बीना शुक्ला की लड़ाई, भड़ास वालों की गिरफ्तारी और जागरण के बनिये मालिक

Yashwant Singh : दैनिक जागरण, कानपुर में कार्यरत रही एक महिला मीडियाकर्मी अपने यौन शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है. पुलिस, प्रशासन, कोर्ट हर जगह चक्कर काट रही हैं. पर आरोपी आज भी जागरण में बड़े ठाठ से नौकरी कर रहे हैं. महिला पर ही दबाव पड़ रहा है कि वह केस वापस ले ले, मुंह बंद रखे… पीड़िता महिला मीडियाकर्मी बीना शुक्ला (इन्हें अपना नाम सार्वजनिक होने से कोई आपत्ति नहीं है) ने आज एक टेप जारी किया है. इस टेप में जागरण के एक कर्मी, जो अहम गवाह है, से बातचीत है. बीना की लड़ाई को कोई मीडिया हाउस नहीं लड़ रहा क्योंकि आरोपी जागरण जैसे मीडिया हाउस में कार्यरत हैं और प्रबंधन से संरक्षित हैं… ऐसे में बीना ने फेसबुक, सोशल मीडिया के लोगों से अपील की है कि वे आगे आएं और उनके मसले को उठाएं…

दैनिक जागरण की इसी बीना शुक्ला यौन शोषण प्रकरण की खबर छापने के कारण दैनिक जागरण वालों ने मेरे पर और भड़ास के तत्कालीन कंटेंट एडिटर Anil Singh पर फर्जी मुकदमा कर दिया था और मेरे जेल जीवन को लंबा बढ़ा दिया था, यानि जमानत न होने देने का इंतजाम कर दिया. साथ ही कंटेंट एडिटर को भी उठवा कर जेल में डलवा दिया. फिर घर पर छापे डलवाए ताकि सब कोई इतना डर जाए, घबरा जाए कि फिर से मीडिया हाउस के खिलाफ खबर छापने के बारे में सोचने तक की हिम्मत न कर सके…

पर ये क्या.. ये भड़ास तो अब भी जारी है और निशिकांत ठाकुर से लेकर संजय गुप्ता तक की बैंड बजाई भी जारी है.. जाओ चोरों, अब किसी पेशेवर अपराधी को सुपारी दे देना हम भड़ासियों को निपटाने के लिए.. क्योंकि तुम जैसे डरपोक लोग सिवाय पुलिस-प्रशासन और अपराधियों की मदद लेने के अलावा कर भी क्या सकते हैं… क्योंकि तुम लोगों ने सिर्फ चोरी करना सीखा है और चोरी करने के रास्ते में जो रोड़ा बने उसे निपटा देने का तरीका जाना है…

पर ध्यान रखना… तुम लोगों को औकात में एक दिन सोशल मीडिया वाले ही लाएंगे क्योंकि अब मीडिया तुम लोगों की बपौती नहीं रह गई है.. मीडिया का विकेंद्रीकरण हो चुका है और अब सोशल मीडिया ही मॉस मीडिया बन चुका है.. तुम लोग अब सिर्फ और सिर्फ पेड व दलाल मीडिया बन गए हो… लगे रहो पैसे बटोरने और टर्न ओवर बढ़ाने में… जब तुम लोग अपने संस्थान की एक पीड़ित, यौन शोषित महिला को न्याय मिलने में रोड़े अटका सकते हो तो मुझे यकीन है कि पैसे के लिए तुम लोग एक दिन अपने घर की बहन-बेटियों की इज्जत सरेआम नीलाम करने से नहीं हिचकोगे… क्योंकि, बनियों के लिए किसी का मान-सम्मान, आत्मसम्मान और जीवन का मुद्दा कोई मसला नहीं होता.. उनका एक मुद्दा होता है.. ज्यादा से ज्यादा मुनाफा और ज्यादा से ज्यादा लूट… उम्मीद करते हैं फेसबुक के साथी इस प्रकरण को आगे बढ़ाएंगे और बीना शुक्ला को न्याय दिलाने में मदद करेंगे… मूल खबर ये है…

http://bhadas4media.com/print/17660-2014-02-05-08-48-04.html
जागरण में यौन शोषण की शिकार महिला मीडियाकर्मी ने जारी किया टेप (सुनें)

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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