बनारस पत्रकारपुरम में डा. जोशी के कार्यक्रम के पहले ही पत्रकारों में रार

गिलट बाजार स्थित पत्रकारपुरम के प्लॉट आवंटी तथा वहां रहने वाले पत्रकार इस बात को लेकर हैरान हैं कि रविवार 24 मार्च को भाजपा सांसद एवं लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के हाथों वाराणसी पत्रकारपुरम आवासीय योजना का लोकार्पण होने जा रहा है। दरअसल इन पत्रकारों को खबर ही नहीं और सारा कार्यक्रम काशी पत्रकार संघ और उत्तर प्रदेश जर्ननिस्ट एसोसिएशन (उपजा) के अलावा एक स्वंभू मार्गदर्शक द्वारा बना लिया गया। 23 मार्च की शाम जब इस कार्यक्रम को लेकर एक बैठक पत्रकारपुरम में होने लगी तो उसमें शामिल पत्रकारपुरम विकास समिति के लोगों में हंगामे की स्थिति रही।

हुआ यूं कि पिछले कई दिनों से उक्त लोकार्पण कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र शहर में बांटा जा रहा था लेकिन इसकी जानकारी पत्रकारपुरम के प्लॉट आवंटियों और वहां रहने वाले अन्य पत्रकारों को नहीं दी गई। इस निमंत्रण पत्र (कार्ड) पर लिखा हुआ है कि वाराणसी पत्रकारपुरम आवासीय योजना का लोकार्पण लोक लेखा समिति के अध्यक्ष व लोकसभा के सदस्य माननीय डॉ. मुरली मनोहर जोशी रविवार दिनांक 24 मार्च 2013 को अपराह्न चार बजे करेंगे। कार्ड पर नीचे की ओर कृष्ण देव नारायण राय, अध्यक्ष काशी पत्रकार संघ, योगेश कुमार गुप्त, संयोजक पत्रकारपुरम समिति, विनोद कुमार बागी, अध्यक्ष, उपजा वाराणसी तथा राजेंद्र रंगप्पा, महामंत्री काशी पत्रकार संघ लिखा हुआ है। इस निमंत्रण के बारे में पत्रकारपुरम के लोगों कों उड़ती-उड़ती खबर दो-तीन पूर्व जरूर मिली थी लेकिन यह कन्फर्म नहीं थी।

मगर शनिवार 23 मार्च को जब इस कार्यक्रम के आयोजन के सिलसिले में पत्रकारपुरम में बैठक होने लगी तो वहां के प्लॉट आवंटियों में हैरानी फैल गई। कई लोग तो उस पुरानी कहावत को उद्धृत करने लगे कि ‘भीलों ने बांट लिया वन और राजा को खबर तक नहीं। उनका कहना था कि पत्रकारपुरम के संरक्षण और विकास के लिए बनी वाराणसी पत्रकारपुरम विकास समिति को कार्यक्रम के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं दी गई जबकि सारा खेल उसी के नाम पर हो रहा है। यहां यह बताना जरूरी है कि वाराणसी पत्रकारपुरम विकास समिति एक रजिस्टर्ड संस्था है और सीधे-सीधे पत्रकारपुरम से जुड़ी हुई है। क्लाउन टाइम्स ने जब इस आयोजन के बारे में पड़ताल की तो मामला चौंकानें वाला नजर आया। एक तीर से दो निशाने साधने में माहिर उपजा के श्री बागी ने कई निशानें एक साथ साधने की योजना के तहत अपने तरकश से तीर चलाये, ये बात अलग है कि निशाना चूक गया।

इसी का नतीजा रहा कि आवंटी पत्रकारों और विकास समिति के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम सें एक दिन पहले ही पत्रकारपुरम में वरिष्ठ पत्रकार व कांग्रेस नेता धर्मेंद्र सिंह के आवास पर आपात बैठक बुला ली। इस बैठक में लोकार्पण कार्यक्रम पर जमकर चर्चा हुई। दूसरी ओर पत्रकारपुरम में मौजूद तथाकथित पत्रकारपुरम समिति के संयोजक योगेश कुमार गुप्त, कृष्णदेव नारायण राय, राजेंद्र रंगप्पा पत्रकारपुरम के मुख्य द्वार पर लोकार्पण कार्यक्रम के लिए शिलापट्ट का निर्माण कराने में जुटे थे। इधर धर्मेंद्र सिंह के आवास पर वास्तविक पत्रकारपुरम विकास समिति की बैठक में उपजा के स्थानीय अध्यक्ष विनोद बागी, समिति के संयोजक व महामंत्री राकेश चतुर्वेदी, अध्यक्ष चेंतन स्वरूप, सुरेश प्रताप, कमलेश चतुर्वेदी, अमरनाथ श्रीवास्तव, संजय प्रसाद सिंह, अशोक कुमार मिश्र सहित दर्जनों पत्रकारों ने लोकार्पण समारोह के आयोजकों खासकर पूर्व में काशी पत्रकार संघ द्वारा कराये गये विकास कार्य के नाम पर सड़क व सीवर निर्माण में लूट-खसोट के बारे में विस्तार से चर्चा की।

उपजा के स्थानीय अध्यक्ष श्री बागी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि अगर हमारे कार्यक्रम का विरोध हुआ तो मैं चुप बैठने वाला नहीं हूं। मुझे पता है कि सीवर निर्माण के लिए लाखों रुपये मिले लेकिन तत्कालीन ठेकेदार ने इतना घटिया काम किया कि आज भी सीवर जाम है। कमीशन के चक्कर में संघ के तत्कालीन पदाधिकारियों ने उसी ठेकेदार को सड़क निर्माण का ठेका दिलाकर जो कमीशन खाया वो सभी लोग जानते हैं। यह विदित है कि डॉ. मुरली मनोहर जोशी 30 लाख रुपये, भाजपा के अशोक धवन 10 लाख और चेतनारायण सिंह 10 लाख रुपये इन कार्यों के लिए दे चुके हैं। चूंकि ये सभी जनप्रतिनिधि भाजपा के हैं इसलिए पत्रकारपुरम कालोनी का लोकार्पण डॉ. जोशी करेंगे। श्री बागी का तर्क उनके हिसाब से जायज भी है क्योंकि वो पत्रकार कम और भाजपाई ज्यादा हैं। अगर वो पार्टी के लिए सोंचते हैं तो इसमें क्या गुनाह है। उन्हें पता है कि पत्रकारपुरम के नाम पर जनप्रतिनिधियों से मिले लाखों रुपये में से भारी रकम किस पदाधिकारी ने हजम की। इसी का परिणाम रहा कि वाराणसी पत्रकारपुरम विकास समिति का गठन हुआ।

इतना ही नहीं उपजा के अध्यक्ष श्री बागी ने इस समिति को पूरा समर्थन दिया। 26 जनवरी को वाराणसी शहर उत्तरी कि विधायक रवींद्र जायसवाल ने इसी समिति को पत्रकारपुरम के विद्युतीकरण के लिए अपनी निधि से 5 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। इसके चलते पत्रकार संघ के पदाधिकारियों को लगा कि पत्रकारपुरम के नाम पर अब दुकानदारी बंद होने वाली है। सो बेरोजगार राजेंद्र रंगप्पा और शारीरिक रूप से कमजोर बेचारे कृष्णदेव नारायण राय ने उपजा के श्री बागी से संपर्क साधा और डॉ. जोशी के हाथों लोकार्पण कार्यक्रम को तय कराने में कामयाब रहे। मजेदार बात यह है कि राजेंद्र रंगप्पा पत्रकारपुरम में प्लॉट आवंटी नहीं हैं वहीं दूसरी ओर भ्रम बना रहे इसके लिए निमंत्रण कार्ड पर वाराणसी पत्रकारपुरम विकास समिति से मिलता-जुलता नाम पत्रकारपुरम समिति कार्ड पर छापकर इसका वितरण करा दिया गया। कार्ड पर स्वयंभू संयोजक योगेश कुमार गुप्त का नाम छपवाकर वितरण करा दिया गया। कार्यक्रम में व्यवधान न उत्पन्न हो इसके लिए पत्रकारपुरम विकास समिति के संयोजक श्री राकेश चतुर्वेदी ने पत्रकार संघ के अध्यक्ष कृष्णदेव नारायण को फोन लगाया और वार्ता के लिए बुलाया लेकिन वो इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसी बीच डॉ. जोशी के मीडिया प्रभारी नवरतन राठी को वास्तविकता से अवगत कराया तो पता चला कि वो इस मामले से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने भी इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि उन्हें विश्वास में लिए बिना लोकार्पण कार्यक्रम तय कैसे हुआ।

पत्रकारों में इस बात पर जोरदार बहस हुई कि विवादित पत्रकार संघ के वर्तमान पदाधिकारी अवैधानिक चुनाव के चलते आज भी वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत तिवारी की आपत्ति के चलते अब तक सोसायटी रजिस्ट्रार के यहां पंजीकरण के लिए चक्कर लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पत्रकार संघ के पदाधिकारी इस जुगत में लगे हुए हैं कि लोगों के बीच पहचान बनी रहे और दुकानदारी भी चलती रहे। फिलहाल डॉ. जोशी के पीए श्री राजीव व भाजपा के महानगर संयोजक तुलसी सुब्रह्मण्यम जोशी को समिति द्वारा तथ्य से अवगत कराये जाने पर अब वे ये नहीं समझ पा रहे हैं कि अब करें तो क्या करें। उनको यह बात चिंता में डाल रही है कि भाजपा के इतने कद्दावर नेता को कैसे बतायेंगे कि उनसे चूक हो गई और पत्रकारों के असली-नकली के खेल में शतरंज का मोहरा बना दिया गया। न्याय का तराजू न तो बायें झुकता है और न ही दायें। भारत की सर्वोच्च संस्था लोकसभा के वरिष्ठ सदस्य डॉ. जोशी इस शह और मात के खेल में शरीक न होकर निर्णायक बनें यही कामना है। वैसे यहां इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि पत्रकारों को आवासीय सुविधा मुहैया कराने के लिए धर्मेंद्र सिंह, विकास पाठक, राघवेंद्र चड्ढा, विनोद बागी आदि ने अथक परिश्रम किया था। उन्हें भुला देना शायद इतिहास के साथ नाइंसाफी होगी। वहीं दूसरी ओर योगेश गुप्त, कैलाश यादव, अखिलेश मिश्र तथा अन्य सहयोगियों को भी भुलाया नहीं जा सकता। तफ्तीश जारी है। इससे संबंधित खबरें हमें मेल करें। खबर है कि पत्रकारों का एक प्रतिनिधि मंडल इस मामले को लेकर डा. मुरली मनोहर जोशी से मिला।

क्‍लाउन टाइम्‍स से साभार.

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