फैजाबाद में साहित्यकार अनिल पर सांप्रदायिक हमले और अयोध्या में युगल किशोर शास्त्री की गिरफ्तारी की निंदा

लखनऊ । रिहाई मंच ने हिंदी साहित्य के जाने-माने कवि, सांप्रदायिकता विरोधी अभियानों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता व फैजाबाद के साकेत डिग्री कालेज के प्राध्यापक डा0 अनिल सिंह पर कल 11 जनवरी को एक संघी गुण्डे द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की है।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने जारी बयान में कहा कि यह घटना साबित करती हे कि सपा सरकार में किस तरह संघी तत्वों के हौसले बुलंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर 2012 में फैजाबाद में हुई सांप्रदायिक हिंसा, जिसमें पीडि़तों को न्याय दिलाने की लड़ाई में डा0 अनिल सिंह सक्रिय रहे हैं, में शामिल अपराधी संघी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्यवाई की गई होती तो वे ऐसी हिम्मत नहीं कर सकते थे। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि धर्मनिरपेछता के नाम पर सत्ता में आई सरकार किस तरह हिंन्दुत्वादियों के पक्ष में खड़ी हो गई है।

द्वारा जारी-
शाहनवाज आलम, राजीव यादव
प्रवक्ता रिहाई मंच
09415254919, 09452800752


अयोध्या में युगल किशोर शास्त्री की गिरफ्तारी की निंदा

अयोध्या के महंथ युगल किशोर शास्त्री ने घटना की जांच हेतु एक नागरिकों का दल बनाया। इस जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि स्थानीय पुलिस घटना में पी.ए.सी. की संलिप्तता की जांच करने में अक्षम है इसलिए जांच सी.बी.आई. से कराई जाए। युगल किशोर शास्त्री 12 जनवरी, 2014, के अपने मंदिर में एक जन सुनवाई कर इस रपट को जारी करने वाले थे। किंतु 11 जनवरी को दिन में 1-2 बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) युगल किशोर शास्त्री की गिरफ्तारी की भर्त्सना करते हुए यह मांग करती है कि जीशान हत्या कांड की पुनर्विवेचना कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाए और निर्दोष मुहम्मद इरशाद और आजाद अहमद को छोड़ा जाए।

20 दिसम्बर 2013 को बिहार निवासी सैयद जीशान की अयोध्या की जिन्नाती मस्जिद में हत्या कर दी जाती है। साथ ही पैगम्बर शीश अलैह व उनकी बीवी की मजार, पी.ए.सी. कैम्प के नजदीक हजरत शमसुद्दीन की मजार तथा जिन्नाती मस्जिद में स्थित दो मजारों की तोड़-फोड़ की जाती है। जीशान की हत्या की सूचना देने वाले इमरान को ही पुलिस ने मारा पीटा और उसकी भांजी रानी से कहलवाना चाह रहे थे कि उसका जीशान के साथ अवैध सम्बंध था।

मुहम्मद इरशाद पुत्र मंजूर अहमद जो जिन्नाती मस्जिद के मुअज्जिन हैं तथा आजाद अहमद दोनों हैबतपुर निवासी को पुलिस आरोपी बनाती है। जबकि उसी दिन आजाद के वालिद अब्दुल रऊफ की मृत्यु हुई थी। क्या कोई शोकाकुल बेटा उसी दिन किसी की हत्या और मस्जिद-मजार में तोड़-फोड़ करेगा?

जिन्नाती मस्जिद के सामने स्थित कब्रिस्तान में पी.ए.सी. के जवान शौच करने आते थे जिनको जीशान ने मना किया था। पी.ए.सी. कैम्प से पास हत्या हुई और पी.ए.सी. वालों को पता ही नहीं?

गिरीश कुमार पाण्डेय, ओंकार सिंह, मोहम्मद शोएब, संदीप पाण्डेय, बाबी
रमाकांत (9839073355)

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