भास्कर के संपादक और डीएनई ने पार्षद से खबर के नाम पर मांगे दो लाख रुपये, ये है पूरी बातचीत

बांसवाड़ा । नगर परिषद बांसवाड़ा में मनोनीत पार्षद मनीष एन. त्रिवेदी के खिलाफ दैनिक भास्कर ने 19 सितंबर 2013 को पेज नंबर 2 पर 'गिरफ्तारी वारंट जारी' के शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसके पश्चात उक्त समाचार पत्र के संवाददाता (डीएनई-डिप्टी न्यूज एडीटर) हेमंत पाठक ने करीब पांच से अधिक बार दिनांक 22 सितंबर 2013 से 24 सितंबर 2013 तक पार्षद से मोबाइल पर बात की।

जो बातचीत हुई, वह कुछ वागड़ी भाषा में और कुछ हिंदी में है. एक बातचीत के दौरान हेमंत पाठक ने पार्षद मनीष एन. त्रिवेदी से कहा- इतने से क्या होगा, आधे तो कर दो। पार्षद ने आधे का मतलब पूछा तो संवाददाता (डीएनई-डिप्टी न्यूज एडीटर) श्री हेमंत पाठक का जवाब एक…। पार्षद ने कहा एक लाख तो बहुत होते हैं….। इस तरह लेनदेन की बातचीत चलती रहती है।

बातचीत में पार्षद कहते हैं कि मेरा मनोनयन तो ढाई साल पहले हो चुका है। आज ऐसा नया क्या हुआ है। समाचार पत्र पढने वाले लोग यह सोच रहे हैं कि खबर प्रकाशित करने बाद किस बात के रुपए मांगे जा रहे थे। इस बातचीत में पार्षद को कहा गया कि तुम्हारा मनोनयन रद्द होने तक हम लोग खबरें प्रकाशित करेंगे। इसी बात को लेकर मोबाइल पर उगाही की बातचीत हो रही थी। इस पर लेन-देन की बातचीत निरंतर संवाददाता एवं पार्षद के बीच होती रही। कभी सब्जी के भाव की तरह लेन-देन एक लाख से 70 हजार तक पहुंची…तो कभी 50 हजार की बातचीत होने लगी। पूरा मामला रफा-दफा करने की कीमत 70 हजार रुपए तय हुई।

इस पर पार्षद मनीष एन. त्रिवेदी ने पूछा कि यह पूरा रुपया किस के पास जाएगा। इस पर संवाददाता हेमंत पाठक ने कहा कि यह तो सब संपादक जी के पास जाएगा। उन्हीं का मामला है। पार्षद मनीष एन. त्रिवेदी ने हेमंत पाठक से बातचीत कर यह बात पुख्ता की कि मैं संपादकजी से बात कर लूं। इस पर संवाददाता (डीएनई-डीप्टी न्यूज एडीटर) हेमंत पाठक ने कहा कि हां…हां…जरूर कर लीजिए।

आखिर में पार्षद मनीष एन. त्रिवेदी ने जब इस बड़े अखबार के संपादक से मोबाइल पर बचतीत करते हैं तो इसमें पार्षद तस्दीक करता है रावल साहब बोल रहे हैं.? हां…जी…। इस पर पार्षद और तस्दीक करता है कि अपने भैया संवाददाता (डीएनई-डीप्टी न्यूज एडीटर) हेमंत पाठक से सेवंटी में बात हुई है। उन्होंने ही कहा था कि मैं आपसे बात कर लूं। तो यह सेवंटी उनको दे दूं क्या…?

संपादक जैसे बड़े पद पर कार्यरत तरूण रावल ने एक बार भी पार्षद से यह नहीं पूछा कि 70 हजार की लेन-देन क्यों और किस लिए हो रही है। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों की मिलीभगत से पार्षद को ब्लैकमेल किया जा रहा था।

संवाददाता, संपादक एवं पार्षद मनीष एन. त्रिवेदी की बातचीत के अंश प्रकार है……

पहली कॉल का पूरा ब्यौरा

हेमंत पाठक (संवाददाता) : हेलो —— हां—- मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद): हां दादा मनीष बोलूं—- हेमंत पाठक (संवाददाता) : अरे हां—तवीरा मीटिंग में बैठो तो— मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद): सॉरी यार डिस्टअप करियू— हेमंत पाठक : ना काई नी— वात थई है— पर ई तो कई रिया हैं के अठले थकी हूं थाय—। मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद) : अरे हेमंत भाई, मारी वात हुणो— हेमंत पाठक : अरदा तो करो एम कई रिया हैं मनीष त्रिवेदी : अरदा एठले केटला हेमंत पाठक : एक। मनीष त्रिवेदी : अरे एक लाख रूपया खूब थई जाए—हेमंत भाई—मारी वात हमजो—देखो मैं एक सामान्य आदमी हूं—यार मैंने ऐसा क्या कर दिया है, यार एक खबर हारू आम वात करंगा आपड़े केटला काम पड़ेगा अगाड़ी ऐम यार। मेरा मनोनयन आज तो हुआ नहीं है सरकार मने मनोनीत करियो ने अड़ी वर थई गया आजे एनी वात ने। ने यार आम केम करो। देखो तमे आप ने बुलाकर कहा मैंने उसी दिन कह दिया काई बात नहीं, मैं आता अपन बैठकर बात कर लेते हैं। कई दिक्कत नहीं। बराबर आपने बुलाया तुरंत आपको कहा मैं फोन करता हूं। मैं आया मैं कई भी रिस्पोंस देने में आगे-पीछे रहा हूं मेरे को बताओ आप। हेमंत पाठक : चलो छोड़ो दस मिनट में फोन करता हूं—साब हादी रिया है। मनीष त्रिवेदी : चलो ठीक है।

