बंसल न्‍यूज के हालात बिगड़े, कई अलविदा कहने के मूड में

 

सहारा, ईटीवी, जी२४ के कई नामचीन पत्रकारों को तोड़कर करीब डेढ़ साल पहले लोकल स्टाइल में शुरू हुआ मप्र-छग का बंसल न्यूज़ चैनल अब औंधे मुहं गिर रहा है. चैनल की ओपनिंग करने करने वाले सीईओ अचल मेहरा और न्यूज़ हेड तरुण गुप्ता बंसल न्यूज़ से पहले ही कन्नी काट चुके हैं. चैनल के मालिक सुनील बंसल ने बड़ी ही तरुणाई से तरुण की जगह शरद द्विवेदी को रखा. फिर शरद द्विवेदी अपनी दुकान ज़माने में अचल मेहरा को ही लील गए. 
 
जिस भरोसे से नामचीन चैनलों से पत्रकार यहा आये और हाड़तोड़ मेहनत कर लोकलछाप चलने वाले इस चैनल को बुलंदियों तक पहुँचाया उन पत्रकारों से ज्यादा बंसल ग्रुप के चेयरमेन न्यूज़ हेड शरद द्विवेदी पर भरोसा कर रहे हैं. अपने १८ साल के पत्रकारिता कैरियर का यशगान करने वाले शरद की औकात विधानसभा बीट देखने वाले दूसरे पत्रकार बेहतर ढंग से जानते हैं. अखबार की दुनिया में चापलूसी भरी खबरें छापने का इनका रिकॉर्ड रहा है. नेता मंत्री तक पकड़ बनाने के लिए ऐसे चापलूस की बंसल समूह भी तलाश कर रहा था, लेकिन मीडिया समूह की रीढ़ शुरुआती पत्रकारों की उपेक्षा इस चैनल को सिर के बल गिरने मजबूर कर रही है.
 
न्यूज़ हेड ने अपने साले को तो चिपकाया ही साथ में लोकलछाप दो दलालों को ज्वाइन कराया ताकि शो-रूम का रूप ले चुकी दुकान ठीक ढंग से चल सके. पिछले दो महीनों में करीब आधा सैकड़ा कर्मचारी न्यूज़ हेड के तौर तरीके और चापलूसी भरी ख़बरों का प्रजेन्टेशन देखकर अलविदा कह चुके हैं. इनपुट, आउटपुट और ब्यूरों कार्यालयों के जिम्मेदार पदों पर न्यूज़ हेड अपने लोगों से सौदेबाजी कर रहे हैं. वहीं सैलरी बढ़ने के आश्वासन के घूंट पीपी कर कई कर्मचारी उकता गए हैं. 
 
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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