ऐसा क्या बिहार में ही होना था और वह भी बेगूसराय में! राज्य सरकार, केंद्र सरकार द्वारा सम्मानित और देश के उभरते हुए रंग निर्देशक प्रवीण कुमार गुंजन को बिहार पुलिस के एक निर्मम दारोगा और उसके साथियों ने इसलिये बेरहमी से पीटा क्योंकि उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी, क्योंकि उन्होंने यह बताने की कोशिश की वे एक रंगकर्मी है, क्योंकि उन्होंने पुलिस अधिकारी को कहा कि आप इसकी ताइद अपने आला आधिकारियों से कर सकते हैं। बहरी पुलिस ने तब तक पीटा जब तक वे अस्पताल जाने लायक नहीं हो गये, बिना किसी आपराधिक रिकार्ड के हाजत में रखा…
सोचिये बिहार सरकार जिसको सम्मानित करती है उसके अधिकारी उसे अपमानित करते हैं, सोचिये कि आम नागरिक किस दहशत में रहते हैं, सोचिये कि बिहार के पुलिस अधिकारी के लिये एक रंगकर्मी की हैसियत नचनिये बजनिये से अधिक नही हैं। यह लिखते हुए अपने आप को संयत रखना कठिन है।
यह सिर्फ़ उस पुलिस अधिकारी की बर्खास्तगी या निलंबन का मामला नहीं है. यह आम जनता के प्रति पुलिस के आपराधिक रवैये का मामला है. अपराधियों को पकड़ने में विफल निकम्मी पुलिस अपनी कुंठा इस तरह निकालती है। हस्पताल में पड़े गुंजन के साथ खड़े हों न हों पुलिस के इस रवैये के खिलाफ़ जरूर खड़े हों…
बिहार के युवा रंगकर्मी-लेखक अमितेश की रिपोर्ट.