दूसरी कॉल का पूरा ब्यौरा

हेमंत पाठक (संवाददाता) : हां—जी— मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद): हां सर—- हेमंत पाठक (संवाददाता) : आवाज आवी री है मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद): हां अवे आवी री है बोलो हेमंत पाठक (संवाददाता) : हां—मु एम कई करियू हूं—मैं वात करी थी ऐणाने मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद): हां हेमंत पाठक (संवाददाता) : पण ई सित्तर कई रिया है। मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद): हुणो हेमंत पाठक (संवाददाता) : हां— मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद): केने, संपादक जी ने खुद ने वात करी ? हेमंत पाठक (संवाददाता) : हां— मनीष त्रिवेदी मनोनीत पार्षद : पसे हुं कई रिया हैं। हेमंत पाठक (संवाददाता) : सित्तर मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद) : सित्तर हेमंत पाठक संवाददाता : हां मनीष त्रिवेदी : सित्तर हजार देखो यार दादा दस बीस हजार में हूं फरक पड़ीरियो है हलो हेमंत पाठक (संवाददाता) : मैं कई दीदू आपने—यार आप जाणो ई जाणे मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद) : अरे हूं आप जाणो या ई जाणे—करावी दो तमे आप तमे वेस में हो—आम हूं वात करो—आप जाणो ई जाणे—आम हे ने तेम है—। हेमंत पाठक संवाददाता : अरे मूं परेशान थई ग्यो यार तमारे वेस में— मनीष त्रिवेदी (मनोनीत पार्षद) : अरे हूं परेशान थई ग्यो दादा। अरे यार कर करा के छोड़ो अंत में स्पष्ट आवाज नहीं है।

तीसरी कॉल का पूरा ब्यौरा

हेमंत : हेलो मनीष : हां हेमंत भाई, नमस्ते हेमंत : हां मनीष : हूं थई वात साहब संपादकजी थी हेमंत : हां बोलो मनीष : हो गई बात हेमंत : मैंने आपको बता तो दिया था आपको मनीष : अरे बता दिया था पर दादा पर आप कराई दो—50 में खत्म करो—हू करो—यार—मू टेंशन में नवरू—। हूं मतलब— यार–हूं। हेमंत : मैंने आपको बता दिया वो कर दो के क्या है—आप भी पकड़ के बैठो हो 50 पे मनीष : मूं आपने कई रियूं हूं 50 में फाइनल कराण दो दादा। वात करी ने खत्म करो के। हेमंत : हूं फरक पड़े मनीष : फरक तो काई नी है फरत तो ठीक है। वा मने बे तीन दाड़ा नो टाईम आलो—। हेने—एडजेस्टमेंट करीनी व्यवस्था करूं। हेमंत : बे तीन दाड़ा मनीष : बे तीन दाड़ा नो टाईम आलो। जेम व्यवस्था थई जाए तमने आगाड़ी बड़ी ने फोन कर दूंगा। हेमंत : अरे हूं बे तीन दाडा— मनीष : हें हेमंत : बे तीन दाडा थोड़ी थाय— मनीष : अरे यार मुं काई नाहीं जावा नू हूं। आईस तो हूं बांसवाड़ा में हूं भई यार। हेमंत : बे तीन दाड़ा नी, काले हांजे तक नी वात है। मनीष : आम मत करो दादा परेशान हूं। हेमंत : हा हा—हा हा— मनीष : हें हेमंत : बे तीन दाड़ा तो नी—साबे काले हांज तक नी कीदू है। मनीष : साब हूं कई रिया हैं। हेमंत : कल भिजवा दे ऐम केह देना। मनीष : चलो मूं ट्राई करी ने फोन करूं।

चौथी कॉल का पूरा ब्यौरा

हेमंत : हेलो मनीष : हां मनीष बो लूं। हेमंत : हां बोलो मनीष : हां में यू कह रहा था मैं ये करा देता हूं फिर वो संपादकजी अलग से तो कुछ नी कहेंगे बाद में। हेमंत : ना ना उनका ही मामला है मेरा कुछ नहीं मनीष : ना ना वो बात बराबर है उनका मामला है वो बात सही है पर मेरी उनसे बात नहीं हुई है। बाद में वो ये नहीं कहेेंगे कि मैं नहीं जानता हूं। यूं तो नहीं कहेंगे आप तो मेरे को दो अलग से दो। हेमंत : ना ना मनीष : डबल-डबल पैमेंट नहीं करवू पड़े मने। हेमंत : ना ना ऐसा कुछ नहीं होगा। मनीष : ई गारंटी तो पसी आपनी है के बाद में फोन करी ने के कि मेरे हेमंत से कोई मतलब नहीं है। मेरे को मेरे पैसे दो। हेमंत : बिलकुल मनीष : ई तो शोरिटी है आपकी— हेमंत : बिलकुल। मनीष : तो तू मूं व्यवस्था में लागू— हेमंत : बिलकुल मनीष : ऐने बाद पसे सब गारंटी आपनी है मूं नी जाणू पूरी गारंटी आपकी और संपादकजी की है हेमंत : बिलकुल। मनीष : में इंतजाम में लागी रियू हूं हेमंत : हां फोन कर जू।

पांचवी कॉल का पूरा ब्यौरा

हेमंत : हलो– मनीष : हां दादा मनीष बो लूं हेमंत : हां मनीष : थई थी संपादकजी तकी वात हेमंत : क्या मनीष : फाइनल हेमंत : मैंने बता दिया ने आपको मनीष : बस वोई हेमंत : हां मनीष : मैं एक बार बात करूं उनसे कैसे करूं हेमंत : जैसी आपकी इच्छा—। मनीष : आप को तो करूं। ऐम यार—। मूं तो आप थकी वात करि रो हूं। डायरेक्ट वात ने करूं। हेमंत : मैंने आपको बता तो दिया। वो जो बता रहे हैं वो। मनीष : हित्तर त की थोडू ऊपर-नीसे करावी दू यार—। हेमंत : अरे आटलो तो थ ई ग्यू है। मनीष : अरे यार—आप छापवा पहले कई दिता तम मने—मारे केवाने मतलब ऐम था। हेमंत : तमारे तकी वात थाए तारे—। मनीष : अरे इस तो कई रियो—बई ने वात कर लेता। अपना काम खतम थातो—हवे हेत्था गाम में मारो जुलूस निकरि ग्यो। फोकट फोकट में काई मतलब नी। काई नी— हेमंत : गेंद तमारे पाले मे है। मनीष : मारा पाला में हूं। आप ने तमारा पाले में है। मैंने वो ही किया जो आपने कहा। देखो आपके हिसाब से सेटअप जमा दो। मने काले हवार में बताड दो मनीष भई आपने फाइनल करवो है। संपादकजी आम कई रिया है। आठला में फाइनल करवो है। मैं आपको भिजवा देता हूं। हेमंत : हंसते हुए मैंने बता दिया आपको। मैंने बता दिया आपको। मनीष : अड़े हुए मत रहो—। हेमंत : मुझे कोई धर्मसंकट में मत डालो।

छठी कॉल का पूरा ब्यौरा

मनीष : हेलो तरूण रावल : हेलो हां जी मनीष : सर रावल साहब बोल रहे हैं तरूण रावल : हां बोल रहा हूं। मनीष : सर नमस्ते मनीष त्रिवेदी बोल रहा था। तरूण रावल : हां जी मनीष : सर वो उनका भैया का फोन आया था अपने हेमंत भैया का तरूण रावल : हां मनीष : अपने संवाददाता है होकम वो उनसे बात हो गई थी मेरी। तो आपके नॉलेज में दे बाद में उनको कर दूं। वो सेवंटी की बात हुई थी। तरूण रावल : हां मनीष : बाद में फिर साब आपके नॉलेज में नी हो। यूं करके आपसे बात कर लूं। उन्होंने कहा कि था कि आपसे बात कर लेना। तरूण रावल : हां हां कोई दिक्कत तो नहीं। ताकि क्या— तरूण रावल : हां मनीष : तो कोई दिक्कत तो नहीं पैमेंट मैं आपसे एक बार बात कर लूं। उन्होंने कहा एक बार आप बात कर लेना। हां कोई दिक्कत तो नहीं मैं उनको पैमेंट कर दूं। साब मनीष : जी–जी— तरूण रावल : ऐसा कुछ नहीं है। मनीष : जी—जी–हां वही कह रहा हूं तरूण रावल : ऐसा कुछ नहीं है मनीष : हां तरूण रावल : आप तो सुप्रीम कोर्ट का डोक्यूमेंट हो तो भिजवा देना मनीष : हां वो तो भिजवा दूंगा। बाकी एमाउंट वाला उनको भिजवा दूं ना साब कोई दिक्कत तो नी। तरूण रावल : ना ऐसा कुछ नहीं। मनीष : ठीक

'अंदर की खबर' अखबार के वेब पोर्टल से साभार.


संबंधित आडियो टेप सुनने के लिए यहां क्लिक करें… (सुनें टेप)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *