बसपा से उब चुकी है जनता, सपा बनाएगी बहुमत की सरकार : शिवपाल

: इंटरव्‍यू : वह चाहे महंगाई हो या फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा हो सदन से सड़क तक लगातार मुखरता के साथ आंदोलनों की अगुवाई करने वाले नेता विरोधी दल एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने बसपा और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर हल्ला बोला। यूपी में ध्वस्त कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार में आरोपित मंत्रियों, अफसरों, किसानों के जमीन अधिग्रहण समेत तमाम मुद्दों पर उन्होंने न सिर्फ बसपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया बल्कि आम आदमी की तकलीफों बिजली, सडक़, पानी, चिकित्सा को लेकर बड़े आंदोलन खड़े किए। यही नहीं श्री यादव ने पार्टी के संगठनात्मक स्तर पर भी नेताओं, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित कर उन्हें चुनाव में जाने से पूर्व पूरी कुशलता के साथ गांव, गरीब, नौजवान और किसानों में समाजवादी सिद्धांतों व सपा शासनकाल की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव जाकर प्रचारित करने के लिए प्रेरित किया।

वे कहते हैं कि सरकार में आने पर कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। संगठित अपराध व अपराधियों पर नकेल कसी जाएगी। भ्रष्ट अफसरों की सूची बनाकर उन्हें दंडित किया जाएगा। राज्य में विकास के द्वार खोलने हेतु उद्योगों की स्थापना के लिए समुचित वातावरण बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। सपा अपने बलबूते पर बहुमत की सरकार बनाएगी। अब जबकि विधानसभा के आम चुनावों की घोषणा हो चुकी है सारे दल अपने को बसपा का विकल्प बताकर सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं तो ऐसे में समाजवादी पार्टी अपनी चुनावी भूमिका को किस तरह से और कहां देख रही है, इस संबंध में डीएनए के श्रीप्रकाश तिवारी ने उनसे सिलसिलेवार बातचीत की। प्रस्तुत है नेता विरोधी दल शिवपाल सिंह यादव से बातचीत के प्रमुख अंश :

सवाल- 2012 के विधानसभा चुनावों को आप किस दृष्टि से देखते हैं?

जवाब : दरअसल यह चुनाव यूपी की आम जनता गांव, गरीब, किसान और नौजवानों के लिए बेहद अहमियत रखता है। मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार ने अपने कार्यकाल में जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं को खूंटी पर टांग दिया। दलित की बेटी दौलत बटोरने में लगी रहीं। आम आदमी रोजी-रोजगार, बिजली, पानी, सडक़, शिक्षा, चिकित्सा से महरूम रहा। सरकार में शामिल मंत्री भ्रष्टाचार में मशगूल रहे। ऐसे में अब वक्त आ गया है कि जनता इस जनकल्याण विरोधी सरकार को उखाड़ फेंके ताकि आम आदमी के हित में काम करने वाली समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त हो। दूसरे, बसपा शासन में लोकतांत्रिक  व संवैधानिक संस्थाओं का जमकर मजाक उड़ाया गया। लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वाले चाहे वे राजनीतिक संगठन हों या फिर सामाजिक, स्वंयसेवी, मीडिया तथा कर्मचारी संगठन हों उन पर जमकर लाठियां-गोलियां बरसाई गईं। सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के निर्णयों को बसपा सरकार ने नहीं माना। सरकार विरोधी स्वर को बलपूवर्क दबाने का प्रयास किया गया। इसलिए भी राज्य में लोकतंत्र की बहाली के लिए 2012 का विधानसभा चुनाव अत्यंत महत्व रखता है ताकि एक लोकतांत्रिक सरकार का गठन हो जिसके लिए समाजवादी पार्टी से बेहतर यह व्यवस्था कोई और दल नहीं दे सकता है।

सवाल : विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की भूमिका को आप कहां देखते हैं?

जवाब : देखिए चाहे मुख्यमंत्री के जन्मदिन की वसूली को लेकर सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के उत्पीडऩ का मामला हो, न्यायालय की अवमानना का हो, भ्रष्टाचार में आरोपित मंत्रियों को सरकार से हटाने का मसला हो, महंगाई, भ्रष्टाचार, अपराधियों, माफियाओं समेत संगठित अपराध का मुद्दा हो, मासूम बच्चियों की बलात्कार के बाद हत्या का विषय हो हरेक को लेकर समाजवादी पार्टी तब सड़कों पर उतरी जब दूसरे राजनीतिक दल मुख्यमंत्री मायावती के भय से अपने-अपने घरों में दुबके थे। अराजक सरकार के खिलाफ तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सपा ने हर मौकों पर जमकर विरोध किया जिसको उसे सर्वाधिक खामियाजा भी भुगतना पड़ा। सपा कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे लाद दिए गए। तकरीबन एक लाख कार्यकर्ताओं को उनके घरों से उठाकर बसपा सरकार के इशारे पर उन्हें जेल में डाल दिया गया। बसपा सरकार के खिलाफ तो सपा ने संघर्ष किया है। इसलिए सपा की जनता के प्रति भूमिका तब भी अहम थी और अब जबकि उसके चलाचली की बेला आ गई है तो लोगों में यह विश्वास पैदा होना लाजिमी है कि सपा जनता की इच्छाओं व आकांक्षाओं पर खरा उतरेगी।

सवाल : सारे दल यूपी में सरकार बनाने का दावा  कर रहे हैं। उनके दावे में कितना दम है?

