फोटो पत्रकार खरीदें तीन लाख का कैमरा अन्यथा हो जाएंगे जिला बदर!

: राजस्थान पत्रिका ने सुनाया हिटलरी फरमान : राजस्थान पत्रिका प्रबंधन के कूटनीतिक रवैये के चलते जयपुर में न केवल संवाददाता बल्कि फोटो जर्नलिस्ट भी पशोपेश की स्थिति में आ गए हैं। पिछले दिनों जहां श्रीगंगानगर तबादले के चलते युवा पत्रकार अविनाश गौड़ की अकाल मृत्यु हो गई थी, वहीं अब अन्य संपादकीय टीम के लोगों की नौकरियों पर भी पत्रिका प्रशासन ने तलवार लटका दी है। जो कोई कर्मचारी पत्रिका प्रबंधन की मनमर्जी के नियमों को मानने को तैयार नहीं है, उसे बैंग्लुरु, हुबली, कोलकाता, अहमदाबाद आदि दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरित करने की धमकी दी जा रही है।

इससे यहां के न केवल संपादकीय बल्कि अन्य विभागों के लोग भी बुरी तरह आशंकित हैं। ताजा मामला यह है कि पत्रिका प्रबंधन ने जयपुर में अपने सभी फोटो जर्नलिस्टों को फरमान जारी कर दिया है कि उन्हें अब निकॉन के डी 70, डी 90 की जगह कम से कम तीन लाख रुपए की कीमत वाले कैनन कैमरे खरीदने होंगे। जो फोटो जर्नलिस्ट यह कैमरे नहीं खरीदेगा, उसे जयपुर मुख्यालय से बाहर दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

कैनन के इस भारी कीमतों के कैमरे खरीदने के लिए आधे यानि कि करीब डेढ़ लाख रुपए फोटो जर्नलिस्ट को अपने स्तर पर जुटाने होंगे, वहीं शेष आधी रकम कंपनी उपलब्ध कराएगी। यही नहीं, कंपनी की ओर से मुहैया कराई जाने वाली यह राशि भी फोटो जर्नलिस्ट के वेतन में से प्रति माह तीन हजार रुपए के हिसाब से कटौती की जाएगी। पत्रिका के जयपुर संस्करण में काम करने वाले फोटो जर्नलिस्ट जिन्हें महीने के नौ से बारह हजार रुपए प्रतिमाह का वेतन मिलता है, इस वेतन में भी उनके मोटरसाइकिल का पेट्रोल व मोबाइल का भत्ता शामिल है। भला वे इस कटौती के कारण अपना परिवार किस प्रकार पाल सकेंगे, उनके समक्ष यह बड़ा सवाल खड़ा है।

पत्रिका प्रबंधन ने चेता दिया है कि जयपुर में सिर्फ उन्हीं फोटो जर्नलिस्टों को रखा जाएगा, जो तीन लाख रुपए का कैनन कैमरा खरीदेंगे। पत्रिका प्रबंधन के इस नए फरमान की वजह यह है कि पत्रिका प्रबंधन ने स्थानीय फोटो को अन्तरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के लिए एक एजेंसी से करार किया है। इस करार के कारण फोटो जर्नलिस्टों की ली गई फोटो को पत्रिका प्रबंधन एजेंसी को देगा और एजेंसी से मिलने वाली राशि का दस प्रतिशत फोटो जर्नलिस्ट को भी मिलेगा। एजेंसी से होने वाली आय फोटो जर्नलिस्ट के लिए कितनी फायदेमंद है, यह तो भविष्य बताएगा। लेकिन अब फोटो पत्रकारों के समक्ष यह समस्या है कि वे अपने स्तर पर जुटाने वाले डेढ़ लाख रुपए भला कहां से लेकर आएंगे।

जयपुर से एक पत्रकार व पत्रिका का पूर्व कर्मचारी

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