भड़ास ने ही पत्रकारों के घाव पर मरहम लगाया

यशवंतजी, सबसे पहले आपको कांटों की डगर पर अनवरत चार साल तक चलते रहने के लिए बधाई…। मेरी शुभकामना भी है कि आगे भी ‘भड़ास’ इसी तरह पत्रकारों का भड़ास निकालने में मदद करती रहेगी। ‘भड़ास4मीडिया’ का नियमित पाठक होने के नाते मुझे समझ में आता है कि जिस तरह पत्रकार, अपनी पत्रकारिता धर्म का निर्वहन करता है और लोगों की समस्याओं व उनके दर्द को सामने लाता है, मगर अपनी ही कसक को पत्रकार छुपाए बैठे रहते हैं। ऐसे हालात में अपना दर्द बयां करने का एक बड़ा माध्यम ‘भड़ास4मीडिया’ के रूप में मिला।

निश्चित ही पत्रकारिता जगत में भड़ास से ‘भड़ास’ निकलने के कारण मीडिया हाऊसों में खलमली मची रही। अभी भी यही हाल है, वह इस बात से समझ में आता है कि कई मीडिया हाऊस ने ‘भड़ास4मीडिया’ की इंटरनेट साइट पर दफ्तर में खोले जाने को लेकर बैन लगा दी थी। हालांकि ‘भड़ास4मीडिया’ को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और पत्रकारों की आशाओं को समझने के कारण साइट को पत्रकारों ने सिर-आंखों पर बिठाया। मुझे आशा है कि जो रफ्तार भड़ास ने बनाई है, वह आगे भी कायम रहेगी।

भड़ास4मीडिया के समक्ष जब भी किसी पत्रकार ने अपनी समस्या रखी, उसे पूरी बेबाकी के साथ रखा गया। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है कि पत्रकारों के अपनी समस्या बताने का बड़ा मंच मिल गया। हम अधिकतर कहते हैं कि पत्रकार, दूसरों को अधिकार दिलाने के जागरूक रहते हैं और नौकरशाहों से भी खिलाफत करने उतर पड़ते हैं, मगर जब जिस मीडिया हाऊस में कार्य कर रहे होते हैं, वहां पत्रकारों के साथ शोषण की बात होती है तो अधिकतर पीछे हट जाते हैं। इसका कारण भी है, पहला, अकेले चना भाड़ नहीं फोड़ सकता और दूसरा, विरोध करने पर नौकरी हाथ से जाने का डर रहता है। इसके अलावा और भी कारण गिनाए जा सकते हैं, जिससे हमेशा आवाज बुलंद करने वाले पत्रकारों की भी मुंह बंद रहता है, किन्तु ‘भड़ास4मीडिया’ ने पत्रकारों के हितों को समझा और उन्हें खुले मंच पर रखने कभी कोताही नहीं बरती। एक बार ‘भड़ास4मीडिया’ टीम को साधुवाद… इसी तरह प्रगति पथ पर आगे बढ़ते रहें और पत्रकारों की जायज लड़ाई में सहभागी बनते रहें।

राजकुमार साहू

पत्रकार

जांजगीर ( छत्तीसगढ़ )

मोबा – 074897-57134, 098934-94714


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