भाई कुछ भी कहिये, इसे कहते हैं कमबैक, जो पीछे रहे गए वो सुधीर चौधरी को गरिया रहे हैं..

Ankur Vijaivargiya : भाई कुछ भी कहिये…इसे कहते हैं कमबैक…जो पीछे रहे गए वो सुधीर चौधरी को गरिया रहे हैं…NDTV वाले रवीश, अभिज्ञान और क्रांति संभव बस स्टूडियों में बैठकर ज्ञान पेलते ही रह गए…कई लोग कह रहे हैं कि सुधीर को देखने का मन नहीं कर रहा… अरे भई मत देखो…तुम्हारे ना देखने से कौनसा किसी को फर्क पड़ रहा है…जेल तो कई पत्रकार गए हैं…सुधीर तो अपने मालिक के लिए रंगदारी मांगने के चलते गए..कुछ तो अपनी करनी से पहुंचे…लोग कह रहे थे कि सुधीर चौधरी का कैरियर गर्त में गया…लेकिन गर्त में पहुंचकर ऐसी शानदार वापसी और शानदार साक्षात्कार के लिए सुधीर चौधरी को बधाई और जी न्यूज की पूरी टीम को भी…

Vikram Singh Chauhan : जी न्यूज़ के उपर तलवार लटक रहा है ..!! सरकार ने इस चैनल के उपर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है ..जी न्यूज़ का लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश भी कुछ लोगों ( ??? ) ने की है .. जिंदल के साथ कथित 100 करोड़ के समझौते को लेकर अपने मीडिया बिरादरी और देश भर में आलोचना सह रहे इस चैनल ने हिम्मत दिखाकर देश में पत्रकारिता के नए मानदंड स्थापित किये है ..बलात्कार का शिकार हुई लड़की के मित्र का दिल को झकझोर देने वाला इंटरव्यू दिखाकर चैनल ने सिस्टम, समाज, पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है ..लड़की को लेकर बनी रहस्यमय स्थिति अब साफ हो गई है ..और ये होना भी चाहिए था ..!!  मीडिया को लेकर मेरे मन में बिलकुल भी सम्मान नहीं बचा है लेकिन इस मामले में मैं पूरी तरह जी न्यूज़ के साथ हूँ ….देश में पुलिस के ये किस थाने का मामला है …? ये तय करने में ही कई जाने गई है ..!! इस खुलासे से "बनावटी समाज" और "दबंग पुलिस" पूरी पूरी तरह वस्त्रविहीन हो गई है ..!! अब अगर सरकार जी न्यूज़ पर नकेल कसती है तो ये दुर्भाग्यपूर्ण होगा ..क्योकि परत दर परत और टुकडों में बीबीसी से लेकर सभी न्यूज़ चैनल और प्रिंट मीडिया ने पीड़िता की पहचान जारी की है ..इसलिए सरकार अगर कार्रवाई करती है तो सभी पर करे ..लेकिन उसमे हिम्मत नहीं है ..!! इसलिए इस मामले में पूर्व में जी न्यूज़ की आलोचना करने वाले मीडिया बिरादरी और आम जनता को जी न्यूज़ का साथ देना चाहिए ..!! और दिल्ली पुलिस को अपने गिरेबा में झाकों ..!!

अंकुर विजयवर्गीय और दीपक सिंह चौहान के फेसबुक वॉल से.


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zee jindal

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