बनारस की डा. उषा गुप्ता से बचिए, ये शैतान हैं

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन जर्नलिस्ट कार्यक्रम में एक हृदय विदारक घटना देख कर दहल गया. एक बारगी विश्वास ही नहीं हुआ कि जो मैं देख रहा हूँ वो सच्चाई है या किसी हिंदी मूवी का अंश. जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं, और ग्यारह दिनों के बाद प्रसूता और उसके पति को यह कह कर टरका दिया जाता है कि बच्चा मर गया. घटना भी चूंकि अपने ही शहर बनारस की थी, इसलिए उत्सुकता और भी बढ़ गयी थी. एक लब्धप्रतिष्ठ नामचीन डाक्टर अपने पेशे की शपथ को आखिर कैसे इस तरह कलंकित कर सकती है. कार्यक्रम ज्यों ज्यों आगे बढ़ता गया, बतौर दर्शक मेरा खून भी खौलता चला गया. पैसे और संबंधों की खातिर 'धरती के भगवान'  का दर्जा प्राप्त कोई ऐसा घृणास्पद कुकृत्य कर सकता है, जिसने भी यह प्रोग्राम देखा होगा उसे विश्वास नहीं हुआ होगा मगर यह एक सच्चा दर्दनाक अफसाना है.

ये दिल दहला देने वाला वाकया 1993 में हुआ था. मगर अफ़सोस…! न्याय की खातिर पीड़ित माता-पिता 19 वर्ष बीत जाने के बाद आज भी दर-दर भटक रहे हैं और भ्रष्टाचार का नंगा खेल खेला जा रहा है, जिसमे पुलिस और न्यायालय दोनों को आरोपी डाक्टर ने मिला कर खुद को बचाए रखा है पर सवाल यह कि आखिर कब तक……..? दो बच्चियों के पिता बिजय नारायण खेतान ने जब पत्नी पूनम के तीसरी बार गर्भवती होने पर सोनोग्राफी कराई तो यह देख कर दोनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा कि पेट में जुड़वा बच्चे पल रहे हैं, एक लड़का और एक लड़की. सब कुछ नार्मल था. देश के जाने माने खेतान ग्रुप परिवार के सदस्य और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बिजय नारायण ने पत्नी के प्रसव के लिए बिरदोपुर, महमूरगंज स्थित एक अत्यंत अनुभवी और नामी डाक्टर उषा गुप्ता के नर्सिंग होम का चयन किया. यहीं उनसे भयंकर चूक हो गयी. उन्हें नहीं पता था कि जिसे वो भगवान समझ कर अपनी पत्नी सौंप रहे हैं, असल में वो शैतान है और उसने पहले से ही एक भयानक साजिश रच रखी थी.

२८ सितम्बर १९९३ को पूनम दो स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं…लड़के का वजन तीन किलो था और लडकी का पौने तीन किलो. बस, अब यहाँ से शुरू होता है खेल. बच्ची को बेहोश माँ के साथ रूम में भेज दिया गया पर लड़के के लिए बताया गया कि उसको पीलिया हो गया है, इसलिए उसे आईसीयू  में रखा गया है. यह सामान्य बात थी, किसी ने उतना ध्यान भी नहीं दिया. पति खेतान, उनकी सास के अलावा अन्य परिजनों ने इन्क्युबेटर में लगी रोशनी में नहाये स्वस्थ खूबसूरत बच्चे को देख कर राहत की सांस ली. चूंकि प्रसव आपरेशन से हुआ था (या नार्मल की जगह जानबूझ कर आपरेशन किया गया  )  इसलिए पूनम को ११ दिन तक भर्ती रखा. जब उनकी विदाई का समय आया और उन्होंने बच्चे की मांग की तब यह सुन कर बम विस्फोट सा हुआ कि बच्चा तो मर चुका है….आखिर कब मरा…कैसे मरा, क्या हो गया था अचानक, १० दिनों तक जिस बच्चे को खिलखिलाता, हाथ-पाँव मारता सभी देख रहे थे, वह अचानक मर कैसे गया और अस्पताल स्टाफ ने पूर्व में इसकी चर्चा तक क्यों नहीं की थी ? फिर मरा तो उसकी लाश का क्या हुआ…? क्या बीती होगी परिजनों पर, इसको सहज ही समझा जा सकता है. पूनम की माँ रही हों या स्वयं खेतान,  सभी के पैरों तले ज़मीन खिसक चुकी थी. जिस औलाद की खातिर यह सब किया वो सब व्यर्थ हो गया…….!  कोढ़ में खाज तो यह कि प्रसव के दौरान ही बच्चेदानी भी डाक्टरों ने बंद कर दी थी. अब आगे गर्भ ठहरने का सवाल ही नहीं था.

