बिना मेरी राय लिए उस छद्म पत्रकार के पत्र को आपने कैसे छाप दिया

आदरणीय यशवंत जी…. आपको लेकर मेरे दिमाग में एक अच्छी तस्वीर हैं…. ऐसी तस्वीर जिस पर कोई दाग नहीं है…. ऐसा इंसान जिसपर मीडिया मानुषों के बारे में सही गलत लिखने की हिम्मत है….. एक ऐसा मंच जिस पर दुखी आत्मा अपनी भड़ास निकालता है…. इन्हीं खासियतों की वजह से मैं भड़ास फार मीडिया का बहुत बड़ा फैन हूँ……. इस नाते मेरा आपकी साइट पर टिपण्णी करने का हक है…… और ये हक तब और हो जाता है जब आपकी साइट पर लिखे एक लेख में मुझे भी एक किरदार बना दिया जाता है…… बगैर मेरा पक्ष जाने……..

दरअसल आपने IBN 7 के जयशंकर से जुडी एक खबर छापी है…. जिसे रांची के ही एक वरिष्ठ पत्रकार ने भेजा है……. ऐसा आपने लिखा है…… और ये सच भी है क्योंकि मीलों दूर बैठे आपको कैसे पता कि रांची में फलां पत्रकार का फलां मामला है….. खैर उस महाशय को भगवान अकल दे…. लेकिन उस महाशय को मैं इतना जरूर कहना चाहूँगा कि छुप कर वार करने वाला कायर कहलाता है….. उनकी बातों में सच्चाई है तो फिर उन्हें अपने नाम के साथ लेख लिखना चाहिए था….. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया…. उन्हें मैं जानता हूँ…… वो ऐसा कर भी नहीं सकते….. क्योंकि दिमागी तौर पर वो दिवालिया हैं…

और अब शिकवा शिकायत जनाब यशवंत जी आपसे….. चूँकि आप भी एक पत्रकार हैं… तो आपको ये अंदाज़ा जरुर होगा कि जब कोई मामला हो तो दोनों पक्षों कि बात कही जाय….जब तक कि आप का इसमें निजी हित ना हो……और निजी हित पीत-पत्रकारिता कहलाता है…जहां तक मैं समझता हूँ आपको ना मुझसे और ना ही जयशंकर से कोई दुश्मनी होगी तो फिर आपसे ये पीत-पत्रकारिता कैसे हो गई महाशय…….

बिना मेरी राय जाने आपने उस छदम पत्रकार के पत्र को छाप दिया ….और इसी कारण लेख में कई त्रुटियाँ  हैं….जैसे जयशंकर कभी PTN न्यूज़ में कैमरामैन नहीं थे…..वह वहाँ भी रिपोर्टर थे और यहाँ भी करेस्पोंडेंट हैं…जबकि मैं NDTV को झारखण्ड में हे़ड करता हूं…  लेख में इस बात का भी जिक्र है कि चैनल ने हम बिहारियों को जगह भरने के लिए रख लिया……लेकिन सच बिलकुल अलग है…..चैनल में कोई भी मेरे परिवार या जान पहचान का नहीं है….मैं जो हूँ अपनी मेहनत और लगन के बलबूते हूँ……और इस पर मुझे गर्व है….

एक बात और कि जो पत्रकार साहब ने लेख आपको भेजा है वो भी दरअसल बिहार से सम्बन्ध रखते हैं…..और अगर उक्त वरिष्ठ पत्रकार के चाल चलन और चरित्र पर लिखा जाये तो एक किताब भी छप सकता है. आप खुद आकर इस बात की तस्दीक कर सकते हैं ..लेकिन मैं इन साहब पर कीचड़ उछालकर अपना कपड़ा दागदार नहीं करना चाहता.  अब आखिर में यही गुजारिश है आपसे कि मैंने जिन जिन बिन्दुओं को उठाया है उस पर आप आगे से ध्यान देंगे….. जिससे भड़ास की विश्वसनीयता बनी रहे……

एक बात और कहूँगा कि ऐसी परिपाटी का विरोध होना चाहिए क्योंकि आज मेरा और जयशंकर का नाम विवादों में है कल किसी और का, परसों किसी और का …..क्योंकि महाशय गला फाड़ प्रतियोगिता में हम पत्रकारों में एकता नहीं है जिसे मैं स्वीकार करता हूँ.. और यह स्वाभाविक भी है. लेकिन सिर्फ इस कारण से अपनी बिरादरी का सार्वजनिक छिछालेदर हो ये ठीक नहीं है…….आशा है आप मेरी भावनाओं को अपने दिल और साईट पर जगह देंगे……..

हरिवंश शर्मा

एनडीटीवी

रांची


मूल खबर को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…  http://bhadas4media.com/article-comment/2810——-7—-.html

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