भला हो नए कानून का, जरा सी नीयत खराब करो और जेल में जाओ

Manika Mohini : एक बार मेरे ड्राइवर ने मेरे शोरूम में काम करने वाली एक लड़की के साथ कुछ बदतमीज़ी की. वह लड़की फूट-फूट कर रो रही थी. मुश्किल से उसने बताया कि ड्राइवर ने उसके साथ अश्लील हरकत करने की कोशिश की. मेरे पूछने पर ड्राइवर बोला, 'नहीं मैडम, असल में इसने मुझसे दो हज़ार रूपए माँगे। मैंने मना किया तो मुझ पर झूठा इलज़ाम लगा रही है.' मुझे पता था कि ड्राइवर झूठ बोल रहा है. मैंने पुलिस में रिपोर्ट करने की बात की तो लड़की ने मना कर दिया कि फ़िज़ूल में बदनामी होगी।

मैंने ड्राइवर को तभी नौकरी से निकाल दिया। ऐसी शिकायत होने पर एक और हथकंडा लड़के अपनाते रहे हैं कि 'जी, यह लड़की मुझसे यौन सम्बन्ध बनाना चाहती है, मैं बेचारा शरीफ, मना किया तो मुझे फंसा रही है.' भला हो नए क़ानून का कि अब ये हथकंडे किसी काम के नहीं रहे. बस, ज़रा सी नीयत खराब करो और जेल में जाओ. लेकिन कितनी लड़कियों में हिम्मत है ऐसे बेशर्मों को जेल भेजने की? कितने केसों में पुलिस तुरंत कार्यवाई करती है? हाई प्रोफाइल मामलों को छोड़ दीजिए, आम आदमी की सुनवाई कहाँ है?

मोनिका मोहिनी के फेसबुक वॉल से.

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