भोपाल दूरदर्शन व आकाशवाणी के स्ट्रिंगर्स और पीटीसी की हालत दयनीय

भोपाल। प्रसार भारती के महत्वपूर्ण अंग भोपाल दूरदर्शन और आकाशवाणी की हालत काफी खराब है। बात भुगतान की हो तो समझ आती है कि शासकीय प्रक्रिया में देरी हो सकती है, लेकिन 2012 के परिचय पत्र न तो आकाशवाणी से बने हैं और न ही दूरदर्शन से। वहां बैठे अधिकारी और सम्पादक सरकार को चूना लगाने में माहिर हो गए हैं और हालात यह है कि स्ट्रिंगर्स या पीटीसी को किसी न किसी बात से ब्लैकमेल कर रहे हैं।

प्रदेश के अधिकांश जिलों में इस समय पीटीसी और स्ट्रिंगर्स काम कर रहे हैं। पीटीसी आकाशवाणी से जुड़े हुए हैं और वहां के सम्पादक पीटीसी की गलतियां कम निकालते हैं उनका अपमान ज्यादा करते हैं। हजारों रुपए का वेतन लेने वाले यह सम्पादक अपने अधिनस्थों से फोन लगवाकर आड़ी-तिरछी बातें करते हैं और यही कारण है कि इन दिनों रेडियो पर वाईस कास्ट होना कम हो गई है। दूरदर्शन के स्ट्रिंगर्स की तो भारी जमात सम्पादक ने भर दी है। एक ही जिले में तीन स्ट्रिंगर्स नियुक्त करके सम्पादक अपने वरिष्ठों से कौन सी शाबासी लेना चाहते हैं कुछ समय नहीं आ रहा है।

जब एप्रूरवल लेने के लिए स्ट्रिंगर्स फोन लगाता है तो उसे एप्रूवल देने में आनाकानी की जा रही है। ऐसे में एक माह में एक स्ट्रिंगर्स के हिस्से में दो-दो स्टोरी भी नहीं आ रही है। फिर वहां बिल भेजने पर महिनों उनका भुगतान नहीं होता है। स्ट्रिंगर्स न तो ठीक से स्टोरी कर पा रहे हैं और न ही उन्हें भुगतान समय पर हो रहा है। सम्पादक को खुश रखो तो अप्रूवल मिलता है नहीं तो स्टोरी न मिलने का दंश झेलना पड़ता है। इस बार से नाराज कई स्ट्रिंगर्स ने अप्रूवल लेना ही छोड़ दिया है। ऐसे में केंद्र सरकार की मंशा और उनकी योजनाओं को जनता के सामने लाने का लक्ष्य भी प्रभावित हो रहा है। कई पीड़ित स्ट्रिंगर्स तो कांग्रेस नेताओं के साथ अब सीधे केंद्र सरकार से पत्र-व्यवहार कर सारी स्थिति से अवगत कराने के लिए मैदान में आ गए हैं। ताकि शीघ्र ही सरकारी व्यवस्था में सुधार आए और सभी का भला हो।

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