बसपा के बाद अब सपा के लिए भी मीडिया मैनेज करेंगे नवनीत सहगल

अगर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यही निर्णय करना था तो यह निर्णय कुछ महीने पहले हो जाता तो बेहतर रहता। पूरी नौकरशाही में नवनीत सहगल के प्रमुख सचिव सूचना बनाए जाने के बाद यह चर्चा आम हो गयी कि अखिलेश के नवरत्नों में कोई भी अफसर ऐसा नहीं है जो मीडिया को मैनेज कर सके। तब जब चुनाव सिर पर है तो मीडिया को मैनेज करने के लिए प्रमुख सचिव नवनीत सहगल को लगाया गया जो बसपा सरकार में भी यही काम करते थे। आदेश होते ही नवनीत सहगल ने अपने संर्पकों को खंगालना भी शुरू कर दिया।

सरकार बनने से पहले तक अखिलेश यादव मीडिया के बेहद करीबी थे। पत्रकारों से उनके सीधे रिश्ते थे। मीडिया भी उनको बहुत पसंद करती थी। मगर सरकार बनने के बाद धीरे-धीरे मीडिया की सरकार से दूरी बढऩा शुरू हो गयी। मीडिया में कई ऐसी तीखी खबरें आने लगीं जो सपा को बेहद नागवार गुजरीं। सरकार के पास कोई भी ऐसा अफसर नहीं था, जो इन दूरियों को कम करने का काम करता।

लिहाजा मीडिया मैनेजमेंट पूरी तरह चौपट होता चला गया। डेढ़ साल के बाद सरकार को लगा कि यह स्थितियां ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं। तब आशीष यादव को मुख्यमंत्री ने अपना ओएसडी बनाया और उन्होंने अपने स्तर से मीडिया को मैनेज करने की कोशिशें भी शुरू कीं। मगर सैफई महोत्सव की कवरेज के बाद मुख्यमंत्री और मीडिया के झगड़े जब ज्यादा बढ़ गये तब मैनेजमेंट में माहिर एक अफसर की तलाश शुरू हुई, जो नवनीत सहगल पर जा कर खत्म हुई।

अब इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि पिछली सरकार में सपा के बड़े से बड़े नेता खुलेआम कहते थे कि नोट गिनने की मशीन सिर्फ दो जगह है एक मुख्यमंत्री निवास में दूसरा नवनीत सहगल के घर में। यह सभी नेता सत्ता में आने पर सहगल को जेल भेजने की बात कहते थे। सरकार बनने के बाद सहगल ने इस सरकार के करीब आने की जब-जब कोशिश की तब-तब कह दिया गया कि यह तो माया के सबसे खास अफसर हैं, लिहाजा इनकी तैनाती नहीं हो सकती। अब जब चुनाव सिर पर है तो उन्हें सूचना का प्रमुख सचिव बना दिया गया। यह बेहद महत्वपूर्ण पद है। प्रमुख सचिव सूचना रोज मुख्यमंत्री के संपर्क में रहते हैं।

यही नहीं बसपा सरकार में नवनीत सहगल अफसर से ज्यादा राजनेता की भूमिका में रहते थे। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे अखिलेश दास सहगल के सबसे करीबी लोगों में थे। सभी जानते हैं कि अखिलेश दास को बसपा तक लाने का रास्ता नवनीत सहगल ने ही दिखाया। गोण्डा के एक विधायक को भी सहगल के मैनेजमेंट के चलते बसपा में जगह मिली। यही नहीं देशभर के उद्योगपतियों का मैनेजमेंट भी नवनीत सहगल ही देखते थे। चार्टेड एकांउटेन्ट रह चुके नवनीत सहगल से सरकार अपना आर्थिक मैनेजमेंट भी सुधारने की उम्मीद रख रही है। कुछ लोग उन्हें प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास जैसे पद पर लाने की बात अभी से करने लगे हैं। जाहिर है ऐसे हुनरमंद आईएएस अफसर की तलाश कोई भी सरकार करती है। सहगल को करीब से जानने वाले लोग जानते हैं कि कुछ ही दिनों की बात है मुख्यमंत्री कार्यालय में सिर्फ नवनीत सहगल की ही चलेगी। अब देखना यह होगा कि सहगल मीडिया पर कितना जादू चला पायेंगे।

लेखक संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदी साप्ताहिक वीकएंड टाइम्स के संपादक हैं.


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