बहुगुणा ने की मीडिया की बोलती बंद, नहीं चल रही कोई एंटी खबर

यशवंतजी, क्या कहेंगे इन उत्तराखंड के मीडिया वालों को, बहुगुणा सरकार के सामने पूरी तरह से घुटने टेक चुके हैं। न्यूज़ चैनलों से लेकर अखबारों तलक की बात की जाए तो सबका एक जैसे ही हाल है। किसी की हिमाकत नहीं है कि बहुगुणा जी के खिलाफ एक शब्द भी कुछ कहें। हाल ही में उतराखंड विधानसभा का बजट सत्र ख़त्म हुआ है। करीब 10 दिनों तक ये बजट सत्र चलना था, लेकिन पांच दिन पहले ही सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। वजह सतापक्ष और विपक्ष की आपसी तकरार।

सदन में अक्सर जनहित के मुद्दों पर विचार किया जाता है। लेकिन यहां तो नेता अपने आपसी मुद्दों में ही उलझे रहे। सदन की पांच दिनों की कार्यवाही में एक भी दिन ऐसा नहीं लगा कि सत्तापक्ष और विपक्ष की मंशा जनता से जुड़े किसी मुददे पर चर्चा करने की रही हो। चैंकाने वाली बात ये है कि जनता की रहनुमाई करने वाले पत्रकार इस मौके पर अपना पत्रकारिता धर्म कहां खो बैठे। सब उनकी आंखों के सामने हुआ लेकिन किसी ने जहमत नहीं उठाई कि सत्तापक्ष और विपक्ष के इस हंगामे की असली हकीकत जनता के सामने लाए जाए। अरे भाई ये पत्रकार सरकार के खिलाफ भला बोलेंगे भी क्यों। सरकार मीडिया के लिए पैसा पानी की तरह जो बहा रही है। चाहे न्यूज़ चैनल हो या फिर अखबार सबके पर बहुगुणा जी दिल खोलकर विज्ञापनों के नाम पर पैसे की भरमार कर रहे हैं।

योजनाएं भले ही धरातल पर आए ना आए लेकिन बहुगुणा जी के नाम का उस योजना से जुड़ा विज्ञापन मीडिया को जरूर मिल जाता है। आलम ये है कि दिल्ली के अखबारों तलक में उत्तराखंड सरकार के बड़े बडे विज्ञापन छप रहे हैं। इस राज्य के लिए प्रसारित होने वाले न्यूज चैनल कर अगर बात की जाए तो शायद ही कोई ऐसा न्यूज चैनल हो जिसके पास बहुगुणा सरकार का विज्ञापन ना हों। उधर ऐसा ही कुछ हाल अखबारों का भी है। हर छोटे से छोटे अखबार में बहुगुणा जी के नाम के चर्चे हैं। इन हालात में भला उत्तराखंड में जो हो रहा है उसकी तस्वीर जनता के सामने क्या मीडिया रख पाएगा। जनता ये सोचती है कि मीडिया है ना। अगर कुछ भी गलत हुआ तो मीडिया तो बता देंगे। लेकिन अब देवभूमि में जो हो रहा है क्या ये सही है।

सवाल ये है कि आखिरकार मीडिया इतने दबाव में काम क्यों कर रहा है। खबरें तो यहां तक के उत्तराखंड के लिए प्रसारित होने वाले न्यूज़ चैनल और अखबारों के मालिकों ने अपने कर्मचारियों को साफ शब्दों में कह रखा है कि सरकार के खिलाफ कुछ नहीं लिखना है। अमर उजाल में पिछले दिनों कुछ खबरें सरकार के को आईना दिखाने वाली लिखी गई तो इस अखबार का विज्ञापन ही बंद कर दिया गया। केवल कोर्ट से आदेश से बचने के लिए इस अखबार को एकाध विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। यानी यहां जो भी सरकार के खिलाफ बोलेगा उसको इसी स्थिति से गुजरना पड़ेगा। बहुगुणा सरकार ने मीडिया पर अघोषित प्रतिबंध लगा रखा है और जस्टिस काटजू संजय दत्‍त की सजा माफ कराने के अभियान में लगे हुए हैं। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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