भ्रष्‍टाचार उजागर करने वाले, कलेक्‍टर की नजरों में नक्‍सलवादी

प्रिय पत्रकार साथी, हाल ही में बड़वानी कलेक्‍टर का सरकार का लिख पत्र सार्वजनिक हुआ है जिसमें उसने अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे लोगों को नक्‍सलवाद से जोड़ने का प्रयास किया है। मजेदार बात है कि पुलिस ने इससे इंकार किया है। इसी संदर्भ में जागृत दलित आदिवासी संगठन की प्रेस विज्ञप्ति संलग्‍न है। इस संबंध में अधिक जानकारी हेतु संगठन के कार्यकर्ता हरसिंह जमरे, वालसिंह सस्तिया, माधुरी बहन आदि से madhuri.jads@gmail.com या 9179753640 संपर्क करें।

सधन्‍यवाद

रेहमत

प्रेस विज्ञप्ति

बडवानी जिले में ‘मनरेगा’ के भारी भ्रष्‍टाचार को उजागर करने के बदले में हमारे ‘जागृत आदिवासी दलित संगठन’ को कलेक्‍टर मनगढंत रूप से नक्‍सलवादी करार करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक जिले के तीन विकासखंडों में हुई उच्‍च-स्‍तरीय सरकारी जांच से जाहिर हुए करीब डेढ सौ करोड रुपयों के घोटाले पर लीपापोती करने की गरज से कलेक्‍टर श्रीमन शुक्‍ला ने उच्‍च अधिकारियों को इस आशय का पत्र लिखा है। ‘संगठन’ कलेक्‍टर को खुली चुनौती देता है कि वे अपने आरोपों को सबूत सहित सार्वजनिक करें।

हमारे संगठन को घेरने  की हडबडी में कलेक्‍टर इस मसले पर पुलिस की राय लेना भी भूल गए। अखबारों के मुताबिक पुलिस मानती है कि बडवानी में नक्‍सलवादी नहीं है। ‘संगठन’ राज्‍य शासन से मांग करता है कि वह ऐसी मनगढंत और झूठी जानकारी देने के अपराधी कलेक्‍टर श्रीमन शुक्‍ला को तत्‍काल निलंबित कर कार्रवाई करे।   

‘जागृत आदिवासी दलित संगठन’ इस आधारहीन, फूहड और गैर-जिम्‍मेदार पत्र लिखने के आरोप में कलेक्‍टर श्रीमन शुक्‍ला के खिलाफ अदालत में प्रकरण दायर करेगा। उल्‍लेखनीय है कि रोजगार गारंटी कानून बनाने में सक्रिय भागीदारी के अलावा ‘जागृत आदिवासी दलित संगठन’ की पहल पर बडवानी जिले को बेरोजगारी भत्‍ता प्राप्‍त करने वाले देश के पहले जिले का खिताब मिल चुका है।

संगठन की भ्रष्‍टाचार विरोधी मुहीम के चलते जिला प्रशासन संगठन के खिलाफ इस तरह के हथकंडे इस्‍तेमाल कर रहा है। स्‍थानीय छुटभइए नेताओं से मिलकर प्रशासन ने पिछले दिनों ‘संगठन’ के कार्यकर्ताओं पर जिला-बदर की कार्रवाई भी की थी, लेकिन इस हरकत के गैर-कानूनी होने और संगठन के आंदोलन के दबाव में बेशर्मी से इसे वापस लेना पडा था।

पिछले दिनों संगठन से जुडे आदिवासी मजदूरों ने महीनों और कहीं-कहीं तो सालों से लंबित मजदूरी के भुगतान के लिए जिला पंचायत और कलेक्‍टर से शिकायतें की थीं। बाद में कई बार धरना-आंदोलन करने के बाद भी संतोषप्रद जबाव न मिलने पर भूखे मजदूरों ने कलेक्‍टर से जिले में ‘मनरेगा’ का हिसाब-किताब मांगा था। कानूनी प्रावधानों के तहत हिसाब मांगने पर जिला प्रशासन ने टालमटोल की। इस पर ‘संगठन’ ने राज्‍य और केंद्र की सरकारों को लिखा था। जबाव में राज्‍य और केंद्र सरकारों ने अपने-अपने स्‍तर पर उच्‍च-स्‍तरीय जांच शुरू की। नतीजे में अब तक की जांच में जिले के कुल तीन विकासखंडों में करीब 150 करोड रुपयों का घोटाला पाया गया है। राज्‍य के करीब सौ अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा की जा रही यह जांच अब भी जारी है और ‘संगठन’ को इसमें करीब 350 करोड रुपयों का घोटाला उजागर होने आशंका है।

मजदूरी के भुगतान में देरी के कारण भूख और बदहाली भुगतते आदिवासी मजदूरों के खिलाफ जिला प्रशासन और कलेक्‍टर की घटिया और गैर-कानूनी हरकत से नेताओं और प्रशासन की मिलीभगत साफ हो गई है। जिले के आदिवासी मजदूरों के प्रति अपनी संवैधानिक जिम्‍मेदारी निभाने के बजाए कलेक्‍टर श्रीमन शुक्‍ला भ्रष्‍टाचारियों को बचाने में लगे हैं। इस हरकत की निंदा करते हुए ‘जागृत आदिवासी दलित संगठन’ कलेक्‍टर से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग करता है। 

‘जागृत आदिवासी दलित संगठन’ को नक्‍सलवादी घाषित करने की हडबडी में कलेक्‍टर ने अपने पत्र में महाराष्‍ट्र में संगठन पर प्रकरण दायर होने की झूठी और मनगढंत जानकारी दी है। सचाई है कि हमारे संगठन का महाराष्‍ट्र में कोई काम नहीं है और न ही वहां किसी कार्यकर्ता पर कोई प्रकरण दायर किया गया है।

‘जागृत आदिवासी दलित संगठन’ कलेक्‍टर के दुर्भावनापूर्ण प्रयासों से डरने वाला नहीं है। वह भयभीत हुए बिना भ्रष्‍टाचार और अन्‍याय के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण और संवैधानिक आंदोलन जारी रखेगा।

हरसिंह जमरे

माधुरी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *