भास्कर वालों की बुद्धि पर हंस सकते हैं आप, देखें तस्वीर

यशवंतजी, भास्कर ने आज अपने पहले पन्ने पर फोटो प्रकाशित करके दावा किया है कि भारत के वायु सेना मार्शल अर्जन सिंह दिल्ली में आयोजित एक प्रोग्राम में गलती से सोच बैठे कि  रक्षा मंत्री एके एंटोनी उनके पांव छू रहे हैं शायद बड़े के नाते… फोटो में मंत्री अपन हाथ से गिरा हुआ कागज उठाने के लिए झुके हुए हैं व उस कुर्सी के नीचे से कागज उठा रहे है, जिस पर मार्शल अर्जन सिंह बैठे हुए है… फोटो में इतना सा चित्रण है कि मंत्री कुर्सी के नीचे से कागज उठा रहे हैं और वायु सेना मार्शल ने उनकी पीठ पर हाथ रखा हुआ है.

अब भास्कर दावा कर रहा है कि मार्शल को गलत फ़हमी हुई कि रक्षा मंत्री उनके पांव छू रहे हैं और व़ो इस मुगालते में उनको आशीर्वाद देने लगे… लेकिन तस्वीर को गौर से देखा जाये तो इस तरह 100 प्रतिशत का दावा करना भास्कर के लिए संभव नहीं है.. क्योंकि तस्वीर में वायु सेना मार्शल ने मंत्री की पीठ पर या कहे कि लगभग कंधे पर हाथ रखा है.. य़े भी हो सकता है कि मंत्री को कागज उठाने के लिए झुकता देखते हुए मार्शल अर्जन सिंह  ने मंत्री का शारीरक संतुलन बनाने के लिए हल्का कंधे पर हाथ रखा होगा.

स्‍वाभाविक सी बात है कि पहले जब मंत्री के हाथ से कागज मार्शल की कुर्सी के नीचे गिरा होगा क्या उन्होंने तब नहीं देखा होगा कि मंत्री खड़े हुए और उनके हाथ से कागज गिर गया.. स्थिति के अनुसार जैसा कि भास्कर ने कैप्शन लिखा है.. मंत्री उठकर चले होंगे कि उनके हाथ से कागज गिर गया होगा…फिर कोई किसी के पांव और व़ो भी देश का रक्षा मंत्री बस तपाक से पांव पकड़ लेगा, बिना कोई भावुक भाव भंगिमा बनाये… रक्षा मंत्री के मन में भी एक बड़े बुजुर्ग के लिए श्रद्धा भाव आ सकता है.. लेकिन वहां का डेकोरम कुछ और होता है.

क्या भास्कर ने सोच लिया कि पाठक भी उसके चश्मे से ही फोटो को देखेगा… भास्कर कहेगा कि मानो की वायुसेना मार्शल को गलत फ़हमी हो गयी, पाठक भी बिना प्रमाण मान ही लेगा… नहीं .. फोटो में साफ दिख रहा है कि मंत्री जी की डायरी से कागज गिरा और वायु सेना मार्शल को इसका अंदाजा होगा ही.. फिर व़ो एक सेना के इतने बड़े ओहदे से जुड़े हैं.. उन्हें क्या इसका भान नहीं होगा कि देश का रक्षा मंत्री उनके पांव को ऐसे एक आधिकारिक कार्यक्रम में तो कम से कम नहीं छुएगा.. अगर छूने भी लगे तो क्या ऐसे तपाक से कूद कर पांव पकड लेगा… पाठक पूछेगा भास्कर से कि माना की तुम दैनिक भास्कर की जगह दैनिक बकवासकर के रूप में विख्यात हो.. लेकिन पाठकों को इतना बेवकूफ तो ना मानो.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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