Sanjaya Kumar Singh : बसपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क लोकसभा में 'वंदे मातरम्' की धुन बजने के दौरान सदन से बाहर जाते देखे गए। मामला तूल पकड़ने के बाद बर्क ने तर्क दिया कि 'वंदे मातरम्' इस्लाम के खिलाफ है, इसलिए वह लोकसभा छोड़कर चले गए थे। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि यह हमारे धर्म के खिलाफ है, इसलिए अगर भविष्य में भी ऐसी स्थिति आई तो मैं वही करूंगा, जो आज किया है।
वंदेमातरम की धुन बजने के दौरान बाहर चले जाना संसद और सांसदों का भी अपमान है। सामान्य शिष्टाचार के भी खिलाफ है। इस मामले में संसद की अवमानना की कार्रवाई की जानी चाहिए और अगर यह नहीं होता है तो यही सुनिश्चित कर दिया जाए कि आगे संसद में वंदे मातरम की धुन नहीं बजेगी। कम से कम गीत का तो अपमान नहीं होगा। पर मेरे ख्याल से यह भी नहीं होगा।
जहां तक वंदे मातरम नहीं गाने का सवाल है तो गाने के लिए कह कौन रहा था। बर्क साब को तो बाकी सभी सांसदों की तरह खड़े रहना था। सुनने से क्या होता है। पर उन्हें इससे भी परहेज है। वैसे भी, अल्ला मियां ने आंखें बंद करने का प्रावधान तो किया है, कान बंद करने का कोई प्रावधान नहीं है। कान इच्छानुसार नहीं बंद किए जा सकते है। इसीलिए गालियां सुननी पड़ती है पर आप गंदी चीजें न देखना चाहें तो आंखें बंद कर सकते हैं। ऐसे में बर्क साब ने जो किया वह तो गलत है ही बाद में उसे सही ठहराने की कोशिश और गलत है। पर हमारी वोट बटोरू राजनीतिक व्यवस्था जो न कराए। हिन्दुओं के वोट उन्हें चाहिए नहीं, मुसलमान इसीलिए उन्हें वोट देंगे।
वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.





