फ्लाप शो साबित हुआ द्विजेन्द्र तिवारी के संपादकत्व वाला मुंबई का नया हिंदी अखबार ‘एब्सोलुट इंडिया’

मुंबई। मुंबई महानगर में एक और हिंदी अख़बार ने दस्तक दे दी है। पर पहले की तरह एक बार फिर हिंदी भाषियों को निराशा ही हाथ लगी। बड़े बड़े दावो के साथ शुरू हुए 'एब्सोलुट इंडिया' नाम के इस 4 रुपये मूल्य वाले अख़बार में बस एक चीज़ नयी है कि इसमें एडिट पेज नहीं है। लोकल कवरेज बेहद कमजोर है।

यह अख़बार फ़िलहाल पुरानी खबरें परोस रहा है। अख़बार शरू होने से पहले इसके प्रबंधन द्वारा एक बिलकुल अलग अख़बार देने को लेकर बड़े बड़े दावे किये गए थे। इसके प्रधान संपादक द्विजेन्द्र तिवारी लम्बे समय से पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं पर अपने इस अख़बार के लिए वे अच्छी टीम नहीं बना पाए।

मुंबई में गिनती के लिए एक दर्जन से अधिक अख़बार हैं पर एक नवभारत टाइम्स को छोड़ कर किसी को स्तरीय नहीं कहा जा सकता। हालाँकि प्रतिस्पर्धा के अभाव में नवभारत टाइम्स की कवरेज भी संतोषजनक नहीं है. सिर्फ 10 पेज वाले एनबीटी में भी बासी खबरें ही पढ़ने को ज्यादा मिलती हैं, पर भाषाशैली और खबरों की विश्वसनीयता के बूते यह अख़बार नंबर वन बना हुआ है.

नए अख़बार एब्सोलुट इंडिया से मुंबई के हिंदी पत्रकारों को कुछ आशा बंधी थी कि एक अच्छा हिंदी अख़बार बाजार में आने से हिंदी पत्रकारिता में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी पर फ़िलहाल इस अख़बार ने निराश किया है. हालाँकि इस समाचार पत्र में सुधार की संभावना है. अख़बार की भाषा अच्छी है और फिल्म पेज पर संतोषजनक फीचर सामग्री है. एडिट पेज का अभाव खटक रहा है और कीमत भी कुछ ज्यादा लग रही है. एक बेनाम बैगर अच्छे कंटेंट वाले अख़बार के लिए 4 रुपये चुकाना मुंबई के हिन्दीभाषी शायद ही पसंद करें.


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