कोलकाता : विधानसभा सत्र के दौरान विस परिसर में संवाददाता सम्मेलन पर रोक के फैसले के खिलाफ कांग्रेस और माकपा लामबंद हो गए हैं। दोनों ही दलों ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा फैसला वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं तृणमूल सरकार के कई मंत्री स्पीकर के फैसले के बचाव में उतर आए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा है कि विधानसभा परिसर में संवाददाता सम्मेलन पर रोक लगाना उचित नही है। वहां सभी दलों के विधायक दल के नेता बैठते हैं। विधानसभा के अपने कक्ष में वे राजनीतिक बैठकें भी करते हैं। उन्हें वहां हर समय प्रेस से बात करने का अधिकार है। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष विमान बंदोपाध्याय ने संवाददाता सम्मेलन पर रोक लगाने का जो फरमान जारी किया है, वह आश्चर्यजनक है।
माकपा नेता सूर्यकांत मिश्रा ने कहा है कि वे स्पीकर को पत्र लिखकर इस फैसले का विरोध करेंगे। स्पीकर ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो इस मुद्दे पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। नेता विपक्ष ने कहा है कि सरकार की योजना परिवहन पर सब्सिडी बंद करने की है। मुख्यमंत्री ने निगमों को आत्मनिर्भर बनने के लिए समय सीमा भी तय कर दी है। यदि निगम लाभजनक नहीं हुए तो सरकार सब्सिडी बंद कर देगी। इससे परिवहन कर्मियों का वेतन व पेंशन मिलने पर संदेह पैदा हो गया है। सूर्यकांत ने कहा कि इस मुद्दे पर वह आंदोलन करने को तैयार हैं। जनहित विरोधी फैसले किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहींकिए जाएंगे। वहीं स्पीकर ने कहा है कि विपक्ष के नेता का पत्र पढ़ने के बाद वह जरूरत पड़ने पर सभी दलों के साथ इस मुद्दे पर बैठक करेंगे। स्पीकर ने यह भी दलील पेश की है कि सत्र नहीं चलने के दौरान सिर्फ विपक्ष के नेता के संवाददाता सम्मेलन करने पर रोक नहीं लगाई गई है। विधानसभा सत्र चलने के दौरान सभी राजनीतिक दलों के नेता मीडिया सेंटर में संवाददाता सम्मेलन करने को स्वतंत्र हैं।
स्पीकर ने कहा है कि इस संबंध में बातचीत का विकल्प खुला हुआ है। पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि विधानसभा में स्पीकर सर्वेसर्वा हैं। उन्हें वहां कोई भी आदेश जारी करने का अधिकार है। संवाददाता सम्मलेन पर अगर वे कोई नियम लागू करना चाहते हैं तो इसे तूल देने की जरूरत नहीं है। खेल मंत्री मदन मित्रा ने स्पीकर के फैसले को जायज ठहराते हुए कहा कि विधानसभा में विपक्ष के नेता जब भी संवाददाता सम्मेलन करते हैं, उसमें राजनीतिक मुद्दा ही प्रभावी रहता है। विस से जुड़े विषय पर वे कम ही बोलते हैं। हालांकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हाशिम अब्दुल हलीम मित्रा के बयान से सहमत नहीं हैं। हलीम ने इस फैसले को अपराध की संज्ञा दी है। साभार : जागरण






