भास्कर को माल दिलाओ, बदले में खुद विदेश जाओ… ब्यूरो चीफों के लिए लालीपाप… पढ़ें आफिसियल लेटर

: दैनिक भास्कर का दीवाली धमाका : पत्रकारिता की लौ भले बुझ जाए पर तिजोरी में माल की आमद तेज हो जाए : दैनिक भास्कर दीवाली पर खूब विज्ञापन बटोरना चाहता है। ये अखबार जो पिछले कई सालों से अपने पत्रकारों को विज्ञापन विभाग से दूर रखने की बांतें हांकता था, संपादकीय और विज्ञापन विभाग में रेखा खींच कर बहुत ही आचार संहिता की बातें किया करता था, इस साल दीवाली पर सारी संहिताएं स्वाहा करके सिर्फ और सिर्फ विज्ञापन चाहता है और हल हाल में चाहता है और ज्यादा से ज्यादा चाहता है।

इस प्रक्रिया में ब्यूरो चीफ जो कि स्ट्रिंगर रूपी मुर्गों को आबाद-हलाल करने के लिए नियुक्त किए गए हैं, उनको विदेश घुमाने का प्रलोभन दिया जा रहा है। प्रलोभन ये रखा है कि अगर कोई ब्यूरोचीफ अपने क्षेत्र के स्ट्रिंगरों से 6 से 7 सात लाख रुपए, जो कि क्षेत्र-क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग हैं, निकलवा लेता है तो उसको विदेश में मुफ्त में घुमाने का खर्च भास्कर उठाएगा।

भास्कर से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि कई ब्यूरो चीफ विदेश की बात दूर, बगल के शहर में अपने रिश्तेदरों की मौत का अफसोस मनाने तक नहीं जा पाए हैं. ऐसे बहुत से भास्कर के पत्रकार हैं जिनके रिश्तेदारों और सगे संबंधियों ने उनको इसलिए डिफाल्टर घोषित कर दिया कि वो भास्कर की फेवीकोल वाली कुर्सी से उठकर उनके सुख दुख में नहीं आते. ऐसे में विदेश जाने की बात तो कई ब्यूरो चीफों को रात को सोने भी नहीं दे रही. पंजाब-हरियाणा के जिलों में चर्चा है कि यहां तो ब्यूरो चीफ सीट पर बैठते ही खबर की बात कम और विदेश जाने की बात पर ज्यादा विचार करते हैं.

लेकिन इस सबके बीच हालत उन बेचारे स्ट्रिंगरों की पतली हुई जा रही है, जिनको विज्ञापन लाने के नाम पर पूरी तरह ब्लैकमेल किया जा रहा है. हर जिले में चार से पांच स्ट्रिंगर हैं, जिनमें अधिकांश तो बिल्कुल गांव के जैसे कस्बे की रिपोर्टिंग करते हैं. उनके लिए लाखों बटोरना आसान नहीं. फिर स्ट्रिंगर को मिलेगा क्या? ये तो चर्चा भी नहीं है. फिल्हाल तो इन बेचारों को ब्यूरो चीफों की धमकियां मिल रही है, विज्ञापन लाओ नहीं तो….

इस पूरे मामले में एक मजेदार बात और है. कई ब्यूरोचीफ आपस में ये भी बतिया रहे हैं कि भाई कहीं विदेश ले जाने के नाम पर भास्कर वाले पाकिस्तान, नेपाल और भूटान तक ही घुमाने ले गए तो फिर तो हमने कुछ भी नहीं कमाया। एक दो कहते हैं कि अरे कहीं ये म्यांमार और अफगानिस्तान ही न भेज दें. वहां तो खाना मिले न मिले, गोलियां बहुत मिलती है, बंदूक वाली गोली। साररूप में भास्कर ने मांस का टुकड़ा फेंक कर तहलका मचा दिया है। इससे पत्रकारिता भले पिछड़े, लेकिन भास्कर की तिजोरी जरूर भर जाएगी।



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