बिहार में दैनिक जागरण के अवैध संस्‍करणों की पोल पीसीआई टीम के सामने खोली गई

: जागरण पर भी विज्ञापन फर्जीवाड़ा करने का आरोप : सीबीआई से जांच कराने की मांग : मुंगेर। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्त्ति मार्कण्डेय काटजू के द्वारा भारतीय प्रेस परिषद के संविधान की धारा 13 के अधीन ‘‘बिहार में सच लिखने, दिखाने और बोलने की पत्रकारीय अभिव्यक्ति पर सरकारी दबाव‘‘ की जांच के लिए परिषद के सदस्य राजीव रंजन नाग की अध्यक्षता में गठित ‘जांच कमिटी‘ के समक्ष मुजफ्फरपुर और मुंगेर में क्रमशः 11 और 12 जून को दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन के फर्जीवाड़ा को ससबूत उजागर किया गया।

मुजफ्फरपुर में जागरण से निष्कासित कर्मी रमण कुमार यादव ने दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा के सबूतों को जांच कमिटी के समक्ष पेश किया, जबकि मुंगेर में संस्कार भारती के मुंगेर जिला प्रमुख व जागरण के पूर्व संवाददाता कंचन शर्मा ने जांच कमिटी से दैनिक जागरण के राष्ट्रीय स्तर के अवैध संस्करण और विज्ञापन फर्जीवाड़ा के मामले में प्रेस परिषद से पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की पूरजोर मांग की। मुजफ्फरपुर में भी रमण कुमार यादव ने जांच कमिटी से दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा की जांच की सिफारिश सीबीआई से कराने की सिफारिश प्रेस परिषद से करने की मांग की। दोनों ने प्रेस परिषद से तत्काल बिहार के जिलों-जिलों में मुद्रित और प्रकाशित होने वाले दैनिक जागरण के अवैध संस्करणों के प्रकाशन को तुरंत बन्द कराने की भी पूरजोर मांग लिखित रूप में की।

जांच कमिटी में सदस्य के रूप में पटना के पत्रकार अरुण कुमार (टाइम्स आफ इंडिया) भी शामिल थे। अस्वस्थता के कारण जांच कमिटी के तीसरे सदस्य कल्याण बरुआ मुंगेर नहीं आ सके। जांच कमिटी के अध्यक्ष को लिखित रूप में शिकायत-पत्र सुपुर्द कर संस्कार भारती के मुंगेर जिला प्रमुख कंचन शर्मा ने दैनिक जागरण के देशव्यापी अखबार के निबंधन में जालसाजी और धोखाधड़ी के बल पर अवैध संस्करणों के जरिए सरकारी विज्ञापन की लूट के मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश करने की मांग की। सीबीआई जांच के समर्थन में श्री शर्मा ने जांच कमिटी के समक्ष लिखित तर्क पेश किया और बताया कि ‘‘प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली टी0 जयराज ने कार्यालय पत्रांक संख्या-612/165/1071/आरटीआई/एनपीसीएस, दिनांक 17-03-2011 के जरिए सूचित किया कि –‘‘प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय के अभिलेख के अनुसार बिहार के भागलपुर से दैनिक जागरण निबंधित नहीं है। जहां तक अखबार के प्रकाशन को रद्द करने का सवाल है, जिला पदाधिकारी, भागलपुर ऐसे मामलों के निबटारे के लिए सक्षम पदाधिकारी हैं।‘‘

जिला पदाधिकारी, भागलपुर को इस मामले में काररवाई के लिए लिखा गया तो जिला पदाधिकारी ने कार्रवाई करने से साफ इंकार कर दिया। जांच कमिटी के समक्ष कंचन शर्मा ने बताया कि किस प्रकार पटना की निबंधन संख्या को राज्य के अन्य जिलों-जिलों से निकल रहे अवैध दैनिक जागरण संस्करणों में चिपकाकर अवैध संस्करण छापा जा रहा है और विज्ञापन प्रकाशन मद में केन्द्र और राज्य सरकारों के राजस्व की लूट की जा रही है। इस अवैध संस्करण और सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा में प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली, डीएवीपी, नई दिल्ली और पटना स्थित सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय की संलिप्तता स्पष्ट प्रमाणित हुई है। इस देश व्यापी जागरण के विज्ञापन घोटाले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।

इस बीच, मुजफ्फरपुर के रमण कुमार यादव और मुंगेर के कंचन शर्मा ने इस संवाददाता को बताया कि भारतीय प्रेस परिषद की जांच कमिटी के समक्ष दैनिक जागरण के अवैध संस्करण और विज्ञापन फर्जीवाड़ा के सच को उजागर करने के बाद दैनिक जागरण के गुर्गे लगातार जान से मार डालने की धमकी उन्हें लगातार दे रहे हैं। दोनों ने कहा कि वे लोग ‘मौत‘ को टोकरी में लेकर दैनिक जागरण के आर्थिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनके साथ भविष्य में कोई अप्रिय घटना घटती है, तो अखबार के निदेशक मंडल के अध्यक्ष के साथ-साथ सभी संपादक जिम्मेवार होंगे।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट। इनसे संपर्क मोबाइल नं0-09470400813 के जरिए किया जा सकता है।

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