भाकपा (माले) ने कांग्रेसी नेताओं पर माओवादियों के हमले की निंदा की

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में 25 मई को कांग्रेस की ‘‘परिवर्तन रैली’’ पर माओवादियों द्वारा हमला किया गया, जिसमें महेन्द्र कर्मा सहित कई कांग्रेसी नेता मारे गए हैं और विद्याचरण शुक्ला सहित अनेक घायल हुए हैं। यह माओवादियों की आत्मघाती कार्यवाही है जिससे आदिवासी जनता पर राजकीय आतंक और भी तेज होगा।

भाकपा (माओवादी) की इस अराजक कार्यवाही का भाकपा (माले) निन्दा करती है, क्योंकि इस तरह की अराजक कार्यवाहियों से 1967 में उत्तरी बंगाल मे जमीन और सामाजिक बदलाव के लिए भूमिहीन-गरीब किसानों के नक्सलबाड़ी जनविद्रोह और उनके नेतृत्व में विभिन्न राज्यों में चले जन संघर्षों की छवि धूमिल होती है।

एक तरफ, भाकपा और माकपा की वर्ग समझौतावदी दिशा और दूसरी तरफ आन्ध्र प्रदेश, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में माओवादियों की अराजकतावादी आचरण के कारण प्रतिगामी ताकतों को कम्युनिस्ट आन्दोलन को बदनाम करने में मदद मिलती है, जिसकी आड़ में वे सभी मोर्चों पर घृणित हमला चला रहे हैं। यह बात पूरी तरह साफ है कि शासन व्यवस्था द्वारा मौजूदा हमले में कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के मारे जाने की घटना का इस्तेमाल माओवादियों के मजबूत इलाकों से उनका सफाया करने के लिए किया जाएगा। अर्द्ध-सैनिक बलों का यह हमला पहले ही शुरू हो चुका है, जो अब और तेज होगा। यह सोचना माओवादियों का बचकानापन है कि महेन्द्र कर्मा की हत्या कर वे सलवा जुडूम या आदिवासियों एवं उत्पीड़ित जनता पर ढाए गए जुल्मों का बदला ले सकते हैं। जहां महेन्द्र कर्मा ने सलवा जुडूम के लिए पहल की थी, वहीं भाजपा की अगुवाई वाली राज्य सरकार और केन्द्रीय सुरक्षा बलों ने इस पर अमल किया था।

प्रतिगामी नीतियों को लागू करने वाली भाजपा और कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य व केन्द्र सरकारों और शासन व्यवस्था को निशाना बनाने के बजाय माओवादी अराजक हमलों में लगे हैं, जो आखिरकार शासन व्यवस्था की ही मदद कर रहा है। इसकी आड़ में शासन व्यवस्था जनवादी आन्दोलनों और आदिवासियों पर हमले कर रही है और एस्सार, जिन्दल, टाटा जैसे कारपोरेट घरानों के लिए जमीन और खनिज की लूट की राह आसान कर रही है। कांग्रेस द्वारा इस माओवादी हमले का इस्तेमाल कर कम्युनिस्ट क्रान्तिकारियों की छवि भाजपा समर्थक के रूप में पेश की जाएगी, जबकि हकीकत यह है कि वे साम्प्रदायिक फासीवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं और कांग्रेस और भाजपा को एक ही सिक्के के दो पहलू के रूप में देखते हैं।

भाकपा (माले) एक बार फिर माओवादी नेतृत्व से अपील करता है कि वे अपने अब तक की गतिविधियों का मूल्यांकन करें, अपने अराजक रास्ते को छोड़ें और शासन व्यवस्था के खिलाफ देशव्यापी जनउभार के लिए जनता को गोलबंद और शिक्षित करने का रास्ता अख्तियार करें। साथ ही, हम सभी जनवादी ताकतों से अपील करते हैं कि केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा इस हमले के बहाने राजकीय आतंक तेज करने के प्रयासों का विरोध करें।

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