भगवान को यार व मीडिया को गद्दार बताने वाला आसाराम

भगवान को यार व मीडिया को गद्दार बताने वाले आसाराम अब बैकुंठधाम में है। लेकिन प्रश्न यह है कि यार बड़ा होता है या गद्दार ? क्योंकि मीडिया ने उनके बारे में लगातार कवरेज किया और दिन रात एक कर प्रशासन पर ऐसा दबाब बनाया कि पुलिस उन्हें एक आम आदमी जैसे गिरफ्तार कर जेल ले गई। अब शायद उन्हें समझ में आ गया होगा कि जो जैसा करेगा वैसा भरेगा।

मीडिया को गद्दार या भोकने वाला कुत्ता कहने से सच्चाई बदल नहीं जाती। रही बात भगवान को यार कहने की तो किसी को यार कहने से पाप का घड़ा कम नहीं हो जाता है। जब आसाराम इतने नेक है तो उन्हें मीडिया से मुंह छुपाने की क्या जरूरत। सवालों के जवाब से क्यों बचते है मतलब साफ है कि यदि आप किसी से आंख मिलाकर बात नहीं कर पा रहे है तो आपमें खोट है।

अज्ञानता का प्रदर्शन  

वैसे आसाराम अपनी हरकतों से यह सिद्ध कर देते है आदमी कितना भी बड़ा क्यों ना हो जाए लेकिन यदि उसकी शिक्षा दीक्षा कम हुई है तो वह जगह-जगह पर अपनी अज्ञानता पेश करता है। आसाराम के ऐसे कई उदाहरण है जैसे वह हेलीकाप्टर दुर्घटना के समय खुद को भगवान बता बैठे, अपनी विद्या द्वारा अपना उम्र कम करने का दावा करना, सत्य साईं को अपना मित्र बताना आदि ऐसे कई उदाहरण है जो सुनने वाले को ही अजीब लगे लेकिन बाबाओं के इस देश में बाबा कुछ भी बोल जाए सब सही है।

खुद को भगवान बताते थे

8 वीं फेल आसाराम के पास जब कोई मीडिया वाला जाता तो उसके सामने भी भगवान बनते है उस संवाददाता को अपने चरणों में बैठाकर इन्टरव्यू देने की बात करते। शायद मीडिया के सामने अपनी औकात दिखाना चाहते थे।
खैर जेल जाने के बाद अब उनके लिए यार और गद्दार की परिभाषा भी बदल गई होगी। मीडिया अपनी जगह है लेकिन उनसे आंख चुराने वाले आसाराम की अब हकीकत सामने आ गई है।

उनके लिए यह कविता फिट होती है

एक बहुत था सत्संगी भाई।
जिसकी ज्यादा थी न कमाई।।

रूखी सूखी रोटी खाता।
दुख से अपना समय बिताता।।

पर किस्मत ने पलटा खाना।
सत्संगी के घर धन आया।।

उसने गुर्गे पाले अनेक।
साधू जैसे जिनके भेष।।

जो हर सत्संग से चाजू लाते।
जिनसे बापू ध्यान लगाते।।

एक ख्याल सत्संगी को आया,
क्यों न हजम कर सब चूजे जाऊ।
सारी जवानी एक साथ बिताऊ।।

लेकिन एक चूजा बना गले की फास,
हजम ना कर पाया उसकी आग।
जिससे जलकर पूरा सत्संग हुआ खाक।

महेश्वरी प्रसाद मिश्र

पत्रकार

maheshwari_mishra@yahoo.com

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