बंद होने जा रहा है जागरण का बच्चा अखबार ‘आई-नेक्स्ट’!

13 शहरों से प्रकाशित हो रहे दैनिक जागरण के बच्चा अखबार पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। आईनेक्स्ट के मालिकान ने भी इस ओर इशारा करते हुए अपने इम्पलाई को या तो ऐसा टार्गेट दिया है जिसे वह अचीव ही ना कर पाये ताकि उसकी आड़ में इस्तीफा लिया जा सके या फिर इतना प्रेशर बनाया जा रहा है कि इम्पलाई इस अखबार को खुद ही छोड़ कर चले जाएं। सिर्फ पिछले एक महीने में ही एक दर्जन से ज्यादा लोग आई-नेक्स्ट को बाय-बाय कह चुके हैं। इसमें एडिटर से लेकर जूनियर रिपोर्टर तक शामिल हैं। कानपुर से अभिलाश श्रीवास्तव ने एक मेल भेज कर उन सभी पंद्रह लोगों के नाम सभी सेंटर हेड को भेजे हैं जिनको पिछले दिनों निकाला गया। मेल में इन लोगों से किसी भी तरह के कम्युनिकेशन पर पाबंदी लगा दी गयी है।

पिछले महीने यानी फरवरी की 23 तारीख से आठ मार्च (14 दिन) में 15 लोग इस्तीफा देकर जा चुके हैं। इस्तीफा देने वालों में इलाहाबाद से सीनियर सब एडीटर आलोक श्रीवास्तव, रिपोर्टर विनीत तिवारी, मेरठ से सचिन राठौर, लखनऊ से सब एडीटर कौशलेंद्र विक्रम मौर्य और सब एडीटर नीरज तिवारी, देहरादून से रिपोर्टर आफताब अजमत और जूनियर सब एडीटर संजीव कुमार गोरख पुर से फोटो ग्राफर सुधांशु कुमार और चीफ सब एडीटर सिद्धार्थ, कानपुर से जूनियर रिपोर्टर विपिन गुप्ता और एडीटर राजीव ओझा, आगरा से असिस्टेंट डिप्युटी न्यूज एडीटर मुकुण्द मिश्रा, बरेली से फोटोग्राफर हरदीप सिंह, सब एडीटर गुप्तेश्वर कुमार और रिपोर्टर अभिषेक सिंह शामिल हैं। मजे की बात यह है कि यह सभी अखबार के प्रमुख स्तंभ एडिटोरियल का हिस्सा हैं। मार्केटिंग और सर्कुलेशन से कितने लोगों ने आईनेक्स्ट को बाय बाय कह दिया इसकी कोई गिनती ही नहीं है। एक इम्पलाई ने तो यहंा तक कहा कि सभी सेंटर में ऐसा माहौल बन गया है कि हर इम्पलाई नौकरी की तलाश करने लगा है। किसी को नवभारत में संभावना समझ में आ रही है तो कोई आईनेक्स्ट की कार्यशैली के कारण इस पेशे को ही बाय बाय कहने को तैयार दिख रहा है।

इससे पहले भी 2013 में ही एक दर्जन से अधिक इम्पलाई आईनेक्स्ट को बाय बाय कह चुके हैं। इसमें पटना से फोटोग्राफर मनीष कुमार और गोरखपुर के डीएनई विकास शामिल हैं। आने वाला एक महीने में आईनेक्स्ट की हालत और भी पतली होने जा रही है। जिसमें गोरखपुर से तीन, देहरादून, लखनऊ, कानपुर इलाहाबाद, मेरठ बरेली और आगरा से कम से कम दो दो इम्प्लाई ने अप्रेल के पहले हफ्ते में ही सेलरी आने के बाद बाय बाय कह सकते हैं। दिखाने के लिए कुछ नये इम्पलाई भी रखे जा रहे हैं जो 6 महीने तक के ट्रायल पीरियड पर हैं जिन्हें संस्थान कभी भी बिना कारण बाय बाय कर सकता है।

आई-नेक्स्ट किसके लिए : आई-नेक्स्ट की डाउन होती रीडरशिप से परेशान एसोसिएट एडीटर शर्मिष्ठा शर्मा ने 6 साल बाद सभी सेंटर्स को मेल भेज कर यह बताने की भी कोशिश की है कि आईनेक्स्ट क्या है, किसके लिए है और क्यों है। साथ ही मेल में यह भी अंडरलाइन किया गया है कि जिसको नहीं समझ में आ रहा है वह आई-नेक्स्ट छोड़ कर जा सकता है। इसे प्रेशर बनाने का एक जरिया कहा जा रहा है। मेल में जो लिखा गया है हकीकत उससे कहीं अलग है। मेल में बताया गया है कि हमारा टीजी 18 से 35 साल के उम्र के लोगों के लिए है। अपर क्लास के लिए है और यूथ के लिए है। लेकिन अखबार में कई खबरें और फोटो ऐसी होती हैं जिनको फैमिली के सामने पेश ही नहीं किया जा सकता। 16 साल की एज में सेक्स को सहमति से मंजूरी की खबर को इलाहाबाद में जिस तरह से पब्लिश किया गया और जो फोटो यूज की गयी उससे काफी फैमिली ने इलाहाबाद में आईनेक्स्ट को घर में डालने से साफ मना कर दिया।

इक्रीमेंट पर भी संकट : इन खबरों के बीच मार्च में आईनेक्स्ट में होने वाले इंक्रीमेंट पर भी संकट के बादल छा गये हैं। सूत्रों की मानें तो इम्पलाईज के छोड़ने के इंतेजार में दो से तीन महीना डीले कर सकता है या फिर इंक्रीमेंट ही ना किया जाए।

शर्मिष्ठा शर्मा जाएंगी जेसीटीबी, आलोक और आशुतोष को जागरण की शरण! : सूत्रों की मानें तो जेपीएल के मालिकान ने आईनेक्स्ट के सीओओ आलोक सांवल से पैक अप करने के लिए साफ साफ कह दिया है। इसके पीछे दो कारण मानें जा रहे हैं एक तो मजीठिया वेज बोर्ड की संभावित सिफारिशों को लागू करना और दूसरा आईनेक्स्ट से अच्छा बिजनेस ना मिल पाना। 4 से 6 महीने के अंदर आईनेक्स्ट का शटर पूरी तरह से डाउन कर सीओओ आलोक सांवल और मार्केटिंग हेड आशुतोष अग्निहोत्री को जागरण में और शर्मिष्ठा शर्मा को जेसीटीबी की कमान सौंपी जाएगी। इसी लिये आईनेक्स्ट में इम्प्लाई पर प्रेशर डाल कर इस्तीफा लेने की तैयारी हो रही है। (कानाफूसी)

उपरोक्त गासिप भड़ास को एक मेल के जरिए प्राप्त हुई हैं. संभव है, तथ्यों में दाएं-बाएं हो, इसलिए आई-नेक्स्ट प्रबंधन से अनुरोध किया जाता है कि वे अपना पक्ष bhadas4media@gmail.com पर मेल कर दें या फिर नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के सहारे अपनी बात रख दें ताकि असल बात सबके सामने आ सके. कानाफूसी कैटगरी की खबरें सुनी-सुनाई बातों पर आधारित होती है, इसलिए इस पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की खुद के स्तर से जांच-पड़ताल कर लें.

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