जवाब : लोकतंत्र है। हर कोई दावा कर सकता है। मगर हकीकत इसके ठीक उलट है। जनता ने पिछले पौने पांच सालों में बहुत करीब से बसपा, कांग्रेस, भाजपा तथा अन्य दलों को देखा है। उसे मालूम है कि सिर्फ समाजवादी पार्टी ही उसकी समस्याओं को लेकर संघर्ष करती रही है। सवाल करते हुए कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार के लिए आखिर दोषी कौन है? दिल्ली में यूपीए की सरकार या फिर यूपी में बसपा की सरकार? आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों का ख्याल कौन करता? डीजल व पेट्रोल के दाम साल में पांच-पांच बार बढ़ाए गए। छात्रों के शुल्क में बढ़ोत्तरी की गई। किसानों को उनकी लागत का मूल्य तक नसीब नहीं हो पाया। खाद, बीज और बिजली सरकार मुहैया नहीं करा पाई। अपराधों से पूरा प्रदेश थर्रा उठा। कांग्रेस व भाजपा सिर्फ तमाशा देखती रही।

सवाल : विरोधी दल सपा के घोषणा पत्र को लेकर आलोचनाएं कर रहे हैं कि पार्टी ने जो वादा किया है वह झूठ का पुलिंदा है। क्या कहेंगे आप?

जवाब : विरोधी पार्टियों को यह मालूम है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव जो सोचते हैं वही कहते हैं तथा वही करते हैं। उनके कथनी-करनी में एकरूपता रहती है। प्रदेश की जनता ने नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के तीन-तीन बार के मुख्यमंत्रित्वकाल को देखा है। बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दिया। गरीबों की बेटियों को कन्या विद्याधन दिया। गांवों को सडक़ों व पुलों के जरिए शहरों से जोड़ा। बिजली घर लगवाए। अस्पताल बनवाए। किसानों के कर्जे माफ किए। अल्पसंख्यकों को रोजी-रोटी से जोड़ा। प्रदेश के बजट का 70 फीसदी धन गांव, गरीब और किसानों पर आवंटित किया। अब चूंकि सपा दवाई, पढ़ाई व सिंचाई मुफ्त देने के साथ नौजवानों के आधुनिक शिक्षा देने पर जोर देने की बात कर रही है तो विरोधी दल सकपकाए हुए हैं।

सवाल : पिछले लोकसभा चुनावों में सपा विरोधी दलों ने पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल कम्प्यूटर और अंग्रेजी को लेकर हल्ला मचाया था कि मुलायम सिंह यादव कम्प्यूटर व अंग्रेजी विरोधी हैं। मगर अब जब पार्टी बारहवीं पास छात्रों को लैपटॉप व दसवीं पास विद्यार्थियों को टैबलेट देने की बात कर रही है तो वे इसे लालीपॉप बता रहे हैं? क्या कहेंगे आप?

जवाब : दरअसल विरोधी हताश हैं। उनके पास मुद्दों का अभाव है। जनता उन्हें खारिज कर चुकी है। दूसरे सपा और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव कभी भी न तो कम्प्यूटर और न ही अंग्रेजी के विरोधी रहे हैं। वे राष्ट्रभाषा समेत भारतीय भाषाओं के सम्मान के पक्षधर हैं।

सवाल : पार्टी में टिकट को लेकर असंतोष की शिकायतें हैं। कई स्थानों पर विरोध के स्वर सुनने को मिल रहे हैं।

जवाब : बिलकुल नहीं। हर कार्यकर्ता की राजनीतिक महात्वकांक्षा होती है। इसका मतलब यह नहीं होता कि वह विरोध पर उतारू है। इस समय हर कार्यकर्ता एकजुट है और पार्टी की सरकार बनाने के लिए जुट गया है।

सवाल : बसपा सरकार और उसके अफसरों के कामकाज की शैली को लेकर आपने कई बार सवाल खड़े किए? वे अफसर अभी भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं। क्या उन्हें भी हटाने की मांग चुनाव आयोग से करेंगे?

जवाब : निश्चिततौर पर आयोग से शिकायत करेंगे। पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से शिकायत कर भी चुका है। मगर अभी तक डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह को ही हटाया गया है। मगर पार्टी ने कैबिनेट सचिव शशांक शेखर, मुख्य सचिव तथा दूसरे कई जिलों के डीएम पंचम तल के इशारे पर काम कर रहे हैं। पहली बार यह देखने को मिला कि अफसरों ने संगठित व सुनियोजित तरीके से सरकारी धन के लूट का साम्राज्य स्थापित किया। इन अधिकारियों के रहते विधानसभा का निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। चुनाव आयोग इन्हें तत्काल हटाए।   

सवाल : कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी कहते हैं कि बसपा का हाथी पैसे खाकर मोटा हो गया है। कांग्रेस के इस विरोध को आप किस रूप में लेते हैं?

जवाब : बसपा के हाथी को पैसे तो यूपीए सरकार ही खिला रही है। केन्द्र सरकार की योजनाओं चाहे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन हो, मनरेगा हो या फिर जेएनएनयूआरएम हो हर योजनाओं में मायावती और उनके मंत्रियों ने पैसों की लूट की है। इन घोटालों में मुख्यमंत्री दफ्तर शामिल है। साभार : डीएनए

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