते रह गए सदा की तरह.

अब तीसरा दृश्य देखिये. एएनआई एक लंबा साक्षात्कार लेता है मोदी जी का. चुकि वो टीवी के समाचारों की एजेंसी है तो ज़ाहिर है सभी चैनल्स तक उसे पहुचाता है. शायद ही कोई चैनल ऐसा होगा जिसने उस 'साक्षात्कार' को न चलाया हो. सबने खूब चलाया, एक्सक्लूसिव न होने के बावजूद. खूब टीआरपी भी बटोरा और विज्ञापन भी कबाड़ा. अब इसी इंतज़ार में हूं कि जब पूरी तरह फार्मेट में शूट किये गए मोदी जी के सुन्दर साक्षात्कार के कारण एक सिक्युलर विकेट गिर सकता है. तब तो एएनआई वाला फीड तो शायद सभी चैनलों की गंदगी एक झटके में ही साफ़ कर देगा. सच में अब अच्छे दिन आने वाले हैं यार ..ऐसा लग तो रहा है….!

वैसे कहीं से कोई विकेट और चटकने की खबर मिली आपको? या 'फिसल गए तो हर-हर गंगे' वाले नकवी साहब बेचारे अफ़सोस जता रहे होंगे कि एक बार तो कोशिश कर लेते किसी तरह नौकरी बचाने की. जो भी हो लेकिन अच्छे दिन तो सच में आते दिख रहे हैं. जय हो.

भारतीय जनता पार्टी से जुड़े पत्रकार और नेता पंकज कुमार झा के फेसबुक वॉल से.

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