बिहार में राजद और माले के बीच गठबंधन!

Vinayak Vijeta : माले को मिलेगा फायदा पर राजद को उठानी पड़ सकती है क्षति… पूर्व सांसद शहाबुद्दीन भी तब कर सकतें हैं राजद से बगावत… माले के महासचिव दीपांकर भटचार्य इन दिनों राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद के पक्ष में बयान देकर जिस तरह से राजद के साथ माले की नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश कर रहें हैं वह राजद के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है। ऐसी चर्चा है कि माले राजद के साथ चुनावी गठबंधन चाहती है। अगर राजद के साथ माले का चुनावी गठबंधन होता है तो माले राजद से कम से कम तीन सीट की मांग कर सकती है। वह सीटें आरा, जहानाबाद व सिवान हो सकती हैं।

जहानाबाद और सिवान में राजद हमेशा दूसरे नंबर पर रहा है जबकि आरा सीट पर लोजपा प्रत्याशी ने पिछला चुनाव लड़ा था। अगर राजद माले से गठबंधन करता है तो यह राजद के लिए अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने के समान ही होगा। सिवान के पूर्व राजद सांसद शहाबुद्दीन माले से ही लड़ाई के कारण कई बार चुनाव जीते। माले के प्रत्याशी को पछाड़ने के लिए सवर्ण भी उन्हें वोट देते रहे। इसी तरह भोजपुर और जहानाबाद इलाके में भी सवर्णो की लड़ाइ्र माले से रहती है और सवर्ण जाति के मतदाता किसी किमत पर राजद गठबंधन वाले माले प्रत्याशी को स्वीकार नहीं करेंगे। भोजपुर में तो माले से ही चली लड़ाई में सवर्णों की रणवीर सेना की उत्पत्ति हुई। नीतीश कुमार और जदयू से खार खाए सवर्ण मतदाता किसी किमत पर राजद का माले से गठबंधन स्वीकार करने के मूड में दिखाई नहीं दे रहे। ऐसे मतदाता अभी राजद और भाजपा खेमें में बटें हैं अगर राजद का माले से गठबंधन होता है तो ऐसे मतदाताओं का रुख राजद से फिसलकर भाजपा की ओर मुड़ सकता है। ऐसी स्थिति में राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन भी राजद से नाता तोड़ सकते हैं।

गौरतलब है कि तमाम उम्र माले के साथ लड़ाई लड़ने वाले पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हीना शहाब को राजद ने पिछले लोकसभा चुनाव में सिवान से प्रत्याशी बनाया था। बताया जाता है कि पिछले दिनों जेल में शहाबुद्दीन से मिलने पहुंचे महाराजगंज के सांसद प्रभुनाथ सिंह से शहाबुद्दीन ने अपनी आपत्ति जता दी है। राजद अगर माले के साथ चुनावी गठबंधन भी करता है तो इसका फायदा माले को ही मिलेगा न कि राजद को। माले अपनी सभा या रैलियों में भीड़ भले ही जुटा लेती है पर उसके वोट बैंक में लगातार गिरावट ही आई है जिसका उदाहरण लोकसभा या विधानसभा में उसका एक भी सदस्य न होना है जबकि पूर्व के मुकाबले वर्तमान में राजद के वोट बैंक में अप्रत्याशित बृद्धि के संकेत हैं। माले में हालांकि सवर्ण जाति के भी कई दिग्गज नेता हैं पर वे ऐसे नेता हैं कि अपने गांव में भी सवर्णों का वोट माले को दिलाने की क्षमता नहीं रखते।

बिहार के पत्रकार विनायक विजेता के फेसबुक वॉल से.

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