भानु भारती, सुनित टंडन, सोलो परफॉरमेंस, गांधी और कांग्रेस की आलोचना

Abhishek Srivastava :  नरेंद्रभाई एंड सन्‍स के अलावा आसपास बहुत कुछ ऐसा चल रहा है जिसे देखने-समझने की ज़रूरत है। मसलन, मंडी हाउस के श्रीराम सेंटर में एक नाटक चल रहा है ''बापू''। गांधीजी के पश्‍चात्‍ताप भरे आखिरी दिनों पर नंदकिशोर आचार्य का लिखा सोलो नाटक है। निर्देशक हैं भानु भारती और बापू बने हैं भारतीय जनसंचार संस्‍थान के महानिदेशक सुनित टंडन। भाषा अंग्रेज़ी है।

भानु भारती का नाम जितना बड़ा है, नाटक में निर्देशन के नाम पर वैसा कुछ भी नहीं है। सिर्फ सपाट अंग्रेज़ी नैरेशन है। गांधी जी मौलाना, सरदार, जवाहिर, सब पर मन ही मन अपना गुस्‍सा निकाल रहे हैं और कांग्रेस के बदले हुए चरित्र को लेकर दुखी हैं। तीनों दिन प्रवेश मुफ्त है। कोई प्रचार नहीं है। तिस पर, जनता नदारद है। नंदकिशोर आचार्य नाराज़ हैं, ऐसा सुनने में आया है।

जल्‍दबाज़ी में किए गए ऐसे घटिया रैकेट(?) तुरंत पकड़ में आ जाते हैं। आखिर भानु भारती को क्‍या पड़ी है कि सुनित टंडन के सोलो परफॉरमेंस वाला गांधी पर लिखा नाटक चुनाव के दिनों में चुपके से खेलें, जिसमें कांग्रेस की आलोचना हो? कौन, कहां से, क्‍यों, कैसे संचालित हो रहा है, इस समय का सबसे बड़ा सवाल यही है। कोई रंगकर्मी क्‍या इस नाटक के फंड का स्रोत पता लगाकर बता सकता है?

युवा पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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