ब्रितानी के बाद अमेरिकी एंकर ने की देश की बेइज्‍जती, भारत ने जताई आपत्ति

वॉशिंगटन। अमेरिका में एक टीवी शो के होस्ट की सिखों के धार्मिक स्थल श्री दरबार साहिब यानी स्वर्ण मंदिर के बारे में अपमानजनक टिप्पणी को लेकर विवाद हो गया है। इस 'शरारती ' होस्ट ने अपने कार्यक्रम के दौरान इस पवित्र स्थल को रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार की 'ऐशगाह' कह डाला। अमेरिका की यात्रा पर गए प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

चर्चित अमेरिकी टीवी शो 'द टुनाइट शो विद जेय लिनो' के होस्ट जेय लिनो ने शो के दौरान दरबार साहिब के खिलाफ यह टिप्पणी कर डाली। शो में स्वर्ण मंदिर की दमकती तस्वीर दिखाई गई और इसे रिपब्लिकन पार्टी की ओर से प्रेजिडेंट पद की दौड़ में शामिल मिट रोमनी का संभावित 'समर होम' बताया गया। रोमनी इन दिनों अपनी अकूत संपत्ति और टैक्स चोरी को लेकर विरोधियों के निशाने पर हैं। शो में दरबार साहिब को एक अमीर की ऐशगाह बताकर की गई इस आपत्तिजनक टिप्पणी से सिखों में आक्रोश है। सिखों ने इसके खिलाफ अमेरिका में बड़ी तादाद में प्रदर्शन भी किया। इसके अलावा टीवी चैनल एनबीसी के न्यू यॉर्क स्थित दफ्तरों पर प्रदर्शन का एलान किया गया है।

लिनो पहले भी कर चुके हैं ऐसा : जेय लिनो ने सिखों के खिलाफ पहली बार आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है। 2007 में उन्होंने सिखों को 'डायपर हेड्स' कह डाला था। इसके बाद 2010 में उन्होंने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि ओबामा को अपने भारत दौरे के दौरान दरबार साहिब नहीं जाना चाहिए, क्योंकि वहां उनको पगड़ी पहननी पड़ेगी। भाई हरजोत सिंह खालसा ने इसके खिलाफ एक ऑनलाइन कैंपेन भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सिखों के बारे में इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी कर अमेरिकी कानूनों को तोड़ा गया है।

भारत ने जताया विरोध : अमेरिका की यात्रा पर आए प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि ने रविवार को इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्होंने अमेरिका में नियुक्त भारत की राजदूत निरुपमा राव को अमेरिकी विदेश विभाग के सामने इस मामले को उठाने का निर्देश दिया है। रवि ने भारतीय संवाददाताओं से कहा, 'यह दुर्भाज्ञपूर्ण और आपत्तिजनक है कि स्वर्ण मंदिर को दिखाने के बाद इस तरह की टिप्पणी की गई।'

रवि ने कहा, 'स्वर्ण मंदिर सिख समुदाय का सबसे पवित्र स्थान है। यहां तक कि हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी नववर्ष के मौके पर वहां प्रार्थना करने गए थे। मेरा मानना है कि जिस व्यक्ति ने इसे दिखाया, वह इसके बारे में अनजान नहीं था। अमेरिकी सरकार को भी इस तरह की चीज पर विचार करना चाहिए।' (एजेंसी)

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