बीईए को जी-जिंदल ब्लैकमेलिंग प्रकरण की इतनी देर बाद याद क्यों आई?

ज़ी न्यूज़ के एडिटर सुधीर चौधरी के लिए परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस वक्त सबसे बड़ी खबर आ रही है कि वो जिस BEA के ट्रेजरार थे, अब उसी BEA ने उनके खिलाफ जांच बैठा दी है। आज सुबह 12 बजे BEA की आपात बैठक न्यूज़ 24 के दफ्तर में बुलाई गई। सभी सदस्यों ने कहा कि इस घटना के बाद चुप्पी साधने का मतलब है खुद को कटघरे में खड़ा करना, लिहाज़ा इस पर फैसला लिया जाए।

कुछ सदस्यों ने टीवी के एडिटरों की इस बाडी से सुधीर चौधरी को निकालने की मांग भी की। बैठक के बाद ये फैसला किया गया कि सुधीर चौधरी पर पहले जांच बैठाई जाए और उसके बाद निकालने की कार्यवाही की जाए। इस घटना के बाद लगता है कि देश के टीवी एडीटरों को शायद इस बात का डर सताने लगा कि अब भी अगर कुछ नहीं किया गया तो पानी सिर के उपर चला जाएगा, लेकिन सवाल अब भी इस संस्था पर खड़े हो रहे हैं कि आखिर ये आपात बैठक अखबारों में खबर छपने के तीन दिन बाद क्यों बुलाई गई और सुधीर चौधरी पर कार्यवाही में इतने दिन क्यों लग रहे? देश की सरकार से बात-बात में जवाब मांगने वाली इस संस्था को अपने एक सदस्य पर कार्यवाही करने में इतनी हिचक क्यों हो रही थी?

सूत्रों के मुताबिक बैठक में सुधीर चौधरी की तरफदारी करने वाला कोई नहीं था। टीवी के सारे एडिटरों में सुधीर चौधरी की इस करतूत को लेकर गुस्सा था। हो भी क्यों ना, स्टिंग करने वाली बिरादरी का अगर खुद स्टिंग हो जाए तो गुस्सा तो आएगा ही। अब सवाल ज़ी न्यूज़ के प्रबंधन पर है कि सुधीर चौधरी को वो क्यों बचा रहा है, कहीं ऐसा तो नहीं सुधीर चौधरी यहां के मालिकों की जानकारी में ये सब कर रहे थे..? हालांकि सुधीर चौधरी के लिए ये नई बात नहीं है.. हां ज़ी न्यूज़ के लिए ये नई बात ज़रूर होगी.. खबरों को दिखाने की पहचान बना चुका चैनल आज खुद खबरों में है…।

ज़ी न्यूज़ वालों से मेरे केवल दो सवाल हैं…. पहला- सुभाष चन्द्रा चुप क्यों हैं.. और दूसरा- आखिर ज़ी न्यूज़ के कुछ सीनियर रिपोर्टर अपने एडीटर को बचाने के लिए जी जान से क्यों लगे हुए हैं….? आज मैं एक अफसर से मिला.. उसनें बताया कि आप लोग पत्रकारिता और समाज की बातें करते हैं और जब बात खुद आप के अपने लोगों पर आती है तो गलत आदमी की सिफारिश करने चले आते हैं… अभी मेरे पास ज़ी न्यूज़ का एक ऐसा सीनियर रिपोर्टर आया था जिसकी बातें आप टीवी पर सुन लें तो उससे बड़ा पत्रकार कोई नज़र नहीं आएगा… सुना है नोएडा के एक सेक्टर में उसका दो करोड़ का मकान भी है.. वो मेरे सामने सुधीर चौधरी को बचाने के लिए जुगाड़ करने की मिन्नत कर के गया है….

इस अफसर का व्यवहार देख कर मुझे जलालत महसूस हुई…..मैंने अपने एक दोस्त को फोन लगाया.. वो ज़ी न्यूज़ में ही काम करता है.. उसने जो बताया उसे सुनने के बाद तो मन करता है कि ये पेशा ही छोड़ दूं…। उसने कहा कि जब सुधीर चौधरी आए तो उन्होंने कहा कि किसी को नहीं छोड़ना है, आप लोगों पर कोई बंदिश नहीं है, सारी खबरें चलेंगी ..बड़े नेताओं और बड़ें लोगों के घपले को पकड़िए…उस ज़ी न्यूज़ के रिपोर्टर के मुताबिक उन्होंने कई स्टोरीज़ बड़ी करवा भी लीं लेकिन वो आज तक नहीं चलीं … जिंदल प्रकरण तो सिर्फ एक मामला है जिसमें सुधीर चौधरी फंस गए…. पता नहीं कितने मामले हैं जो पुलिस तक पहुंचे ही नहीं……

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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