भास्‍कर में फिल्‍म संपादक बने आलोक, ‘लक्ष्‍य’ बंद होगा और जयपुर से छपेगा रसरंग

अहा जिंदगी से खबर है कि आलोक श्रीवास्‍तव की जिम्‍मेदारियां बढ़ा दी गई हैं. वे अहा जिंदगी के साथ दैनिक भास्‍कर के फिल्‍म संपादक भी बना दिए गए हैं. आलोक लम्‍बे समय से अहा जिंदगी के साथ जुड़े हुए थे तथा इसे अलग पहचान दी. आलोक ने अपने करियर की शुरुआत 1990 में धर्मयुग के साथ की थी. इसके बाद वे कई संस्‍थानों को सेवा देते हुए भास्‍कर पहुंचे थे, जहां उन्‍हें अहा जिंदगी की जिम्‍मेदारी दी गई थी. उनकी काबिलियत को देखते हुए प्रबंधन ने अब उन्‍हें नई जिम्‍मेदारी सौंप दी है.

उधर, भास्‍कर समूह करियर और एजुकेशन पर आधारित अपनी पत्रिका 'लक्ष्‍य' का प्रकाशन बंद करने जा रहा है. खबर है कि इस पत्रिका को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई. बाजार में मौजूद दूसरी प्रतियोगी पत्रिकाओं में काफी कोशिश के बाद भी 'लक्ष्‍य' अपना लक्ष्‍य हासिल नहीं कर पाया. लगातार गिरते प्रसार के चलते प्रबंधन ने अब इस पत्रिका को बंद करने का निर्णय ले लिया है. यह पत्रिका प्रशासनिक सेवाओं के साथ रेलवे व अन्‍य प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्‍यान में रखकर प्रकाशित किया जा रहा था. पर अन्‍य पत्रिकाओं की तुलना में कंटेंट लेबल पर यह पत्रिका उन्‍नीस साबित हो रही थी, जिसके चलते पाठकों का रुझान इस पत्रिका को नहीं मिल पाया.

वहीं दूसरी खबर यह है कि भास्‍कर अब मुंबई से प्रकाशित होने वाले रसरंग का प्रकाशन सेंटर भी चेंज कर दिया है. प्रबंधन अब रसरंग का प्रकाशन जयपुर से करेगा. इसके लिए एक आंतरिक मेल भी जारी कर दिया गया है. मेल में बताया गया है कि रसरंग सप्‍लीमेंट को अहा जिंदगी की टीम बनाएगी. गौरतलब है कि अहा जिंदगी की टीम की कुशलता के चलते ही यह पत्रिका भास्‍कर समूह की ज्‍यादा बिकने वाली पत्रिका बनती जा रही है. इसमें आलोक श्रीवास्‍तव के साथ चंडीदत्‍त शुक्‍ला जैसे पत्रकार शामिल हैं.
 

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