बंदी के कगार पर पहुंच गया है मौर्या टीवी

: प्रकाश झा का हुआ बिहार से मोहभंग : मात्र 34 स्टाफ रह गए हैं पटना कार्यालय में : एक साल से नहीं मिल रहा स्ट्रिंगरों को वेतन : राजनीतिक संपादक नवेन्दू भी गए लंबी छुट्टी पर : पंद्रह करोड में बिकने को तैयार है मौर्या की बिल्डिंग

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में पूरे तामझाम के साथ 7 फरवरी 2010 को प्रारंभ हुआ मौर्या टीवी चैनल अपनी स्थापना के तीन वर्ष बाद अब दम तोड़ने के कगार पर पहुंच गया है। आने वाले कुछ माह के अंदर अगर यह चैनल बंद हो जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। सूत्रों की माने तो बीते दिनों गांधी मैदान में आयोजित बिहार दिवस में अपनी हुई उपेक्षा से चैनल के मालिक सह चर्चित फिल्म निर्माता प्रकाश झा काफी दुखी हैं और उन्होंने बिहार को अलविदा कहने और अब अपना सारा ध्यान फिल्म निर्माण में ही लगाने का मन बना लिया है।

मौर्या टीवी को बंदी के कगार पर पहुंचाने में मुख्य भूमिका प्रकाश झा के भांजे और चैनल के निदेशक मनीष झा की बतायी जाती है। कभी होटल मौर्या में वेटरों को पांच-पांच हजार की टिप्स देने वाले मनीष झा अब साधारण होटल में बैठने को मजबूर हैं। कंपनी की स्थिति यह है कि बीते वर्ष के मार्च महीने से ही दर्जनों स्ट्रिंगरों (वीडियो रिपोर्टरों) को वेतन नहीं मिला है। मौर्या टीवी के पटना स्थित कार्यालय में जहां अब मात्र 30-35 स्टाफ ही रह गए है वहीं इसके राजनीतिक संपादक नवेन्दू के भी लंबी छुट्टी पर जाने की चर्चा है, जिनकी वापसी की उम्मीद ना के बराबर ही बतायी जा रही है। सूत्रों की माने तो मौर्या टीवी का पटना स्थित आलीशान दफ्तर भी पंद्रह करोड रुपये में बिकने का तैयार है जिसकी बिक्री के लिए मोल-भाव चल रहा है।

वरिष्‍ठ पत्रकार विनायक विजेता के एफबी वॉल से साभार.

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