बिहार में पिछले बारह सालों से अवैध प्रकाशन कर रहा है दैनिक जागरण

देश का नम्‍बर वन बताने वाला अखबार फर्जीवाड़ा करके करोड़ों रुपये का सरकारी विज्ञापन डकार चुका है. इस बात का खुलासा एक आरटीआई के माध्‍यम से हुआ है. यह अखबार भी हिंदुस्‍तान की तरह एक रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर पर कई यूनिट लांच करके नियम कानून की धज्जियां उड़ा चुका है. मुजफ्फरपुर में जागरण के पूर्व कर्मचारी रमन कुमार यादव द्वारा मांगी गई जानकारी के आधार पर आरएनआई ने स्‍पष्‍ट किया है कि जागरण ने सिर्फ पटना के लिए अखबार का रजिस्‍ट्रेशन कराया था. इसके अलावा अन्‍य यूनिटों के लिए उसका कोई रजिस्‍ट्रेशन नहीं है.

इस आरटीआई के आधार पर यह तय हो गया है कि दैनिक जागरण प्रबंधन गलत तरीके से अखबार का संचालन काफी समय से बिहार में कर रहा है. मुजफ्फरपुर, भागलपुर समेत कई यूनिट पटना के आरएनआई नम्‍बर पर संचालित किए जा रहे हैं जो प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट् -1867 की धाराएं 8(बी), 14/15 के अनुसार सही नहीं है. इसी मामले में हिंदुस्‍तान पर बिहार में मुकदमा भी दर्ज हुआ है. पुलिस जांच में इन आरोपों को प्रथम दृष्‍टया सही भी पाया गया है. 

जागरण के फर्जीवाड़े का पोल तो इससे भी खुलता है कि अब तक जागरण मुजफ्फरपुर के प्रिंट लाइन में रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर BIHHIN/2000/3097 तथा ईमेल में patna@pat.jagran.com का प्रकाशन करता था, परन्‍तु 29 जून से रजिस्‍ट्रेशन नम्‍बर की जगह आवेदित, memo no- 101 dated 23/6/2012 कर दिया गया है, जिसका प्रकाशन अब भी किया जा रहा है. इसके अलावा पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर तथा सिलीगुडी से प्रकाशित और पटना से मुद्रित लिखा जाता था. परन्‍तु 29 जून से मुजफ्फरपुर में अखबार का प्रिंट लाइन चेंज हो गया है. ईमेल भी बदल कर muzaffrarpur@mzf.jagran.com कर दिया गया है. साथ ही अखबार का मुद्रण एवं प्रकाशन भी मुजफ्फरपुर ही लिखा जा रहा है. पहले सभी विवाद पटना कोर्ट में सुलझाए जाने की बात लिखी जा रही थी, अब इसे मुजफ्फरपुर कर दिया गया है.

प्रिंट लाइन में चेंज करके जागरण ने खुद साबित कर दिया है कि वे पिछले बारह सालों से अखबार का पटना के अलावा अन्‍य यूनिटों से अवैध प्रकाशन कर रहा है. रमन कुमार के प्रयास ने इस कथित नम्‍बर एक अखबार का असली चेहरा लोगों के सामने ला दिया है. अगर संबंधित इकाइयां इस मामले की इमानदारी से जांच-पड़ताल करती हैं तो अरबों का विज्ञापन घालमेल और घोटाला सामने आ सकता है. रमन कुमार कहते हैं कि वे जागरण के इस फर्जीवाड़े को अंजाम तक पहुंचा कर रहेंगे. जागरण भले ही रजिस्‍ट्रेशन के लिए अभी आवेदन कर अपने बचने की कोशिश शुरू कर दी हो, पर उसे पिछले बारह सालों का हिसाब तो देना ही होगा.

रमण कुमार ने पिछले दिनों पीसीआई टीम के सामने भी पूरे मामले की पोल खोली है. इसके बाद से जागरण प्रबंधन बदहवास तथा परेशान है. रजिस्‍ट्रेशन आवेदित करने से साफ है कि दैनिक जागरण भी पूरे बिहार में गलत तरीके से सरकारी तथा गैर सरकारी विज्ञापन वसूल रहा था. एक ही एडिशन के लिए अलग अलग रेट पर अब तक करोड़ों रुपये के घोटाला किए जाने का अनुमान लगाया जाने लगा है. यानी हिंदुस्‍तान की तरह जागरण ने भी गलत तरीके से अखबार का अवैध केंद्रों से प्रकाशन कर करोड़ों रुपये के सरकार विज्ञापन की हेराफेरी की है.

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