बेनी का बयान मुलायम की दुश्मनी में या दोस्ती में!

: बरेलवी और शिया समुदाय में चर्चा का विषय : बाराबंकी। कभी मुलायम-बेनी की दोस्ती ऐसी थी कि समाजवादी पार्टी बन गयी, बीजेपी की दोस्ती में सपा सरकार बन गयी। अब बेनी कांग्रेस में और कांग्रेस मुलायम के सहारे। इन हालात में बेनी का बयान मुलायम आतंकवादियों के सरंक्षक। सपा का विरोध चर्चा का विषय बन गया। अंदर ही अंदर उठा-पटक होने लगी। कांग्रेस भी अपना फायदा तलाशने में जुट गयी।

‘‘कौन सी बात कहां, कैसे कही जाती है, ये सलीका हो, तो हर बात सुनी जाती है।’’ मशहूर शायर वसीम बरेलवी का शेर सुनकर शायद इस्पात मंत्री बेनी वर्मा हर वक्त कुछ न कुछ ऐसे बोलते हैं कि मीडिया हाथो-हाथ लेती है। कहीं निन्दा होती है तो कहीं उनके चाहने वाले हंस-हंस करके तारीफ करते नजर आते हैं। उस पर चिंतन-मंथन भी शुरू हो जाता है। बेनी ने पहले भी ऐसे-ऐसे बयान दिये जो चर्चा में रहे। जैसे मुसलमान होने के कारण अफजल को फांसी की सजा दी गयी जबकि उसे उम्रकैद की सजा होनी चाहिए। मैं निजी तोर पर फांसी की सजा के खिलाफ हूं। वहीं अन्ना हजारे के आन्दोलन पर बोले कि अन्ना हजारे का शनीचर उतर गया है, वो बाबा रामदेव पर चढ़ गया है। ये बेकार के लोग हैं। गांधी परिवार की हमदर्दी में बोले कि गांधी परिवार के लोग सीएम बनने के लिए नहीं बल्कि पीएम बनने के लिए पैदा हुए हैं। मुलायम से जान का खतरा बता करा जेड प्लस की सुरक्षा भी पा गए। मुलायम भी बेनी के बयान पर हमेशा मुस्कराते ओर टाल जाते रहे। लेकिन अब मुलायम आतंकवादियों के संरक्षक हैं, के बयान पर जलबला गये। सारे देश ने देखा कैबिनेट से बर्खास्त करने की मांग मुलायम खुद कर बैठे। इस उठा-पटक के बीच जो सियासी गर्मिया आवाम में पहुंची तो यहां का पारा भी गरम होने लगा।

मालूम हो कि मुसलमानों में तीन फिरके देवबन्दी, बरेलवी, शिया हैं, जिनमें देवबंदी, ताजियादारी के खिलाफ होते हैं। इसके चलते वह बरेलवी और शियो की मुखालिफत करते हैं। पाकिस्तान में तो मस्जिदों में और मजलिसों में बम और गोली चलाकर शियों की हत्या करना एक आम बात हो गयी। चूंकि देवबंदी या वहाबी फिरका संख्या में कम होता है और सऊदी अरब या इजरायल से आने वाली इमदाद से पूरे देश में जमात चलाकर यह पैगाम देता है कि सिर्फ ईश्वर की इबादत करो और ईश्वर तक पहुंचाने वाले का नाम लेने से बचो। इसी को लेकर देवबंदियों का बरेलवियों व शिया समुदाय में मतभेद रहता है।

उत्तर-प्रदेश समेत देश के कई प्रदेशों में मुसलमान ज्यादातर बरेलवी ख्यालात का वा ताज़ियादार है। मुस्लिम वोटरों में भी बरेलवी वा शिया समुदाय की संख्या 75 प्रतिशत मानी जाती है। देवबंदी जमात के लिए बरेलवियों का इस्तेमाल करते हैं, उनके घर में 40 दिन का राशन और खर्चा देकर तब्लीग के बहाने ले जाते हैं। बरेलवी समुदाय के लोग अपनी माली हालात से घर का खर्चा नमाज पढ़ने और तब्लीग पर मिलने से जाने के एवज में पाने पर साल के 10 महीनें तब्लीग में रहते हैं। लेकिन मोहरर्म आते ही ताजिया रखकर इमाम हुसैन अ0 की शहादत का गम मनाना नहीं चूकते इस पर देवबंदी/वहाबी समुदाय नाराज होता है, इसको र्शिक बिदअत बताता हैं और गुस्सा जाता हैं। कई जगह देवबंदी बरेलवियों व शियों पर हमला कर जान ले लेते हैं।

