‘बुक्‍स ओ सांसद’ में जुटे दिग्‍गज सांसद व पत्रकार

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में बुधवार की शाम आयोजित कार्यक्रम 'बुक्स ओ सांसद' के दौरान जनोक्ति.कॉम द्वारा कराई गयी परिचर्चा में कई दिग्गज पत्रकार और नामी सांसद शामिल हुए। कार्यक्रम में वरिष्ठ संसद लालकृष्णा आडवाणी, सतपाल महाराज, शशि थरूर, केन्द्रीय मंत्री केबी थॉमस, केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉक्टर राज कुमार वेरका, मंगनि लाल मंडल, तरुण मंडल, वीरेंदर कश्यप, राजेंद्र भाई राणा, असरारुल हक, मोइनुल हसन, अनु टंडन, गोपाल व्यास, चौधरी लाल सिंह, अनिरुध्द संपत, एन के सिंह सहित पचास से अधिक सांसद  शामिल हुए।

दृष्टि क्रिएटिव के कार्य्रक्रम में सांसदों द्वारा लिखी गयी किताबों की प्रदर्शनी भी लगाई गयी थी। आयोजकों के अनुसार पिछले कुछ समय में सांसदों के प्रति आम जनमानस में नकारात्मक भाव पैदा हुआ है। राजनीति और राजनेताओं को एक ही डंडे से हांकने की कवायद में संसद का बौद्धिक और रचनात्मक पक्ष पीछे छूट रहा है। ऐसे वातावरण में ‘बुक्स ओ सांसद‘ कार्यक्रम के माध्यम से हमने जनप्रतिनिधियों के सकारात्मक पक्ष को देश-दुनिया के सामने लाने की पहल की है।

भारत की संसद (राज्य सभा/लोक सभा) में मौजूद विभिन्न संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित, मनोनीत संसद सदस्य केवल राजनीति के जानकार भर नहीं है। राजनीति से इतर सामाजिक जीवन के अन्य दूसरी विधाओं में भी सांसदों की दखल है। एक ऐसी ही विधा का नाम है पुस्तक लेखन और इस विधा में वर्तमान संसद में मौजूद 15 फीसदी भारतीय सांसदों की न केवल दिलचस्पी है, बल्कि उन्होंने विविध विषयों पर किताबें लिखी भी है। धर्म, अध्यात्म, विज्ञान, इतिहास, दर्शन, साहित्य, कथा, कविता, अनुभव, यात्रा वृतांत, राजनीति, अर्थनीति जैसे दर्जनों विषयों पर केन्द्रित सांसदों के पुस्तकों की सामूहिक, सार्वजनिक प्रदर्शनी के द्वारा आम लोगों में यह सन्देश देने की कोशिश की गयी है कि संसद में बहुत बड़ा वर्ग बौद्धिक है।

जनोक्ति डॉट कॉम द्वारा ‘संसद और मीडिया : जबाबदेही व अपेक्षाएं‘ विषय पर आयोजित परिचर्चा में एलके आडवाणी, राजीव मिश्र (लोकसभा टीवी), अनुरंजन झा (वरिष्ठ पत्रकार), मंगनीलाल मंडल (संसद), सतपाल महाराज (सांसद), गोपाल अग्रवाल (आर्थिक प्रकोष्ठ भाजपा के संयोजक), निसार अहमद (आईसीएसआई के अध्यक्ष) समेत कई दिग्गज वक्ताओं ने अपनी-अपनी बात रखी। सभी ने एक स्वर में सांसद और मीडिया को अपनी जवाबदेही समझने और उस पर अमल करने की बात कही। 

'बुक्स ओ संसद’ के आयोजन में दृष्टि के कुंदन कुमार झा, जनोक्ति के जयराम विप्लव, अमिताभ भूषण और विशाल तिवारी, अनुरंजन झा, वंदन सिंह, अनित सिंह, भवेश नंदन झा, के अरविन्द, संतोष कुमार, अनिमेष आनंद, सोनू मिश्रा आदि सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। 

 

 

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