बंगाल में प्रेस वालों की दिक्कतें नहीं दिखीं क्या काटजू साहेब?

Ravi Prakash : भाई, ये मार्कंडेय काटजू क्या चीज हैं? कोर्ट में सर्टिफिकेट बांटते थे क्या? पहले बोले, बिहार में प्रेस स्वतंत्र नहीं है. अब बंगाल आकर बोले ममता अतुलनीय महिला हैं. बंगाल में प्रेस वालों की दिक्कतें नहीं दिखीं क्या काटजू साहेब? या फिर राजनीति में उतरने का इरादा है? बहस होनी चाहिए भाई इस आदमी के बयानों पर.

        Nadim S. Akhter रवि भाई, मुझे लगता है कि बंगाल के पत्रकारों को काटजू साहब को खुला खत लिखना चाहिए कि आखिर किन संदर्भों में उन्होंने ये बयान दिया है..
 
        Nadeem Akhtar बहुत ही अनियंत्रित किस्म की बयानबाजी करते हैं काटजू साहब। मुझे लगता है कि उन्हें बयान देने से पहले वर्तमान दौर की चुनिंदा सियासी कारगुजारियों पर भी गौर फरमाना चाहिए।
   
        Ravi Prakash नदीम भाई, मैं भी ऐसा ही सोचता हूँ. लेकिन, लिखेगा कौन? और लिखने पर करवाई क्या होगी? बिहार में नौटंकी कराई काटजू साहेब ने. बयान दर्ज करवाए. अब आउटकम क्या है. यह तो बताया ही नहीं. पटना में उनका कार्यक्रम विश्वविद्यालय में था. वहां शिक्षा के बजाय प्रेस की स्वतंत्रता पर बोल गए. हंगामा हो गया. मैं सहमत हूँ क़ि नीतीश कुमार क़ि सरकार मीडिया पर नियंत्रण कर चुकी है. लेकिन, प्रेस परिषद् ने इसकी स्वतंत्रता के लिए किया क्या? जो पत्रकार प्रेस परिषद् के सदस्य हैं, उनके राज्य में जब पूर्णिया में एक पत्रकार को रूपम पाठक वाले मामले में जेल भेजा गया, तो वे महोदय क्या कर रहे थे? हद है भाई.
    
        Ravi Prakash प्रेस परिषद् के अध्यक्ष का पद भी लगता है पोलिटिकल हो चुका है मौन-मोहन सिंह जी क़ि सरकार में.
     
        Vikas Kumar very well said!!!!
      
        Nadim S. Akhter रविभाई, आप initiative ले सकते हैं. अगर कोई साथ न दे, तो ऐकला चलो रे..व्यकितगत तौर पर भी लिख सकते हैं. अभी आप बंगालेमें हैं और वहां के पत्रकारों के हालात से वाकिफ हैं. उनसे पूछिए कि बंगाल में एक कार्टून बनाने पर जेल भिजवाने वाली ममता के राज में प्रेस कितना स्वतंत्र है और ममता कैसे अतुलनीय हैं. और आउटकम के लिए तो बिहार के पत्रकारों को ही काटजू साहब से पूछना चाहिए..और व्यापक तौर पर हम सब को.
       
        Ayush Kumar Bihar mai KATJU sir ka diya byaan 110% sahi hain,par bangal (Mamta) par diya byaan samajh se pre hain.dhanywaad.
        
        विस्मय अलंकार ravi ji -thik hi to kaha mamta atulaniy hai ,aap sandarbh ulat dijiye bas mamla phit ho jayega
         
        Vishal Tiwari दिक्कत उनके साथ ये है की अपने से जायदा बुद्धिमान किसी को मानते हीं नही !
         
        Manish Saandilya एक चेहरे में छिपे होते हैं कई चेहरे, जिसे भी देखना हो बार बार देखिये….

कई अखबारों में संपादक रह चुके और इन दिनों दैनिक जागरण, कोलकाता में सेवा दे रहे पत्रकार रवि प्रकाश के फेसबुक वॉल से साभार.


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