भाजपा ने एमजी वैद्य को सिर्फ एक मामूली पत्रकार माना!

Devendra Surjan : कल भाजपा ने वरिष्ठ संघ पुरुष और जाने माने पत्रकार एम. जी. वैद्य को लगभग नकार दिया था. उन्हें संघ की आवाज़ न मानकर सिर्फ एक मामूली पत्रकार भाजपा ने माना था. उसी का परिणाम आज देखने मिला जब गडकरी को निर्दोष होने का सर्टिफिकेट देने वाले एस एस गुरुमूर्ति अपने स्टेंड से पीछे हट गए. उन्होंने गडकरी को इस बिना पर निर्दोष मानने से मना कर दिया कि मैं उन्हें व्यक्तिगत तौर पर जानता नहीं, निर्दोष करार कैसे दे सकता हूँ.

इस तरह गुरुमूर्ति के जरिये संघ के वरिष्ठ सदस्य एम जी वैद्य को नीचा दिखाने की घटिया चाल गडकरी और भाजपा को मंहगी पड़ी. गुरुमूर्ति ने यह भी कहा कि कारोबारियों को पार्टी अध्यक्ष नहीं बनाया चाहिए. अब गडकरी एक बार फिर गड्ढे में जाते दिख रहे हैं जबकि एम जी वैद्य की वरिष्ठता का पक्ष लेने जैसा कार्य करते संघ पहली बार दिख रहा है. संघ और भाजपा की यह अंतर्कलह कोई पहली बार सामने नहीं आई है.

और सबसे बड़ी बात यह कि दोनों संगठन किसी व्यक्ति विशेष की करनी का दोष अपने ऊपर आते हुए जब देखते हैं तो उससे तुरंत नाता तोड़ लेते हैं यह कह कर कि वह भाजपा में था अब नहीं है या संघ में थे लेकिन उनके बयान का कोई महत्व अब नहीं है. पहले संघ ने कहा कि गडकरी भाजपा के सरदर्द हैं लेकिन उनके बचाने की अंदरूनी कोशिश में संघ के हाथ जलते दिखे और गुरुमूर्ति पर गलत को सही ठहराने के दोष में इंस्टिट्यूशन आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा उनकी सनद खारिज किये जाने की आशंका ज्यो ज्यों बढ़ी गुरुमूर्ति और संघ दोनों ने एक बार फिर गडकरी को सहारा देने से इनकार कर दिया. कोई ताज्जुब नहीं कि श्री वैद्य के मुताबिक़ गडकरी का बेडा गर्क करने वाले गुजरात में ही मिलें.

देवेंद्र सुरजन के फेसबुक वॉल से साभार.

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