‘भारत भावना दिवस’ के बहाने भावनाओं से खेलने की तैयारी में सहारा समूह!

सुप्रीम कोर्ट और सेबी के फंदे में बुरी तरह उलझा सहारा समूह पहले तो तमाम याचिकाएं दायर करके सेबी और सुप्रीम कोर्ट को बरलगलाने-उलझाने तथा ज्‍यादा से ज्‍यादा समय तक इस मामले को लटकाए रखने की कोशिश की. कई बार  विज्ञापन प्रकाशित करवाकर सेबी समेत तमाम संस्‍थाओं को परोक्ष रूप से डराने की भी कोशिश की. पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद अब सहारा समूह ने बिना मौसम के बरसात की तरह 'भारत भावना दिवस' मनाने जा रहा है. इसके लिए तमाम अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कराए गए हैं.

सहारा समूह 6 मई को भारत भावना दिवस के तहत विश्‍व रिकार्ड बनाने की तैयारी कर रहा है. इसके तहत ग्‍यारह लाख लोग एक साथ राष्‍ट्रगान गाएंगे. सहारा पाकिस्‍तान द्वारा बनाए गए रिकार्ड को तोड़ना चाहता है. सहारा इसके पहले भी देश के नाम पर अजीबो गरीब विज्ञापन प्रकाशित करवा चुका है. चाहे वो कामनवेल्‍थ गेम्‍स के दौरान भ्रष्‍टाचार से जुड़े मामले के समय का हो या किसी और मामले का. पर इस बार माना जा रहा है कि सहारा की सारी कवायद बेकार जाने वाली है.

इसकी टोपी उसके सर पर पहनाकर बड़ा आर्थिक साम्राज्‍य बनाने वाले सहारा समूह की गर्दन सेबी और सुप्रीम कोर्ट के पंजे में बुरी तरह फंस चुकी है. 217 शहरों में लोगों को आवास उपलब्‍ध कराने का सपना दिखाकर धंधा करने वाला सहारा समूह आजतक किसी शहर में इस सपने को पूरा नहीं कर सका है. लखनऊ के गोमती नगर में ही शर्तो का उल्‍लंघन करते हुए सुब्रत रॉय ने लोगों को आवास उपलब्‍ध कराने की बजाय खुद का राजमहल तैयार करा रखा है. अब तक तमाम नेताओं, अभिनेताओं, ब्‍यूरोक्रेट्स को ओबलाइज करने वाला सहारा समूह इस कदर उलझ गया है कि खुद सुब्रत रॉय पर ही गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.

बताया जा रहा है कि सेबी के चंगुल में फंस चुका सहारा समूह अब भारत भावना दिवस मनाकर और अपने पोती के अन्‍नप्रासन्‍न की तस्‍वीरें अखबारों में प्रकाशित करवाकर निवेशकों के टूट चुके विश्‍वास को रोकने का प्रयास कर रहा है. सेबी प्रकरण के बाद से कंपनी को कानूनी मोर्चे पर मुश्किलों का सामना तो करना ही पड़ रहा है, निवेशक भी सहारा से दूर जा रहे हैं. तमाम निवेशक अपने पैसे निकालने के लिए आवेदन भी कर रहे हैं. इन सब कारणों से सहारा समूह परेशान है इसलिए भावना दिवस की आड़ में लोगों की भावनाओं से खेलने की तैयारी कर रहा है. 

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