बिना रजिस्‍ट्रेशन के हिंदुस्‍तान ले रहा है सरकारी विज्ञापन!

मुंगेर। बिहार में आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध युद्ध शुरू कर चुके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कदम को कमजोर करने का काम बिहार के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय (पटना) के वरीय पदाधिकारी और भागलपुर के जिलाधिकारी नर्मदेश्वर लाल संयुक्तरूप से कर रहे हैं। जिन हाथों से जिलाधिकारी (भागलपुर) नर्मदेश्वर लाल को आर्थिक अपराध में डूबे दैनिक हिन्दुस्तान के प्रकाशन की नवीनतम स्थिति की जानकारी बिहार सरकार और सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय (पटना) को देनी चाहिए थी और बिना रजिस्‍ट्रेशन के छप रहे हिन्दुस्तान अखबार को सरकारी विज्ञापन बंद करने की सिफारिश करनी चाहिए थी, उस जिला पदाधिकारी के हाथ दैनिक हिन्दुस्तान के बैनर तले भागलपुर में 17 मार्च को आयोजित ‘‘रोड शो‘‘ को हरी झंडी दिखाने में उपयोग हो रहे हैं।

आर्थिक अपराध में डूबे मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड का यह खेल भारतीय लोकतंत्र को बेहद कमजोर कर रहा है और आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध चले रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अभियान को भोथरा कर रहा है। देश की जनता को सौ प्रतिशत विश्वास है कि मुख्यमंत्री की नजर में मामले के आने के बाद वे आर्थिक अपराध में डूबे दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधकों और संपादकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई का आदेश देंगे।

भागलपुर (बिहार) से मुद्रित, प्रकाशित और वितरित दैनिक हिन्दुस्तान अपने अंतिम पृष्ठ पर नित्य छाप रहा है- आरएनआई-आवेदित, अर्थात इस अखबार ने प्रेस रजिस्ट्रार से निबंधन के लिए आवेदन किया है। आवेदित अखबार को नियमत: सरकारी विज्ञापन पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यह खुलासा बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से जारी ‘बिहार विज्ञापन नीति-2008‘ की कंडिका (3) के खंड 2 (ख) में उल्‍लेखित है, जिसके अनुसार सरकारी विज्ञापन पाने की पात्रता इस प्रकार है‘–‘‘समाचार पत्र/पत्रिका को प्रेस और पुस्तक अधिनियम, 1867 के प्रावधानों के अनुसार भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक (प्रेस रजिस्‍ट्रार) द्वारा निबंधित (रजिस्‍टर्ड) होना होगा।‘‘

अखबार कहता है कि हमने निबंधन के लिए आवेदन दिया है। बिहार सरकार का सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय (पटना) गैर निबंधित अखबार को कागज पर निबंधित (रजिस्‍टर्ड) घोषित कर सरकारी विज्ञापन विगत नौ महीनों से लगातार देता आ रहा है और बिहार सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को कमजोर कर रहा है। निदेशालय के एक अधिकारी ने पूछने पर बताया कि भागलपुर के जिला पदाधिकारी (डीएम) या सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के उप-निदेशक या जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी ने आज तक निदेशालय (पटना) को लिखित रूप में या मौखिक रूप में कोई भी रिपोर्ट नहीं भेजी है कि भागलपुर से 1 जुलाई 2011 से मुद्रित, प्रकाशित और वितरित दैनिक हिन्दुस्तान (भागलपुर संस्करण) ने निबंधन के लिए आवेदन दिया है और अपने अखबार में नित्य प्रिंट लाइन में अंतिम पृष्ठ पर प्रकाशित कर रहा है -आरएनआई- आवेदित।

आर्थिक अपराध में डूबे मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड यह साबित करना चाह रहा है कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार नहीं चल रही है,वरन कोरपोरेट मीडिया के अधीन सरकार चल रही है। भारतीय लोकतंत्र की जय हो। कोरपोरेट मीडिया की जय हो। इस बीच, मुंगेर के सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता काशी प्रसाद और बिपिन कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस पूरे प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध इकाई (पटना) से कराने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आर्थिक अपराधियों के साथ-साथ आर्थिक अपराध को संरक्षण देनेवाले जनसम्पर्क निदेशालय (पटना) के वरीय अधिकारियों और भागलपुर स्थित सरकारी पदाधिकारियों को भी अभियुक्त बनाने की मांग की है।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं.-09470400813 के जरिए किया जा सकता है.

 

 
 

 

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