बिंदु दारा सिंह, गुरु मयप्पम : बदनाम हुए तो क्या नाम न हुआ?

जी हाँ..कुछ हिंदी फिल्मों में चंद मिनटों का काम और छोटे परदे पर थोड़ी कलाकारी करने वाले बिंदु दारा सिंह की सिल्वर स्क्रीन पर आज तक कुछ ज्यादा पहचान नहीं बन पायी.. अगर उनके नाम के साथ उनके स्वर्गीय पिता जी मशहूर पहलवान और फ़िल्मी कलाकार दारा सिंह का नाम न जुड़ा होता तो शायद बिंदु को वो थोड़ी पहचान भी न मिल पाती जो आज उनके पास है.. लेकिन उनके आज के कारनामों ने वो सब कुछ कर दिया जिसके वो भोगी थे.

स्वर्गीय दारा सिंह जी को हमारे समाज ने जो इज्ज़त दी थी बिंदु ने उसको उसी सरे बाज़ार में बेच डाला जहाँ की हर सड़कें और गलियाँ दारा सिंह को सलाम करने के लिए अपना सिर झुका दिया करती थी..  दारा सिंह जी की पहलवानी और फिल्मों में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए सरकार ने उन्हें संसद में बैठने तक की इज्ज़त दी.. पर अफ़सोस बिंदु ने इनमें से किसी भी बात का ख्याल न रखा और पैसों और ऐय्याशी की लालच में बाप की कमाई हुई बरसों की इज्ज़त एक पल में तार तार कर दी.

मुझे याद है कि टीवी सीरियल बिग बॉस में जब भी दारा सिंह का नाम आता था बिंदु भावुक होकर लोगों का दिल जीत लिया करते थे और शायद उनकी इन्ही बातों का लोगों पर इतना असर हुआ कि लोगों ने उन्हें बिग बॉस का ताज तक पहना कर उन्हें विजेता तक बना डाला.. लोगों का ख्याल था कि बिंदु एक बहुत ही बड़े और कोमल दिल का भावुक कलाकार है और उसे आगे आने में मदद मिलनी चाहिए.. पर किसे पता था कि आगे आने की जल्दबाजी में बिंदु इतना आगे चले जायेंगे जिसका रास्ता किसी जेल पर जाकर ख़तम होगा.. बिग बॉस सीरियल देखते वक़्त किसी ने सपने भी नहीं सोचा था कि भोला सा दिखने वाला बिंदु दरअसल एक अपराधिक प्रवृत्ति का शातिर खिलाड़ी है, जिसके लिए देश या देश की इज्ज़त या देशवासी, यह सबकुछ कोई मायने नहीं रखते, उसके सामने अगर किसी चीज़ की कोई कीमत है तो वो सिर्फ पैसा और ऐय्याशी.. जिसने अपनी कलाकारी के औज़ार से देश की इज्ज़त को ही ख़तम कर डाला.

बिंदु ने पैसे और ऐय्याशी की वजह से ही आईपीएल के मैच पर सट्टा लगाने का काम शुरू किया और फिर पीछे मुड़ कर कभी नहीं देखा.. ऐसा करके बिंदु ने अपने पिता की इज्ज़त तो दांव पर लगा ही दी, साथ ही अपने देश और देशवासियों के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात भी किया.. जिसका कोई प्रायश्चित कभी हो ही नहीं सकता.. जिसकी जितनी भी भर्त्‍सना की जाए, कम है.      

क्रिकेट आज हमारे देश में सिर्फ एक खेल ही नहीं, एक जुनून बन चूका है, जिसके साथ लोगों की भावनाएं भी उतनी ही जुडी होती हैं जितना एक खिलाड़ी की मेहनत.. क्रिकेट के हर एक मैच में लोगों की दिलचस्पी सातवें आसमान पर होती है.. किसी का विकेट गिरना हो या किसी के बल्ले से चौका या छक्का लगना हो, मैच का हर एक क्षण हमारे देशवासियों के लिए ख़ुशी और जश्न का मौक़ा होता है.. लेकिन बाद में उन्हें जब पता चलता है कि मैच के दौरान उन्होंने जो कुछ भी देखा वो सब एक छलावा था जो कि एक साज़िश के तहत श्रीसंत, अजीत चन्देला, अंकित चौहान और इन्हीं के जैसे कुछ घटिया खिलाड़ियों के जरिये फिक्स किया हुआ था, जिसकी कमांड मैदान में ही बैठे बिंदु दारा सिंह और गुरु मयप्पम जैसे देश के गद्दारों के पास थी, जो हर एक गेंद को अपने इशारों पर डलवा रहे थे..ताकि उनकी झोली में रुपयों का अम्बार लग सके.. ऐसी स्थिति में हर एक देशवासी को ज़ोरदार धक्का लगता है और वह अपने को ठगा हुआ सा महसूस करने लगता है.

पर कौन है जो देश की सोचे, खिलाड़ी हो, या कलाकार, टीम का मालिक हो या मैदान में खड़ा अम्पायर हर किसी को तो बस रुपयों और ऐय्याशी की लत जो लग चुकी है, जिसके मोह माया में डूब कर यह लोग न सिर्फ अपना ईमान बेच रहे होते हैं, बल्कि यह लोग  देश के साथ ग़द्दारी करने से भी नहीं हिचकते. चेन्नई सुपर किंग के मालिक का दर्जा रखने वाले गुरु मयप्पम जैसे तुच्छ इंसान टीम के मालिक होकर भी एक चपरासी के जितना भी इज्ज़त संभाल कर न रख सके.. स्कूल के वक़्त में ही पढाई छोड़ चुके गुरु को भगवान ने वह सब कुछ दिया, जिसके शायद वोह लायक भी न था.. एक बड़े रईस और रसूखदार आदमी का दामाद बन कर भी गुरु मयप्पम का दिल न भरा और उसने भी उन्हीं घटिया लोगों से हाथ मिलाया जो देश कि इज्ज़त और लोगों की भावनायों का सौदा करने में लगे हुए थे.

ऐसा करते वक़्त उनकी शायद यह सोच रही होगी कि अगर बात खुल भी गयी तो क्या होगा बदनाम होकर भी तो नाम होगा ही.. और वही आज हुआ भी.. जो लोग मयप्पम और बिंदु को नहीं भी जानते थे वोह सब उनके द्वारा किये गए कुकर्मों से उन्हें भली भाँती जान गए हैं.. वरना न तो बिंदु ने ही बॉलीवुड में बहुत नाम कमाया और न ही गुरु मयप्पम ने चेन्नई सुपर किंग का मालिक बन कर ही लोगों के दिल में अपनी कोई ख़ास पहचान बना सके.. लेकिन एक ही पल में गुरु और बिंदु को देश विदेश में बैठा हर एक इंसान जान गया.. इससे न तो बिंदु को कोई फर्क पड़ता न गुरु मयप्पम को कि उनकी यह नयी पहचान उन्हें ही भारी पड़ेगी.. अपने नीच हरकतों से देश की इज्ज़त के साथ खिलवाड़ करने वाले इन घटिया लोगों को अदालत भले ही कोई बड़ी सजा न दे सके, और थोड़े समय के बाद इन्हें बरी भी कर दे, परन्तु देश का कोई भी नागरिक बिंदु, गुरु, श्रीसंत, चन्देला और चौहान जैसे पैसों और ऐय्याशी के लोभी लोगों को कभी माफ़ नहीं करेगी.. शर्म आनी चाहिए देश के इन गद्दारों को.

लेखक सैयद असदर अली दिल्‍ली में पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. इनसे संपर्क asdarali@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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