बाबा रामदेव : मूतने से लेकर हनीमून तक…

कुछ तो सोचकर बोलो बाबा…  बड़ी हैरानी हो रही है आजकल बाबा रामदेव की बात सुनकर…  बाबा रामदेव को मैने खूब कवर किया उनके आन्दोलन के दौरान… बातें तो उनकी पहले भी  लोगोँ को चुभती थीं लेकिन मर्यादा मे रहतीं थीं लेकिन आजकल जाने बाबा को क्या हो गया है… शुक्रवार को लखनऊ मे कह डाला कि राहुल गांधी तो हनीमून  मनाने के लिये दलित के घर जाता है…. अगर वो किसी दलित की बेटी से शादी कर लेता तो वो भी दौलतमंद हो जाती…. अब बताइये बाबा के इस अनमोल वचन का क्या अर्थ निकाला जाये?

चलिए एक बार को मै भूल जाता हूँ कि मै एक पत्रकार  हूँ और मुझे आदत है तिल का ताड़  बनाने क़ी… लेकिन आप भी सोचकर बताइये दलित के घर हनीमून बनाने के इस बयान का क्या अर्थ निकाला जाये? अभी कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू मे आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल पर हमला करने के जोश मे बोल गये कि ''जितनी भीड़ केजरीवाल को सुनने  बनारस की रैली मे आयी थी न , उतनी भीड़ तो तब आ जाती है जब मैं मूतने के लिये गाड़ी से उतरता हूँ''

हद्द हो गयी भाई , माना आपकी केजरीवाल से नहीं बनती या आपकी और केजरीवाल की विचारधारा अलग है लेकिन इस तरह के शब्द एक योगगुरु के मुख से शोभा देते हैं ? योगी वो होता है जो अपनी इन्द्रियोँ को अपने वश में करके समाज मे एक आदर्श प्रस्तुत करता है लेकिन आप समाज के सामने ये कैसे उदाहरण रख रहे हैं? माना कि आपका समर्थन बीजेपी को है और कांग्रेस हो या फिर आम आदमी पार्टी ये सब आपके निशाने पर रहेंगीं… लेकिन ये विरोध भी कैसा अगर भाषा और शब्द मर्यादा की सीमा रेखा ही लांघ जाये !!

बाबा रामदेव……. देश और दुनिया मे आपके  बहुत से  शिष्य और अनुयायी हैँ जो आपको आदर्श मानकर आपकी इज़्ज़त करते हैं … ऐसी इज़्ज़त जो कोइ रातों रात नहीं कमाई , जाने कितनी मेह्नत और त्याग के बाद ये दिन देखने को मिला है आपको इसलिए आपसे गुज़ारिश है कि……. कुछ तो सोचकर बोलो बाबा…

एनडीटीवी में कार्यरत पत्रकार शरद शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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