”भास्‍कर पढ़कर खराब हो रही है हमारी हिंदी, देखें गलतियां ”

सर, हम दैनिक भास्कर के पाठक हैं, मगर अखबार में जिस तरह गलतियां हो रही हैं इससे लगता है कि अखबार पढ़ने से न केवल हम लोग बल्कि हमारे बच्चों की हिंदी भी खराब होगी और उन्हें गलत जानकारी मिलेगी. अभी २४ फ़रवरी को अखबार में भाई बहन की फोटो लगा कर उन्हें दंपति बना दिया गया था. अगले दिन भूल सुधार छापा गया. सर कुछ और गलतियों की तरफ आपका ध्यान दिलाना चाह रहा हूँ. दोनों गलतियों से संबंधित अखबार का पन्ना भी अटैच कर रहा हूँ. हालांकि इस तरह की गलतियां लगातार हो रही हैं.

पहली गलती २२ मार्च को छपी खबर की हेडिंग में है, हेडिंग में लिखा गया है- 'प्रधान सचिव को निर्देश लिखे जेनरिक दवाएं', जबकि खबर के अनुसार यहां 'प्रधान सचिव का निर्देश, लिखें जेनरिक दवाएं' होना चाहिए था. यह निर्देश खुद प्रधान सचिव ने दिया था..खबर में भी यही है. ऐसे ही २४ मार्च को मोगा भास्कर के पेज चार पर लगी खबर में हुआ मज़ाक भी देख लें. हेडिंग में ट्राईसिकल जबकि खबर में ट्राईसाइकिल लिखा गया है. सबसे बड़ा मज़ाक संस्था के नाम को लेकर किया गया है. संस्था का नाम है 'एंटी क्राइम एंड करप्शन इंडिया' मगर हेडिंग में लिखा गया है 'क्राइम एंड करप्शन इंडिया'. अब आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि भास्‍कर कैसे लोगों के हाथ में है.

स्‍वर्ण कुमार

swarnkumar5@gmail.com

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