बनारस में भारत रत्न स्व. बिस्मिल्ला खां के नाम पर लगे शिलापट्ट से जूते लटक रहे

: कला-संस्कृति के शोर में हम याद न तुमको कर सके! : खुद के शहर में विस्मृत होती जा रही स्मृतियां : बनारस। इन दिनों शहर में कला-संस्कृति के पहरूए साहित्य, कला को बचाने के लिए झंडा उठाये फिर रहे हैं. आयोजनों की बहार है. बनारस महोत्सव चल ही रहा है, गंगा महोत्सव की तैयारी है. खबर आ रही है कि कैलाश खेर महोत्सव में चार चांद लगाने आ रहे हैं. इधर दुनिया के पैमाने पर भारतीय कला और संस्कृति को ले जाने वाले कलाकारों के स्मृतियों पर ग्रहण लगता जा रहा है. भारत रत्न स्व. बिस्मिल्ला खां साहब के नाम पर लगे शिलापट्ट के सहारे जूते लटके नजर आ रहे हैं.

विश्वकवि रवि बाबू द्वारा नृत्य साम्राज्ञी की उपाधि से सम्मानित सितारा देवी के नाम पर उनके मोहल्ले में लगा शिलापट्ट सड़कों पर गिरा पड़ा धूल फांक रहा है. संगीत नायक के नाम से मशहूर पं छोटे राम दास मिश्र जी के घर पर तो पहले से ही विवाद के चलते प्रशासन का ताला चढ़ा हुआ है. बाकी बचे उनकी निशानी के नाम पर लगे शिलापट्ट पर कूड़ा फेंका जा रहा है.

ये उस शहर के कलाकारों से जुड़ी स्मृतियों की कहानी है जिस शहर को कला और संस्कृति की राजधानी कहा जाता है. कला-संस्कृति की राजधानी में कला-संस्कृति के नाम पर भले ही हम ढोल पीट कर उत्सव-महोत्सव मनाकर कर खुश हों लें, पर हकीकत ढोल के अन्दर पोल की तरह है. साल के 365 दिन कला और संस्कृति के नाम पर कुछ न कुछ आयोजन होने वाले इस शहर में कला-संस्कृति से जुड़ी नामचीन हस्तियों के नाम पर लगाए गये शिलापट्ट धूल-धूसरित हो रहे हैं. शहर भर के कलाकारों, कलाप्रेमी और संगीत-कला के नाम पर अपनी दुकान चलाने वालों को कहीं कुछ भी नजर नहीं आता.

शहनाई वादक भारत रत्न बिस्मिल्ला खां, विश्वकवि रवीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा नृत्य साम्राज्ञी की उपाधि से अंलकृत कथक नृत्यांगना सितारा देवी और संगीत के नायक पं. छोटे राम दास मिश्र के नाम पर लगाए गए शिलापट्टों का हाल कुछ ऐसा ही है. कभी इनको सम्मान देने के लिए इनके नाम पर लगाए गये शिलापट्ट अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं.

कबीरचौरा की गली में सितारा देवी के नाम का शिलापट्ट चित पड़ा है, तो पूर्व नगर प्रमुख सरोज सिंह द्वारा पिपलानी कटरा मार्ग पर स्थित काशी के राजवैद्य पं. शिवकुमार शास्त्री के संगीत के गुरू रहे संगीत नायक छोटे राम दास जी के घर के गली के मोड़ पर लगाया संगीत नायक छोटे राम दास जी वीथिका के शिलापट्ट पर कूड़ा फेंका जा रहा है और भारत रत्न का क्या कहना. भारत रत्न बिस्मिल्ला खां के नाम पर बेनियाबाग मोड़ पर लगाए गये शिलापट्ट के सहारे तो बाकायदे जूते टांग कर बेचा जा रहा है.

अपने कला के बूते अंतराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति पाए कलाकारों का ऐसा विरला सम्मान शायद कही और नहीं होता होगा. वास्तविकता से आंखे मूंद कर शहर की कला-संस्कृति के नाम पर गाल बजाने वालो के मुंह पर ये करारा तमाचा है. रही बात शासन के संस्कृति विभाग और प्रशासन की, तो एक का ध्यान कला के उपासकों से ज्यादा कार्यक्रमों के बजट पर है और दूसरे की नजर में पारम्परिक कला और संस्कृति की समझ कला और संस्कृति के नाम पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों में चेहरे पर जबरन हंसी और बोझिल मन लिए आगे की पंक्तियों में बैठकर वक्त गुजारने और बालीवुड के नामचीन कलाकारों के आगमन पर उनके साथ मय परिवार  फोटो खिचवाने से ज्यादा कुछ और नहीं है.

ऐसे में दिखावे के इन आयोजनों में शिरकत कर रहे कला-संस्कृति के इन तथाकथित वाहकों के पास इतनी फुरसत कहा कि वो उधर भी नजर फेरें जिधर कला और संस्कृति की स्मृतियां सिसक रही हैं.

बनारस से भास्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट. संपर्क: 09415354828

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