बसपा की कलंक कथा में एक और नाम दर्ज, विधायक रामसेवक पर लगे गंभीर आरोप

: लोकायुक्त से शिकायत : बदायूं। बसपा विधायकों पर आरोप लगना नई बात नहीं है। विधायकों पर मुकदमे लिखे जाने और विभिन्न गंभीर आरोपों के चलते मंत्रियों के बर्खास्त होने का रिकॉर्ड बन चुका है। बसपा विधायकों के भ्रष्टाचार खुलने के क्रम में विनाबर विधान सभा क्षेत्र के निवर्तमान विधायक रामसेवक सिंह पटेल भी आ गये हैं। आपराधिक प्रवृत्ति के साथ अन्य तमाम गंभीर आरोप लगाते हुए सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव नगला शर्की निवासी योगेन्द्र सिंह ने लोकायुक्त से विधिवत शिकायत की है।

आरोप नंबर एक : ग्राम शिकरापुर स्थित चरागाह की जमीन का पत्नी भाग्य श्री के नाम ऊंची राजनीतिक पहुंच का दुरुपयोग करते हुए बैनामा करा लिया।

आरोप नंबर दो : नगला शर्की स्थिति गाटा संख्या-493 में तालाब था, जिस पर उन्होंने अवैध कब्जा कर रखा है। मौके पर खेती हो रही है, पर प्रशासन दबाव के चलते न मानने को तैयार है और न ही कार्रवाई कर रहा है।

आरोप नंबर तीन : आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर ली है, जिसके प्रमाण भी हैं। उन्होंने पत्नी के नाम लाखों रुपये की जमीन खरीदी है, लेकिन सरकार को धोखा देने की नीयत से बैनामे में पति के स्थान पर पिता का उल्लेख किया गया है।

आरोप नंबर चार : इनका लंबा आपराधिक इतिहास है, जिसमें नबाव नौबत राय मंदिर से मूर्ति चोरी करने के भी आरोपी रहे हैं एवं एनएसए तक की कार्रवाई की जा चुकी है। थाना सिविल लाइंस व सदर कोतवाली में ही कुल 22 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

आरोप नंबर पांच : निर्माणाधीन मकान कब्रिस्तान की भूमि को कब्जा कर बनाया गया है, जिसके प्रमाण तहसील कार्यालय में मौजूद रिकॉर्ड में दर्ज हैं, लेकिन दबाव के चलते प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है।

आरोप नंबर छह : वर्ष 1989 में हुई हृदय विदारक घटना में लिखे गये अज्ञात मुकदमे में पुलिस जांच के बाद एक समुदाय विशेष के सैकड़ों लोगों को मारने के आरोप का खुलासा पुलिस जांच में हुआ था, लेकिन भाजपा शासन में नियम विरुद्ध मुकदमा वापस ले लिया गया।

आरोप नंबर सात : पचास से अधिक सतियों के मठों को तोड़ कर प्राचीन सूर्यकुंड की भूमि को कब्जा लिया है, इतना ही नहीं, जालसाजी कर एक बाबा राम गिरि के नाम बैनामा करा लिया, जिनकी शिकायतकर्ता ने हत्या की आशंका व्यक्त की है, साथ ही राजनीतिक पहुंच के चलते बाबा राम गिरि का एक फर्जी शिष्य सोन गिरि बना कर, उसके नाम जमीन सुपुर्दगी में ले ली, जिस पर इनका ही कब्जा है, साथ ही पांच लाख रुपये का ऋण भी ले लिया।

एम. देवराज के कार्यकाल में हुई कार्रवाई : सूर्यकुंड की जमीन पर कब्जा करने के प्रकरण में एम. देवराज के कार्यकाल में कार्रवाई हुई थी। शिकायत पर उन्होंने बैनामा निरस्त करा दिया था, लेकिन बसपा सरकार का दुरुपयोग करते हुए उनका बाद में तबादला करा दिया गया।

निराधार हैं समस्त आरोप – रामसेवक : उक्त आरोपों के संबंध में रामसेवक सिंह पटेल का कहना है कि समस्त आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 की घटना का मुकदमा कोर्ट के आदेश पर वापस हुआ है। शिकरापुर की चरागाह की और नगला शर्की के तालाब से उनका कोई मतलब नहीं है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप भी निराधार है। उनके विरुद्ध राजनीतिक द्वेष भावना से मुकदमे तो लिखे गये, पर कोर्ट ने सभी में बरी कर दिया है। कब्रिस्तान की जमीन से भी उनका कोई लेना-देना नहीं है और जमीन खरीद कर मकान बनाया जा रहा है, साथ ही सूर्यकुंड की जमीन से भी उनका कोई मतलब नहीं है।

बदायूं से स्‍वतंत्र पत्रकार बीपी गौतम की रिपोर्ट.

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