ऐसा पिछले दिनों सिटी स्टेशन क पास मोहल्ला वजीरगंज लखनऊ में भी हुआ। वाक्या काफी सुर्खियों में रहा। जिसमें एक मजलिस के दौरान कुछ लोगों ने गोलियों चलाकर दो लोगों को मौत की आगोश में सुला दिया और दर्जनों लोगों को जख्मी किया। कुछ पकड़े गये बाद में छोड़ दिये गये। इस पर मौलाना कल्बे जवाद नकवी और मौलाना अबुल हसन फिरंगी महली समेत कई मौलानाओं ने प्रेस वार्ता कर कहा था कि यह आतंकी हमला था और इमामे हरम, जो पिछले दिनों आये थे, ने 400 करोड़ असलहा खरीदने के लिए दिया था। इसकी जांच एटीएफ से करायी जानी चाहिए।

यह बात चल ही रही थी कि पिछले रविवार को सिटी स्टेशन के पास रिफाहे आम क्लब पर जमाते इस्लामी हिन्दी के जलसे में गोली चलानें वालों के समर्थन में आवाज उठी। मुलायम सिंह यादव भी पहुंचे, बयान दिया जिसने आग में घी डालने का काम किया। प्रतापगढ़ में सीओ जियाउल हक की हत्या, मौलाना बुखारी का सपा से दामन छुड़ाना, देवबंदी मुसलमानों को सपा में तरजीह मिलने, बरेलवी व शिया समुदाय को नजरअंदाज करने व उनकी नुमाइन्दगी का मामला ही अंदर ही अंदर गरम चल ही रहा था कि बेनी के इस बयान ने तहलका मचा दिया। संसद में जो बवाल हुआ उसको सबने देखा लेकिन मुसलमानों खासकर बरेलियों वा शिया समुदाय में इस बात की बच्चे-बच्चे जुबान पर चर्चा है कि हमारी बात को बेनी ने कह दिया।

वहीं दूसरी तरफ गोण्डा संसदीय इलाके में भी बरेलवी वा शिया समुदाय का बोलबाला है। वो बेनी के बयान से खुश हैं। यहीं हाल बाराबंकी में भी है बेनी के बयान पर मुसलमानों में इस बात की चर्चा है कि मुलायम सिंह यादव अब सिर्फ देवबंदी मुसलमानों को तरजीह दे रहे हैं। बरेलवी व शिया मुसलमानों को नजर अंदाज कर रहे हैं जबकि वहीं इनका वोटर है और सच्चर कमेटी में भी इन्हीं मुसलमानों के हालात का तजकिरा है। अब अगर मुलायम इस बात को समझेंगे तो चुनाव के मद्देनजर उनके हालात पर और सरकार की नुमाइंदगी पर गौर करेंगे। नहीं तो समाजवादी पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।

वहीं कांग्रेस के फूलों में भी मुरझाहट की जगह ताजगी आने लगी है। चर्चा यह भी है कि बेनी मुलायम से अन्दर ही अंदर बेहद मोहब्बत करते हैं। एक कांग्रेसी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब साक्षी महराज व कल्याण सिंह, जो बाबरी मस्जिद गिराने में थे, सपा में आ सकते है तो बेनी का रास्ता तो बंद होने का सवाल ही नहीं। लेकिन सपा का वोटर खासकर मुसलमान मुलायम से दूरी न करे इसके पीछे बेनी से मोहब्बत करने वाले सपा के ही कुछ लोगों का कहना है कि जो आतंक फहलाये वह आतंकवादी है। चूंकि कई आतंकवादी जेल में बंद है उनको छुड़ाने की बात मुलायम सिंह कर रहे हैं। उनके लिए आयोजित मंच पर बैठे रहे। आतंकियों की हरकतों पर लगाम लगाने की बजाये उनको जेल से छुड़ाने का दावा कर रहे हैं। जबकि कई बेकसूर अभी भी अपने हालात के बिना पर जेल में हैं। जिनको छुड़ाने के लिए कोई बात नहीं होती। इस बात को लेकर आमजन में चर्चा का होना लाजमी है। वहीं देवबंदी मुसलमानों से मोहब्बत के चलते बरेलवी और शिया समुदाय में सरकार से निराशा पनपने लगी थी। उनका ध्यान इधर देने के लिए बेनी ने ऐसा बयान दिया है। कांग्रेस खेमे में इस बात की खुशी दिख रही है कि बरेलवी व शिया समुदाय आतंकवादियों से हमेशा नफरत करता है और इनको संरक्षण देने व मदद करने वालों से भी अंदर ही अंदर नफरत करता है। अब बेनी के बयान के बाद दूध का दूध पानी का पानी हो गया है। सपा से नाराजगी का फायदा बीजेपी को तो मिलेगा नहीं, हां कांग्रेस को जरूर मिलेगा। बहरहाल बेनी का कांग्रेस के लिए बवालेजान बना बयान मुलायम की दुश्मनी में निशाना मोहब्बत का था या नफरत का यह आने वाला वक्त बतायेगा।

बाराबंकी से रिजवान मुस्‍तफा की रिपोर्ट.

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