भाजपा की सेंट्रल लीडरशिप आज मोदी के आगे साष्टांग दंडवत है

Deepak Sharma : मोदी का स्वराज… ATTN Ms Swaraj/Mr Jaitley… सारे देश को मोदी कबूल नही इसमें नयी बात क्या है? बीजेपी को खुद मोदी कबूल नहीं, ये भी कोई नई बात नहीं? तो फिर मोदी दिल्ली दरबार तक पहुंचे कैसे? …ज़रा सोचिये… क्या आपने कभी अरुण जेटली और सुषमा स्वराज का विश्लेषण किया है? क्या आपने कभी राजनाथ सिंह का विश्लेषण किया है? या आपने अनंत कुमार या वेंकैया नायडू पर गौर किया? ये बड़े नेता पिछले ९ सालों से संसद और संसद के बाहर क्या कर रहे थे?

मित्रों, ये वो नेता हैं जो कभी अटल के पीछे खड़े हो गए कभी आडवाणी के पीछे खड़े हो गए और कभी संघ के पीछे… इनमें से एक भी नेता की अपनी मेहनत से जीती हुई लोकसभा की एक सीट नही है. हरियाणा की सुषमा हरियाणा में कहाँ हैं? दिल्ली के अरुण जेटली कहाँ है दिल्ली में? पूर्वांचल में क्या एक भी सीट से लड़कर दिखा सकते हैं राजनाथ? आंध्र में वेंकैया नायडू क्या विधायक का चुनाव जीत सकते हैं? अनंत कुमार ने कर्नाटक में पार्टी को आपस में भिड़ा कर और कौन-सी राजनीती की है?

मित्रों, नेता सिर्फ भाषण से नहीं बनते… बीजेपी में किसी भी राष्ट्रीय नेता ने पिछले ९ सालों में सड़क पर कोई संघर्ष नही किया.. अन्ना और केजरीवाल दिल्ली में जेल गए पर इस देश की राज्य सभा और लोक सभा में नेता विपक्ष हेलीकॉप्टर से नीचे नहीं उतरे.. क्या इनमें से किसी की हैसियत है कि वो १० जनपथ के सामने जाकर सोनिया को ललकार सके? समझौते और सहूलियतों की राजनीति की है इन बड़े नेताओं ने जबकि इन्हीं के मुताबिक देश जल रहा था, भ्रष्टाचार के गर्त में डूबा था.

मित्रों इसी कमज़ोर विपक्ष का फायदा एक भ्रष्ट सरकार ने उठाया और बीजेपी की इसी कमज़ोर सेंट्रल लीडरशिप में मोदी ने भी सेंध लगाई. चंगेज खान की तरह मोदी ने दिल्ली की पार्टी पर हमला करके उसे लूट लिया है …अंग्रेजी में ऐसे सत्ता हस्तांतरण को कू कहते है…आज सेंट्रल लीडरशिप मोदी के आगे साष्टांग है. हालात तो ये है कि बीजेपी के कुछ बड़े नेता अपने बचाव में नितीश, उद्धव और कुछ और मित्र दलों के नेताओं से मोदी पर वार करवा रहे हैं. ऐसी स्थिति में बीजेपी से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं….

आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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