इसके बाद शुरू हुआ लेन-देन, घूसखोरी का नंगा नाच और उसमे पिसता चला गया खेतान परिवार. हैरत तो यह देख कर होती है कि पैसे के बल पर सच को किस कदर झूठ में बदल दिया गया. पीड़ित चीख रहे हैं, पर कौन सुनता है नक्कारखाने में तूती की आवाज़. यह नाचीज खेतान परिवार से १८ जून को खुद जा कर मिला और पीड़ित पिता ने छलछलाती आखों से बीते वर्षों में डाक्टर, पुलिस और कोर्ट के साथ ही मीडिया के  धतकरम के बारे में बताया. यह सब देख-सुन कर लगा कि वाकई किस कदर समाज का अधोपतन हो चुका है. पैसे से आप देश में कुछ भी खरीद सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं. इन्क्वायरी पर इन्क्वायरी, तारीख पर तारीख ..पिता लखनऊ, दिल्ली करता रहा. हिमाकत देखिये कि खेतान के वकीलों तक को खरीद लिया गया. दस्तावेज झूठ नहीं बोल सकते और वे चीख-चीख कर यही बता रहे हैं कि बच्चा जिंदा है और डाक्टर के ही किसी नजदीकी के यहां पल रहा है.  पिछले दिनों आमिर खान के स्टार प्लस और दूरदर्शन पर संयुक्त रूप से शुरू हुए साप्ताहिक शो सत्यमेव जयते के एक एपिसोड  में भ्रूण हत्या पर  मार्मिक कार्यक्रम दिखाया गया था. अफ़सोस..!  ६० सदस्यीय आमिर की प्रोडक्शन हाउस के पत्रकारों की टीम खेतान जी तक  नहीं पहुँच सकी, अन्यथा मेरा दावा है कि देश में इस घटना को देख कर तूफ़ान खड़ा हो गया होता और डाक्टर को तो मुह छिपाने की भी जगह नहीं मिलती.

खेतान की हालात जो है सो है, पर पूनम जी की तो मानो दुनिया ही लुट चुकी है. पहले ब्रेन ट्युमर हुआ, २००२ में इसका एम्स में आपरेशन हुआ और बाद में दिल पे लगी चोट ने नौबत बाई पास की ला दी थी. जी रही हैं तो इसलिए कि उनके दिल में एक स्टेन्ट लगा दिया गया है जो धडकनों को नियंत्रित रखता है. एक माँ पर क्या बीत रही होगी ये कोई माँ ही समझ सकती है. पर पता नहीं कि वो डाक्टर भी माँ है या नहीं. मुझे नहीं मालूम कि यह कहानी कहाँ तक पंहुचेगी, कितने हाथों में पड़ेगी……पर यदि पीड़ित माता-पिता की आर्त पुकार आपके दिल के किसी कोने में सुनाई पड़ रही हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें हीं, इस कलंकित घटना की सीबीआई जांच की प्रदेश और केंद्र सरकार से अपील भी करें.

लेखक पदमपति शर्मा देश के जाने-माने खेल पत्रकार हैं. कई न्यूज चैनलों और अखबारों में संपादक रह चुके हैं. इन दिनों बनारस में रहकर बनारसीपन को जी रहे हैं. उनसे संपर्क padampati.sharma@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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