बेशर्मी : महेंद्र मोहन के जुगाड़ के लिए अपने पत्रकार की बेइज्‍जती सह लेगा जागरण

: उन्‍नाव में सपा विधायक के भाई ने किया था हमला : खुद को नम्‍बर एक बताने वाले अखबार दैनिक जागरण का प्रबंधन बहुत खुदगर्ज है. अपने फायदे के लिए वो कुछ भी कर सकता है. उन्‍नाव में अखबार के रिपोर्टर के साथ नवनिर्वाचित सपा विधायक के भाई ने मारपीट की, उसे घंटों बंधक बनाए रखा फिर भी जागरण प्रबंधन ने अपने पत्रकार के हक में एक आवाज तक नहीं उठाई. सबसे शर्मनाक तो यह रहा कि इस मामले को उसने अखबार तक में जगह नहीं दी. बनियागिरी करने वाले इस अखबार पर थू-थू हो रही है.

खबर तो यहां तक है कि बेशर्मी दिखाते हुए प्रबंधन ने पत्रकार को भी एफआईआर करने से मना कर दिया है. उल्‍लेखनीय है कि दैनिक जागरण के पत्रकार अमित मिश्रा को सपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का भाई मनोज सेंगर ने अपने साथियों के साथ मिलकर बीते सात मार्च को एसपी कार्यालय के पास मारा-पीटा तथा घंटों बंधक बनाए रखा. बाद में हिंदुस्‍तान के एक पत्रकार के सहयोग से अमित को छोड़ा गया. इस मामले का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि जागरण का भी पत्रकार अपने साथी के पक्ष में खुलकर सामने नहीं आया.

घटना के एक सप्‍ताह बीतने के बाद भी अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. दूसरे अखबारों के पत्रकारों ने जब इस मामले को स्‍थानीय स्‍तर पर उठाकर विरोध करने की बात की तो जागरण के लोगों ने दिलचस्‍पी नहीं दिखाई तथा इस विवाद को बढ़ाने से इनकार कर दिया. इस बारे में जब भुक्‍तभोगी पत्रकार अमित मिश्रा से उनकी मन:स्थिति जानने के लिए फोन किया गया तो उन्‍होंने कहा कि इस घटना से मैं बहुत आहत हूं परन्‍तु यह मामला संस्‍थान के वरिष्‍ठ लोगों तक पहुंच गया है. इस बारे में वे लोग ही निर्णय लेंगे. उन्‍होंने इससे ज्‍यादा कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

इस संदर्भ में जब दैनिक जागरण, उन्‍नाव के ब्‍यूरोचीफ राजेश शुक्‍ला से बात की गई तथा इस मामले में उनके स्‍तर पर लिए गए कार्रवाईयों के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने कहा कि हमने सारे प्रकरण से कानपुर के वरिष्‍ठ लोगों को अवगत करा दिया है. इस मामले में प्रबंधन ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को अवगत करा दिया है. बताया जा रहा है कि बेशर्म जागरण प्रबंधन इस मामले में अपने स्‍वार्थों के कारण पर्दा डालने पर लगा हुआ है ताकि सपा से उनके संबंध खराब ना हो.

मुलायम सिंह के एक कार्यकाल में हल्‍ला बोल झेल चुके इस अखबार में सपाइयों का दमदार विरोध करने के बजाय हथियार डाल दिया था. बाद में रंग बदलते हुए महेंद्र मोहन गुप्‍त सपा से राज्‍य सभा भी पहुंच गए. बताया जा रहा है कि जल्‍द ही यूपी में राज्‍य सभा की दस सीटों पर चुने गए सांसदों का कार्यकाल खतम होने जा रहा है, उसमें महेंद्र मोहन भी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि महेंद्र मोहन एक बार फिर राज्‍यसभा पहुंचने की जुगाड़ में लगे हुए हैं. इसके चलते ही इस मामले को तूल नहीं देने का आदेश मैनेजमेंट ने सुना दिया है.

अब उनके संस्‍थान में अखबार के लिए काम करने वाला पत्रकार मारा जाए या पीटा जाए या दुत्‍कारा जाए या उसको बेइज्‍जत किया जाए, दैनिक जागरण सपा के खिलाफ कुछ भी नहीं बोलेगा. कम से कम राज्‍यसभा चुनाव सम्‍पन्‍न होने तक तो अखबार सपा की चम्‍मचागिरी करने के अलावा कुछ भी नहीं करेगा. कुछ महीने पहले कानपुर में ही अपने बनियागिरी के इन्‍हीं आदतों के चलते डीआईजी से पंगा लेकर बदनाम हो चुके जागरण प्रबंधन में अब सत्‍ता से पंगा लेने की हिम्‍मत नहीं बची है. बेइज्‍जती सहना ही शायद इस संस्‍थान और संस्‍थान के पत्रकारों की नियति बन चुकी है. 

उल्‍लेखनीय है कि एक मामले से खफा होने के बाद जागरण, कानपुर के तमाम वरिष्‍ठ लोगों ने डीआईजी प्रेम प्रकाश के खिलाफ अपनी पूरी ताकत लगा दी, परन्‍तु उनका कुछ भी बिगाड़ नहीं पाए. उनका तबादला तक नहीं करा पाए. जब अखबार का उच्‍च प्रबंधन अपनी इज्‍जत नहीं बचा पाया तो फिर सच ये भी है कि वो अपने एक पत्रकार की इज्‍जत के लिए क्‍योंकर किसी से भिड़ेगा. खासकर उससे जिससे उनके मालिकों को लाभ मिलने वाला है. बनियों के इस अखबार में अब लोक के लिए बस तंत्र के लिए ही जगह बच गया है. जो अखबार अपने पत्रकार की लड़ाई को आवाज नहीं दे सकता वो जनता के संघर्षों को कितना आवाज देगा, आसानी से समझा जा सकता है.

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