बदल जाएगा लाइव इंडिया का नाम, पर सुधीर चौधरी का क्‍या होगा!

खबर है कि लाइव इंडिया के किस्‍मत का फैसला होना तय हो गया है. संभावना बन रही है कि अगले एक पखवारे में इस सौदे को अंतिम रूप दे दिया जाए. पर इसके साथ ही एक बात तय नहीं हो पा रही है कि चैनल के सीईओ सुधीर चौधरी का क्‍या होगा. पहले खबर थी कि सुधीर चौधरी चैनल से जुड़े रहेंगे पर ताजा अपडेट है कि नया प्रबंधन अब अपना मूड बदल चुका है. दूसरी तरफ चैनल के नाम को बदले जाने की भी तैयारी शुरू हो गई है. इसके लिए भी नया प्रबंधन जल्‍द ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में आवेदन करने वाला है.

आपको पहले ही बताया जा चुका है कि समाचार एजेंसी नेटवर्क वन (एनएनआईएस) इस चैनल को खरीदने जा रही है. बताया जा रहा है कि सीए लेबल पर सारी जांच पूरी हो चुकी हैं. इस लेबल पर जिन चीजों को फाइनल होना था वो भी तय हो चुका है. अब कंपनी लॉ लेबल पर बातचीत आखिरी दौर में है. पहले चर्चा थी कि अरुप घोष और शिरीन के नेतृत्‍व वाली एनएनआईएस लाइव इंडिया की रणनीतिक हिस्‍सेदारी खरीदेगी, पर अब खबर है कि इसे कंपलिटली खरीदने की तैयारी है. सौदा 60 से 65 करोड़ के बीच होने की संभावना है.

सूत्रों का कहना है कि डिस्‍ट्रीब्‍यूशन लेबल पर गड़बडि़यों एवं आने वाली परेशानियों को देखते हुए चैनल का नाम बदलने की योजना है. संभावना है कि चैनल का नाम दोनों वेंचरों का संयुक्‍त नाम होगा. नेटवर्क लाइव और नेटवर्क इंडिया नाम पर विचार किया जा रहा है. सूत्र बताते हैं कि ज्‍यादा संभावना है कि चैनल का नाम नेटवर्क लाइव के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को आवेदन दिया जाए. खबर ये भी आ रही है कि नया चैनल 24 घंटे लाइव होगा. इस पर बुलेटिन या प्रोग्राम रिपीट नहीं जाएंगे. यहां तक की रात में भी खबरें लाइव जाएंगी, जबकि अमूमन सभी 24×7 न्‍यूज चैनलों में रात की बुलेटिन रिपिटेड जाती हैं.

अब आते हैं सुधीर चौधरी पर. खबर है कि सुधीर चौधरी को लेकर संशय बरकरार है. सुधीर चैनल के बिक जाने के बाद रहेंगे या जाएंगे? हालांकि सूत्रों का कहना है कि चैनल खरीदने वाले एनएनआईएस में अरुप घोष, शिरीन, उदय चंद्र सिंह जैसे लोग सुधीर के सहयोगी रह चुके हैं, लिहाजा उनके हर एक सही और गलत तथ्‍यों से परिचित हैं. इसलिए खबर है कि ये लोग उन्‍हें नए चैनल में कांटीन्‍यू नहीं करना चाहते हैं. सूत्रों का कहना है कि ऐसी संभावनाएं देख सुधीर चौधरी अपने पुराने संबंधों को भुनाने की कोशिश में लगे हुए हैं. अब उनकी कोशिश कितना रंग लाएगी ये तो चैनल का फाइनल सेटलमेंट होने के बाद ही पता चलेगा, पर उनके भविष्‍य को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. 

सूत्रों का कहना है कि जिस तरह की अफवाह है कि नया मैनेजमेंट आने के बाद बंपर छंटनी होगी, वैसा कुछ नहीं होने वाला है. नीचे लेबल पर छंटनी किए जाने की कोई योजना नहीं है. हां उच्‍च स्‍तर पर उन लोगों को हटाए जाने का अंदेशा है, जो बड़ी सेलरी लेकर काम की बजाय पुराने मैनेजमेंट के खास बनने में लगे रहे हैं. चूंकि एनएनआईएस से जुड़े कई लोग इस चैनल में काम भी कर चुके हैं, लिहाजा उन्‍हें इसकी पूरी जानकारी है. बताया जा रहा है कि कुछ ऐसे लोगों की लिस्‍ट भी तैयार कर ली गई है. दूसरी तरफ चैनल के नाम बदले जाने के बारे में कहा जा रहा है कि नया मैनेजमेंट डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में परेशानी को संभावनाओं को देखते हुए यह कदम उठाने जा रहा है. 

उल्‍लेखनीय है कि अधिकारी ब्रदर्स का यह चैनल उनके हाथों से होता हुआ एचडीआईएल के स्‍वामित्‍व में आ गया था. चैनल ठीक-ठाक भी चल रहा था तथा इसकी टीआरपी भी टॉप टेन में थी, पर पिछले कुछ महीनों में चैनल के भीतर की स्थितियां अचानक बदल गईं. एचडीआईएल प्रबंधन ने इसमें पैसा लगाना बंद कर दिया था, जिसके बाद पत्रकारों को सेलरी मिलना भी मुश्किल हो गया था, जिसके बाद इस चैनल के बंद होने तथा बिकने की खबरें आने लगी थीं. अब यह तय माना जा रहा है कि चैनल अगले कुछ दिनों में फाइनली बिक जाएगा.

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