Ujjwal Bhattacharya : एक तर्क आया है कि चूंकि मदन मोहन मालवीय हिंदू राष्ट्रवादी थे, इसलिये बीएचयू एक हिंदू राष्ट्रवादी संस्थान है. मैं किसी की ख़ुशी में खलल नहीं डालना चाहता हूं. लेकिन मालवीय जी हिंदू राष्ट्रवादी थे. कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठाता आशुतोष मुखर्जी व उनके बाद कुलपति बने उनके पुत्र श्यामाप्रसाद मुखर्जी हिंदू राष्ट्रवादी थे – क्या इसकी वजह से ये विश्वविद्यालय हिंदू राष्ट्रवाद के संस्थान बन जाते हैं?
इस संदर्भ में बीएचयू के शैक्षणिक परिवेश, वहां के पाठ्यक्रमों, वहां की छात्र राजनीति के वैचारिक द्वंद्वों से परिचित होना ज़रूरी हैं. यह विश्वविद्यालय शिक्षकों और छात्रों के स्तर पर समाजवादियों का गढ़ रहा है. कभी-कभी कम्युनिस्ट भी अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहे हैं. शिक्षकों के बीच कभी भी हिंदू राष्ट्रवाद पनप नहीं पाया, हालांकि अन्य विश्वविद्यालयों की तरह यहां भी संघ से जुड़े कुछ शिक्षक रहे हैं. विद्यार्थी परिषद बनने के बाद छात्र राजनीति में संघ का प्रभाव बढ़ा, लेकिन कभी भी वे समाजवादियों की तरह स्थाई रूप से अपनी छाप नहीं छोड़ पाये. शिक्षकों और छात्रों के स्तर पर वैचारिक विमर्श शुरू से ही समाजवादियों, गांधीवादियों और कम्युनिस्टों के बीच सीमित रहा. संघी तत्व हमेशा ही मुंह चुराते नज़र आये.
वरिष्ठ पत्रकार उज्जवल भट्टाचार्या के फेसबुक वॉल से.






