भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष रविकांत दुबे का डबल गेम!

पटना। यह तो हद हो गई, एक ओर भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष रवि कांत दुबे अपने फेसबुक पेज पर लगातार लिख रहे हैं कि सब राजनीति है, और भोजपुरी अभिनेता तथा गायक मनोज तिवारी तथा लोकगायक भरत शर्मा द्वारा लौटाया गया सम्मान उनके पास पहुंचा ही नहीं, वहीं दूसरी ओर वह इस सम्मान को वापस लेने से इंकार कर रहे हैं। बिहार सरकार के सख्त रुख के बाद अवधी लोक-गायिका मालिनी अवस्थी के ब्रांड-एम्बेस्डर बनने से इंकार कर देने के बावजूद भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी के अनुसार वह तब तक यह सम्मान वापस नहीं लेंगे, जब तक रवि कांत दुबे सार्वजनिक तौर पर माफी ना माँग लें।

पिछले एक हफ्ते से इन कलाकारों के प्रतिनिधि श्री रंजन सिन्हा सम्मान को देने के लिये रवि कांत दुबे के घर और भोजपुरी अकादमी के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन रवि कांत दुबे इसे लेने से लगातार इंकार कर रहे हैं। एक बार तो श्री सिन्हा बकायदा मीडिया वालों के साथ दुबे के घर जा पहुँचे, लेकिन वहाँ उसने इसे लेने से इंकार कर दिया। उसके बाद श्री रंजन सिन्हा 2-3 बार भोजपुरी अकादमी के कार्यालय जा चूके हैं, लेकिन दुबे और भोजपुरी अकादमी के अन्य कर्मचारी इसे लेने से इंकार कर रहे हैं।

भोजपुरी अकादमी के इस रवैये से तंग आकर श्री रंजन सिन्हा ने कल इसे कुरियर द्वारा भेजा रसीद दिखाया जिसमें लिखा है कि ''भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष के निर्देशानुसार अकादमी कार्यालय ने इसे लेने से इंकार कर दिया''। इस तरह की घटिया राजनीति कर के बिहार सरकार की भोजपुरी अकादमी क्या साबित करना चाहती है, यह तो अकादमी के अध्यक्ष ही बता सकते हैं, लेकिन इस घटना से उनका चाल, चेहरा और चरित्र सामने साफ दिखाई देता है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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